जीवो के शरीर में सूक्ष्म धागे के जैसे छोटी-छोटी तंत्रिकाए जाल के समान फैली रहती है, जिनका प्रमुख कार्य शरीर के विभिन्न अंगो पर नियन्त्रण रखते हुए उनको वातावरण में हुए परिवर्तन या बदलाव के बारे में सूचित करना एवं वातावरण के साथ सामंजस्य बिठाना है, इस पूरे तन्त्र या प्रक्रिया को तंत्रिका तन्त्र कहा जाता है| ये तंत्रिकाए अपना कार्य विद्युत की तेजी से करती है एवं शरीर एवं मस्तिष्क के मध्य समनव्य स्थापित करती है, जिसके अंतर्गत मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु एवं इनसे जुडी हुई महीन तंत्रिकाओ की गणना की जाती है|

तंत्रिका कोशिका

इसे तंत्रिका तन्त्र की महत्वपूर्ण एवं क्रियात्मक ईकाई माना जाता है| इसके साथ अनेक प्रकार की सहायक कोशिकाए मिलकर कई महत्वपूर्ण कार्यो को अंजाम देती है जो तंत्रिका तन्त्र से जुड़े हुए होते है| वातावरण में अचानक हुई घटना या जानकारी प्राप्त करने के लिए तंत्रिका तन्त्र एवं तंत्रिका कोशिका की अहम भूमिका रहती है एवं इसे शरीर की सबसे बड़ी कोशिका कहा जाता है, जिसके ३ भाग होते है, जिन्हें एक्सान, साईंटान एवं डेनड्रोन कहा जाता है|

मनुष्य में तंत्रिका तन्त्र विकसित रूप से पाया जाता है, किन्तु एककोशिकीय जीव जैसे कि अमीबा में तंत्रिका तन्त्र नहीं पाया जाता, बाकी सभी जीवों में तंत्रिका तन्त्र पाया जाता है|

मुख्य रूप से मनुष्य के तंत्रिका तन्त्र को ३ भागों में विभक्त किया गया है:-

केन्द्रीय तंत्रिका तन्त्र

यह तंत्रिका तन्त्र का महत्वपूर्ण भाग है जो सम्पूर्ण शरीर के साथ-साथ तंत्रिका तन्त्र पर भी नियन्त्रण रखता है, यह सभी बहुकोशिकी जीवो की क्रियाओ एवं गतिविधियों पर नियन्त्रण रखता है एवं सभी क्रियाओ का सही ढंग से नियमन करता है| यह तंत्रिका के पृष्ठ भाग में स्थित होता है एवं इसके दो महत्ववपूर्ण भाग या अंग होते है, जिन्हें मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु कहा जाता है|

मस्तिष्क

मनुष्य का मस्तिष्क क्रेनियम नामक खोल से ढका रहता है जो मस्तिष्क की बाहरी आघातों एवं चोटों से रक्षा करता है| मनुष्य के मस्तिष्क का भार १४०० ग्राम के आसपास होता है| मनुष्य का मस्तिष्क एक जटिल सरंचना है जिसे पूरी तरह से समझना मुश्किल है|

मनुष्य के मस्तिष्क के भी कई भाग है, जो इस प्रकार है:-

अग्र मस्तिष्क के अंतर्गत आते है:-

सेरीब्रम: इसे मस्तिष्क का सबसे विकसित भाग माना जाता है, जो कार्य करने के क्षमता, बुद्धिमता, वाणी, ज्ञान आदि का केंद्र कहा जाता है|

इसी प्रकार सेरिब्रल जो मस्तिष्क का मध्य भाग है जो श्रवण शक्ति को प्रभावित करता है एवं सेरिबेलम जो की मस्तिष्क का पश्च भाग है यह शरीर के अंगो का संतुलन बनाये रखने का कार्य करता है| इसमें मेडुला आब्लागेंटा सबसे पार्श्व भाग है, जो धडकन, रक्तदाब आदि पर नियन्त्रण रखता है|

मेरुरज्जु:

यह प्रतिवर्ती कार्यो पर नियन्त्रण रखता है एवं मस्तिष्क में आने-जाने वाले उद्दीपन के मध्य समन्वय स्थापित करता है|

परिधीय तंत्रिका तन्त्र

मनुष्य में 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाए एवं ३१ जोड़ी मेरुरज्जु की तंत्रिकाए उपस्थ्ति होती है| इस तंत्रिका तन्त्र में मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु से जुडी हुई तंत्रिकाए होती है|

स्वाधीन या स्वायत तंत्रिका तन्त्र

यह तंत्रिका तन्त्र कुछ भाग मस्तिष्क एवं कुछ भाग मेरुरज्जु की तंत्रिकाओ का बना होता है| यह शरीर के आन्तरिक अंगो एवं रक्त तंत्रिकाओ की आपूर्ति करता है, इसके २ भाग होते है:-

1# अनुकम्पी तंत्रिका तन्त्र

यह डर, पीड़ा, क्रोध, घबराहट आदि के समय ह्दय गति तेज करना, रोंगटे खड़े करना, आँख की पुतली फैलाना, स्वेद ग्रन्थियो से स्त्राव, लार ग्रन्थियो का कम स्त्राव, रक्त दाब बढ़ाना, रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ाना, रक्त में थक्का बनाने में सहायता करना, लाल रुधिर कणिकाओ की संख्या बढ़ाना, आदि कार्य करता है|

2# परानुकम्पी तंत्रिका तन्त्र

यह लार के स्त्राव में वृद्धि करना, आँख की पुतली का संकुचन करना, अर्थात यह अनुकम्पी के विपरीत कार्य करता है एवं आराम एवं शांति के समय प्रभावी रहता है|