मानव शरीर में स्वर्ण, चाँदी, पीतल, ताँबा आदि सोलह प्रकार की धातुएँ पाई जाती है, जिनका एक स्वस्थ शरीर के  निर्माण में पूर्ण योगदान होता है। चिरकाल से ही ताँबे के गुणों का वर्णन होता आ रहा है; जो कि सत्य भी है, परन्तु यदि किसी वस्तु का प्रयोग आवश्यकता से अधिक कर लिया जाए तो उस के दुष्परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं।

यदि शरीर स्वस्थ हो और शरीर में ताम्र तत्व की कमी न हो, परन्तु फिर भी कोई ताम्रजल का निरन्तर सेवन करता है या ताम्र से बने किसी बर्तन में पके हुए भोजन को ग्रहण करता है तो ऐसा करने से शरीर में ताम्र तत्व की अधिक मात्रा से कई रोग उत्पन्न हो सकते हैं|

लंबे समय तक ताँबे के बर्तन में रखा पानी पीने से अल्जाइमर का ख़तरा उत्पन्न हो सकता है|

ताँबे की अधिकता के कारण दिमाग में मनोभ्रंश (डिमेंशिया) पैदा करने वाले प्रोटीन की मात्रा बढ़ने का ख़तरा हो सकता है|

शरीर में ताँबे की अनावश्यक मात्रा से मस्तिष्क की कोशिकाओं को क्षति पहुँचती है तथा मानसिक क्षमता क्षीण हो सकती है|

ताँबे में पाये जाने वाले तत्वों से गुर्दा, यकृत और ज़िगर सम्बन्धी विकार उत्पन्न होने का भी ख़तरा हो सकता है|

शरीर में ताम्र तत्व की मात्रा बढ़ जाने से यह शरीर से बाहर नहीं आ पाता तथा इस वजह से यह जमा हो जाता है जिससे विल्सन रोग होने का कारण बन सकता है, जो कि अत्यंत जानलेवा सिद्ध हो सकता है|

ताँबे से हृदय सम्बन्धी विकार व तनावग्रस्त होने जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं|

महिलाओं में ताम्र तत्व की असामान्य स्तिथि से प्रसवोत्तर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है|

ताम्र तत्व की अधिकता से हाथों व पैरोँ की उंगलियों में जकड़ी जाने वाली व्याधि यथा ऐंठन, आक्षेप, मिर्गी व मितली आदि होने का खतरा रहता है|

उपापचय की परेशानी, अति रक्तदाब व असमय वृद्धावस्था आदि का कारण भी ताम्र तत्व की अधिकता हो सकती है|