तुगलक वंश ने दिल्ली सल्तनत पर काफी समय तक शासन किया एवं इसमें तीन शासक ऐसे हुए जिन्हें आज भी उनकी नीतियों एवं कार्यों के कारण जाना जाता है| तुगलक वंश का शासन काल 1320 से लेकर 1414 तक माना गया है|

खिलजियो के अंत के साथ ही दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश का राज शुरू हुआ एवं इसके अनेक महान शासकों में से तीन प्रमुख शासक थे:-

गयासुद्दीन तुगलक

मुहम्मद बिन तुगलक

फिरोज शाह तुगलक

गयासुद्दीन तुगलक 1320-1325

तुगलक गाजी या गाजी मालिक के नाम से प्रसिद्ध गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना की| गयासुद्दीन का शासनकाल 5 वर्ष तक चला एवं यह पहला ऐसा सुल्तान था जिसने अपने नाम के साथ ‘गाजी’ की उपाधि धारण की जिसका अर्थ होता है काफ़िरो को मारने वाला|

गयासुद्दीन ने कुल 29 वार मंगोल सेना द्वारा किये गये आक्रमण को विफल कर दिया एवं उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने से रोके रखा एवं कैदियों के प्रति सख्त रुख अपनाया| गयासुद्दीन तुगलक के शासनकाल में तुगलकाबाद किले का निर्माण कार्य शुरू हुआ एवं उसने 1323 में अपने बेटे मुहम्मद बिन तुगलक को गद्दी का भार सौंप दिया|

गयासुद्दीन तुगलक द्वारा किये गये सुधार:
गयासुद्दीन ने कई आर्थिक सुधार किये जिसमे उसने ‘रस्म-ए-मियान’ यानी सख्ती एवं नरमी के बीच का संतुलन वाली नीति अपनाई|

उसने उपज में से लिए जाने वाले लगान कर को कम कर दिया एवं जमीदारों को उनके पुराने अधिकार वापस लौटा दिए|

इसने कई नहरों का निर्माण करवाया जो सिंचाई कार्य में काम आती थी एवं नहरे बनवाने का श्रेय सर्वप्रथम गयासुद्दीन तुगलक को दिया जाता है| इसके साथ ही इसने कई बाग़, किले, एवं सड़के भी बनवाई|

गयासुद्दीन के समय में डाक व्यवस्था काफी अच्छे स्तर पर थी एवं उसने अलाउद्दीन द्वारा लागू कठोर नीतियों में नरमी अपनाई|

चूँकि गयासुद्दीन एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था एवं कठोर इस्लाम धर्म में यकीन रखता था अत: वह अपनी जनता से भी ऐसी ही कामना रखता था|

मृत्यु:

1325 में गयासुद्दीन तुगलक बंगाल अभियान से लौट रहा था एवं रास्ते में विश्राम के लिए एक लकड़ी से बने महल में रुका जिसकी नीव काफी कमजोर थी एवं वह ध्वस्त हो गया जिसमे दबने के कारण गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु हो गई|

मुहम्मद बिन तुगलक 1325-1351

गयासुद्दीन की मृत्यु के बाद उसका पुत्र गद्दी पर विराजमान हुआ उसका वास्तविक नाम जूना खान था एवं गद्दी पर बैठने के बाद उसे मुहम्मद बिन तुगलक की उपाधि धारण की| तुगलक वंश के सभी शासकों में मुहम्मद बिन तुगलक सबसे अधिक शिक्षित एवं योग्य शासक के रूप में जाना जाता है|

कई इतिहासकार उसे पागल या सनकी शासक के रूप में देखते है क्योकि इसने कुछ इसे काम किये जो अजीब प्रतीत होते थे| गद्दी पर बैठने के बाद मुहम्मद ने कई व्यक्तियों को अनेक उपाधियों से शोभित किया| जैसे इसने मालिक कबूल को ‘वजीर-ए-मुमालिक’ का पद देकर उसे ‘खान-ए-जहाँ’ की उपाधि से शोभित किया|

मुहम्मद बिन तुगलक ने बिना किसी पक्षपात के सभी योग्य अधिकारीयों को उनकी कार्यक्षमता एवं दक्षता के आधार पर पद सौंपे| जूना खान कई प्रकार की कलाओं में निपुण था एवं उसे चिकित्सा, खगोल शास्त्र, ज्योतिष विज्ञानं, गणित आदि कलाओं एव् विषयों में रूचि थी|

मुहम्मद बिन तुगलक ने नस्ल भेदभाव को पूरी तरह समाप्त कर दिया किन्तु फिर भी उसे इतिहास में वह योग्य स्थान नहीं प्राप्त हो पाया जिसका वह सच्चा हकदार था|

मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियाँ:

दिल्ली सल्तनत का सबसे ज्यादा विस्तार मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में हुआ उस समय दिल्ली साम्राज्य 23 भागों में विभाजित था जिसके अंतर्गत गुजरात, बिहार, लाहौर, कन्नौज, दिल्ली, उड़ीसा, मुल्तान, कश्मीर, जाजनगर, एवं बलूचिस्तान सम्मिलित थे|

कर वृद्धि एवं सांकेतिक मुद्रा चलवाना:

तुगलक ने दोआब क्षेत्रों के करो में वृद्धि कर दी किन्तु प्रक्रति ने उसका साथ नहीं दिया एवं उस वर्ष अकाल की स्थिति पैदा हो गई जिससे दोआब वसूल करने के लिए जनता को विवश किया गया जिससे जनता में क्रोध पैदा होने लगा|

इसके साथ मुहम्मद बिन तुगलक ने दोकानी नामक मुद्रा का प्रचलन करवाया जिसे सांकेतिक मुद्रा भी कहा जाता है एवं इसी कृत्य के लिए तुगलक को सबसे ज्यादा अपमान झेलना पड़ा| उसने ताम्बे एवं पीतल के सिक्के चलवा दिए जिनकी कीमत चांदी के सिक्को के बराबर मानी जानी थी|

इस योजना के बाद लोगों ने घरों में ही नकली टकसाल बनानी आरम्भ करदी एवं जल्द ही उसे रद्द कर दिया गया|

राजधानी परिवर्तन:

इसने दिल्ली से अपनी राजधानी को देवगिरी में परिवर्तित कर दिया जिसका नाम इसने कुतुबबाद रखा एवं इस कार्य के लिए भी इसे काफी आलोचना झेलनी पड़ी|  

मृत्यु:

गुजरात में चल रहे विद्रोह को खत्म करके सिंध की और बढ़ते हुए रास्ते में सुल्तान गंभीर रूप से बीमार होंने के कारण मार्च 1351 को मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हो गई|

फिरोजशाह तुगलक 1351-1388:

फिरोजशाह तुगलक भी तुगलक वंश का अच्छा शासक माना जाता है एवं यह 45 वर्ष की उम्र में दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बना| इसने शरियत के नियमो को राज्य में लागू किया एवं सभी अनावश्यक करों को खत्म कर दिया|

फिरोजशाह तुगलक के महत्वपूर्ण कार्य:

4 करों को छोडकर फिरोजशाह ने 24 करों को खत्म कर दिया| सिंचाई पर सुल्तान ने केवल एक कर लगाया जो उपज का 1/10 भाग वसूलना था|

किसानों को सिंचाई में दिक्कत न ही इसलिए इसने 5 बड़ी नहरों का निर्माण करवाया एवं 1200 उद्यानों का निर्माण करवाया|

नये नगर बनाये गये एवं एक सरकारी अस्पताल का निर्माण करवाया गया जहाँ मुफ्त चिकित्सा प्रदान करवाई जाती थी|

इस समय दास प्रथा का काफी प्रचलन था एवं दासों की संख्या 2 लाख के पास पहुँच गई थी| केवल दासों की देखभाल हेतु ‘दीवान-ए-बन्दगान’ की स्थापना की गई|

गरीब लाचार एवं विधवा महिलाओ के लिए ‘दीवान-ए-खैरात’ नामक समुदाय की स्थापना की गई जो हर तरह से उनकी सहायता करता था|

सम्राट अशोक द्वारा स्थापित शिलालेखों को दिल्ली में लाकर स्थापित किया गया एवं आन्तरिक व्यापार को बढ़ाने हेतु कई योजनाये बनाई गई|

मृत्यु:

सितम्बर 1388 में फिरोजशाह तुगलक की मृत्यु हो गई एवं इसकी मौत के बाद मोहम्मद खान दिल्ली की गद्दी पर बैठा किन्तु वह अधिक समय तक शासन नहीं कर पाया एवं जल्द ही उसकी हत्या कर दी गई|