आज मै बात करुँगी दुनिया के सबसे तेज उड़ने वाले पक्षी या कहें जीती – जागती मिसाइल कहे जाने वाले पेरेग्रीन फाल्कन की |दुनिया के सबसे तेज उड़ने वाले पक्षी का घर भी इसकी तरह ही कमाल का होता है | एलऐ के दक्षिण में स्थित ऊँची चट्टानें ही इनका घरोंदा होती है |

एक जीती- जागती मिसाइल ही नहीं, इनकी नजरें काफी तेज होती है, और ऊंचाई पर बैठकर अपना शिकार एक किलोमीटर दूर से ही खोज लेना सोने में सुहागा होने वाली बात है | इनका आकर लगभग एक कौए के बराबर होता है एवं इनका मुख्य हथियार तो इनका वेग होता है | यह अपने पंखों को अंदर की ओर सिकोड़कर ३०० किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ़्तार से उड़ता है| इसकी तीव्रता इतनी अधिक होती है की यह अपने शिकार को सभलने का मौका भी नहीं देता , कब यह अपने शिकार को दबोच लेता है उसे पता भी नहीं चलता |

इनका वजन लगभग १-३ पौंड के बीच होता है | और इनके पंख की लम्बाई लगभग ३.६ फ़ीट होती है | इतने छोटे होते हुए भी यह अपने से तीन से चार गुना ज्यादा बड़े पक्षियों को हवा में ही झपट्टा मारकर नीचे गिरा देतें है |

पेरेग्रीन फाल्कन

इतने तेजी के साथ उड़ते हुए अच्छी तरह से सारी चीजें देख पाना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात होती है | इस स्थित में इनके पास एक छुपा हुआ औजार होता है, जो चुपके से इनकी आँखों की सुरक्षा कर, अत्यंत तेज गति में भी इनकी नजर को चौकन्ना और साफ रखता है | तो ये कमाल होता है इनकी तीसरी पलकें या एक पतली झिल्ली का जो इनकी आँखों के ऊपर होती है | और एक गुप्त ग्रंथि होती है जो इनके कॉर्निया को तेज गति में सूखने से बचाती है |

परन्तु ये सारी चीजें मायने ही नहीं रखती अगर ये पक्षी इतनी तीव्र गति में साँस लेने में सक्षम न हों | तो आप कहंगे, ये तो हमने सोचा ही नहीं|

चलिए मै बताती हूँ – जिस तीव्रता के साथ पेरेग्रिन उड़ते है उस गति में साँस लेना कइयों के लिए असंभव है | तो इसका राज यह है की इनके नाक की बनावट ही ऐसी होती है | वास्तव में इनके नाक में एक हड्डी पायी जाती है जो हवा की गति को धीमा कर इन्हे साँस लेने में मदद करती है, ऐसी ही व्यवस्था विमान के प्रवेश शंकु में होती है |