मेरा सबसे पसंदीदा मौसम गर्मी है, इसका मुझे बेसब्री से इन्तजार रहता है| क्यूंकि गर्मी में छत या आँगन में बैठकर टिमटिमाते तारों को घंटों ताकते रहना मुझे बहुत सुकून देता है | तो क्या आप भी रात में चमकीले टीम- टीम टिमटिमाते हुए तारों को देखना पसंद करतें है? मुझे यकीन है आप में से कुछ तो जरूर पसन्द करतें होंगे | पर क्या कभी आपने ये सोचा है की इतनी दूर चमकते ये तारे टिमटिमाते क्यों है ? क्या ये वास्तविक में ऐसे टिमटिमाते है या सिर्फ हमें ऐसे दिखाई देतें है |

खगोलीय घटनायें  मानव के लिए हमेशा से एक कौतूहल का विषय रही हैं। प्राचीन समय मे इन सब खगोलीय घटनाओं के पीछे हर धर्म और समुदाय की अपनी अपनी मान्यतायें थी जबकि इन सभी खगोलीय घटनाओं के पीछे वैज्ञानिक कारण होते हैं। जिन्हें समय समय पर वैज्ञानिकों द्वारा इनके रहस्य से पर्दा उठाया गया

दरअसल यह प्रकाश के अपवर्तन  के कारण होता है |

रात में तारे हमे टिमटिमाते दिखाई देते है,हमे ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे तारे अनवरत नही बल्कि पल-पल चमकना बंद करते है, जबकि ऐसा नही है।

तारे नरंतर स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित होते है, हमारे वायुमंडल में विभिन्न परते, क्षोभमंडल, समताप मंडल ,मध्य मंडल ,ताप मंडल , वाह्य मंडल मौजूद है,जिनका घनत्व भिन्न-भिन्न हैं।

तारों से आने वाले प्रकाश को हम तक पहुंचने में इन विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है इन परतों की विभिन्न घनत्व होने के कारण तारो से आने वाला प्रकाश अपने सीधे मार्ग में ना आकर अपने सीधे मार्ग से विचलित हो जाता है ,अतः जब तारों का प्रकाश हमारी आँखों पे पड़ता है तो वह हमें दिखाई देतें है और जब अपवर्तन की वजह से इनका प्रकाश हमारी आँखों में नहीं पड़ेगा तो ये हमें दिखाई नहीं देंगे | ये इस लिए होता है जो ये माध्यम होते है उनके घनत्व में बदलाव आता रहता है |जिसके कारण अपवर्तन की घटना होती है और तारे हमे टिमटिमाते हुए दिखाई देते है।

आशा करता हूँ की अब जब आप इस बार तारों को निहारने बैठेंगे तो इन्हे  टिमटिमाते हुए देखेंगे ही नहीं बल्कि इसके पीछे का विज्ञान का भी ज्ञान रखेंगे |