जहां आज पूरी धरती पर इंसानों का राज है वहां कभी दुनिया के सबसे बड़े और विचित्र जानवर डायनाशोर का राज होता था | यह १६ करोड़ वर्षों तक धरती के सबसे प्रमुख एवं ताकतवर जानवर थे| तब उनकी २ हजार से ज्यादा प्रजातियां धरती पर अस्तित्व में थी| पृथ्वी आज की तुलना में ज्यादा गर्म थी, जिससे धरती पर ज्यादा घास- फूस नहीं होती थी| ऐसे में शाकाहारी जानवरों को पेट भरने के लिए लकड़ी खाने को मजबूर होना पड़ा| पृथ्वी में जीवन के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण घटना थी |

आईये चलते है आज से २५ करोड़ वर्ष पूर्व जुरासिक काल से लेकर ६ करोड़ वर्ष पूर्व क्रिटिशन काल के डायनसोर के साम्राज्य में – दुनिया के अलग- अलग हिस्सों में से डायनासोर के कई कंकाल मिले है – अंडे, हड्डी पंख इत्यादि | इन अवशेषों पर हुई रिसर्च ने करोडो वर्ष पूर्व के इस रहश्य पर कुछ रौशनी डाली| और डयनसोर की आकृति रचने की कोशिश की | और इन हजारों प्रकार के डायनाशोर में कुछ ख़ास के बारे में हम बात करेंगे –

इनकी कुछ प्रजातियों में से एक ऐसी प्रजाति है जो पक्षियों की तरह उड़ती थी, जिन्हे टेराशोरस कहा जाता था | और उड़ने वाले डायनाशोर की एक नस्ल क्वेजाल कोटलस नॉर्थरोपी, जिसका औसतन वजन १५० केजी और ४० फ़ीट लम्बे पंख थे | ये अब तक के सबसे बड़े उड़ने वाले प्राणी थे |

टरैनाशोरसरैक्स या टीरैक्स, ये शब्द एक ग्रीक शब्द टेरेंट लिज़ार्ट से लिया गया है जबकि रैक्स का लैटिन में राजा होता है तो मिलाकर देखें तो टरैनाशोरसरैक्स का अर्थ होता है छिपकली वंश का राजा | यह आज से ६६ लाख साल पहले क्रिटिशियन काल में हुआ करते थे,ये दो पैरों पर चलते थे | अपने विशाल शिर और लम्बी भारी पूंछ से अपना संतुलन बनाते थें| इनके शिर से पूंछ तक की लम्बाई लगभग ५० फ़ीट की होती है |

डिप्लोडैकस-आप ये जानकार हैरान रह जाएंगे की डायनासोर्स के बारे में सबसे सटीक जानकारी उनके मल के जीवाश्म से जमा की गयी है जिसे क्रोकोलाइट कहतें है| इस प्रजाति के डायनासोर्स अब तक के सबसे बड़े जीव थे| इनकी एक नस्ल जिसे औन्टोसॉरस या ब्रोन्टोसॉरस कहतें है इस धरती के सबसे विशाल जानवर थे|

सैराट्रॉपस ,अकोलोसोरस भी डायनासोर्स की ही प्रजातियां है|

वैसे तो कहतें है ये खत्म हो गयें है, पर इस बात से हम और आप इंकार नहीं कर सकतें है की धरती पर इंसानो के पूर्व एक अनूठे किस्म के जानवर थे जो अपनी मृत्यु के साथ ही अपने राज भी साथ ले गए|