हमारी दुनिया में अभी भी ऐसे रहस्य है, जो आश्चर्य और अचम्भे के दायरे में है| हमसे पहले हमारे धरती पैर कौन थे ? और वो कैसे दिखते थे ? और ये कैसे विलुप्त हो गए? ,ये सारे सवाल आज भी हमारे लिए जिज्ञाषा का विषय बने हुए हैं |

ऐसा ही एक विषय जो इतिहास के पन्नो से निकल कर आज भी हमें लुभाता है| परिचय के लिए  उनका सिर्फ नाम ही काफी है| वह है डायनासोर, देखने में भयानक बड़े बडे जानवरो को भी अपने पंजे में दबा कर उड़ने की कूबत रखने वाले डायनासोर की कल्पना आज भी सिहरन पैदा कर देती है |

करोडो वर्ष पुरानी ये कहानी जब लोगो के सामने आयी तो दुनिया भर में रहस्य , रोमांच और डर की एक चादर फैलती चली गयी| वैज्ञानिको के अनुसार हर वह चीज जो हमें डराती है, हम उनके पीछे चलते चले जाते है, चाहे वो भूतों की दुनिया हो या खूंखार डायनासोरो कि|

इसी कारण डायनासोर्स के बारे में जानने का आकर्षण हमे खींचता है| आज से लगभग ६०० सौ साल पहले इस धरती पर जब मानव का वजूद नहीं था तभी डायनासोर इस दुनिया से विलुप्त हो गए थे| एक तरफ विज्ञान की खोज और दूसरी तरफ कल्पनाओ की उड़ान| डायनासोर शब्द को १८४२ साल में सर रिचर्ड ने गढ़ा था| जिसका मतलब यूनानी भाषा में बड़ी छिपकली होता है |

आज से करीब १६ लाखों -करोडो वर्ष पहले ये दैत्य कर प्राणी पृथ्वी पर राज कर चुके हैं ,वह भी हमारी तरह पृथ्वी पर चलते फिरते रहे होगें| और घमासान द्वन्द करते रहे होगें जो किसी भी विध्वंस से कम नहीं रहा होगा |

अब सवाल ये है की डायनासोर कैसे विलुप्त हुए? तो चलिए अब ये जानने की कोशिश करते है| वैसे तो डायनासोर के खत्म होने के पीछे बहुत बड़े कारण है अक्सर लोग प्रलय कारी ठण्ड को इसके विनाश का कारण मानते है |

दुनिया भर के किए वैज्ञानिक अब तक मानते रहे है की पृथ्वी से डायनासोर की समाप्ति की वजह विशाल ज्वालामुखी था जिसके लावा ने उसकी प्रजाति को पूरी तरह से ख़त्म कर डाला था | कुछ वैज्ञानिक भूख को इसकी वजह मानते है तो कुछ पृथ्वी पर उल्का पिंड गिरने को भी डायनासोर के समाप्ति की खास वजह मानते है लेकिन इसके पीछे अब तक कोइए ठोस तर्क मौजूद नहीं है