रासायनिक तौर पर द्रव्यों को तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो हैं- तत्व, यौगिक, मिश्रण।

तत्त्व

तत्व वे पदार्थ या द्रव्य होते हैं, जिनमे पाये जाने वाले अणुओं में परमाणुओं की प्रकृति एक समान होती है।
फ़्रांस के विख्यात वैज्ञानिक लेवाइज़र ने अपने प्रयोगों के आधार पर इस बात की पुष्टि की थी कि किसी भी द्रव्य का सबसे साधारण व सरल रूप तत्व है।
तत्व प्राकृतिक रूप से ही सृष्टि में विद्यमान होते है। किन्ही भी रासायनिक क्रियाकलापों द्वारा इनको निर्मित नही किया जा सकता और न ही किन्हीं अन्य भिन्न द्रव्यों के मेल से इन्हें बनाया जा सकता है।
तत्व तीन रूपों में पाये जा सकते हैं-
धातु- ये ऊष्मा व विद्युत् के सुचालक होती है तथा इनमें बाहरी चमक दिखाई देती है। सोना, चाँदी, ताँबा, पीतल आदि शुद्ध धातुएँ होती हैं।
अधातु– धातु के विपरीत ये विद्युत् व ऊष्मा से अच्छे चालक नही होते हैं और इनमे किसी प्रकार की चमक नही पाई जाती है। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन आदि धातु के अंतर्गत नहीं आती हैं तो ये अधातु हैं।
उपधातु- ये तत्व कि वह स्थिति है जिसमें धातु व अधातु दोनों के ही कुछ न कुछ विशेषतायें व गुण विद्यमान रहते हैं। सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक आदि को उपधातु की श्रेणी में रखा गया है।

यौगिक

जैसा कि नाम से ही ज्ञात हो रहा है कि “यौगिक” शब्द “योग” से बना है अर्थात् मेल या जोड़।
जब एक से अधिक तत्व आनुपातिक रूप से परस्पर मिलते हैं तथा उनके मध्य रासायनिक प्रक्रिया होने से जब एक अन्य द्रव्य (पदार्थ) अस्तित्व में आता है, उसे यौगिक कहते हैं।
ऐसे मेल से इनमें पाये जाने वाले तत्वों के आधारीय गुणों में भी परिवर्तन आता है। जैसे- जल (H2O) हाइड्रोजन व ऑक्सीजन से मिलकर बनता है। हाइड्रोजन का आधारीय गुण है कि यह स्वयं ज्वलनशील है तथा ऑक्सीजन का गुण है कि यह आग लगने व बढ़ने में सहायता पहुँचाता है। पर जब ये दोनोँ मिलकर जल (यौगिक) बन जाते हैं जो कि आग को बुझाने में सहायक होता है। इनके वे गुण खत्म हो जाते है।

क्षार, लवण, अम्ल, गैसें आदि द्रव्य भी यौगिक रूप में पाये जाते हैं। जैसे- पोटेशियम हाइड्रोक्साइड (क्षार), कैल्शियम कार्बोनेट (लवण), सल्फ्यूरिक एसिड (अम्ल), अमोनिया (गैस) आदि।
रासायनिक सूत्रों व क्रियाओं के द्वारा यौगिक में पाये जाने वाले तत्वों में पृथक्करण भी किया जा सकता है।

यहाँ ध्यान देने वाला तथ्य यह है कि दो या अधिक तत्वों के एक निश्चित मात्रा या अनुपात में होना आवश्यक है अर्थात् आनुपातिक निश्चितता से ही यौगिक बनता है। यदि किसी अनिश्चित अनुपात में किन्हीं तत्वों के मेल से कोई द्रव्य निर्मित होता है तो वह यौगिक नही कहलाएगा।
यौगिक दो रूपों में होते हैं-
कार्बनिक- इन्हें वनस्पति व जीव-जन्तु से प्राप्त किया जाता है। जैसे- तेल, वसा, चीनी आदि।
अकार्बनिक- इन्हें वनस्पति व जीव-जन्तु से प्राप्त नही किया जा सकता। जैसे- नमक, सोडियम कार्बोनेट, कैल्शियम कार्बोनेट आदि।

मिश्रण

तत्वों के असमान मिलन से बना द्रव्य मिश्रण कहलाता है।
एक से अधिक तत्वों या यौगिक जब अनिश्चित मात्रा में परस्पर मिलकर रासायनिक क्रिया द्वारा जिस द्रव्य का निर्माण करते हैं, वही मिश्रण होता है। इसकी यही विशेषता है कि इनमें कोई भी बराबर व निश्चित अनुपात नही होता है।

मिश्रण के दो भाग होते हैं-
समांग मिश्रण- इसमें तत्वों के परस्पर मिलने के बाद वे मिश्रित हो जाते हैं तथा उन्हें नही देखा जा सकता। जैसे- पानी में चीनी या नमक का घोल बनाने पर उस मिश्रण में पानी के भीतर नमक या चीनी के कण दिखाई नही देते हैं।

असमांग मिश्रण- इसे विषमांग मिश्रण भी कहते हैं। जब कुछ तत्व आपस में मिलते हैं तो उनको परस्पर मिश्रित रूप में नही देखा जा सकता। उनके कणों को अलग से देखा जा सकता है। जैसे- मृदा में कई प्रकार के पदार्थ पाये जाते हैं, जिन्हें सामान्य रूप से देखना सम्भव है और पानी में कोई चिकना पदार्थ जैसे तेल मिलाने पर वह उसमे मिश्रित नही होता। तेल पानी की सतह पर दिखाई देता है