इसका अस्तित्व वास्तविकता से कहीं ज़्यादा काल्पनिक है। क्योंकि विज्ञना की अवधारणा है वो जब तक आँखों से देख न ले और कानों से सुन न ले तब तक किसी बात पर यकीन नहीं करता। इसलिए टाइम मशीन की चर्चा या अस्तित्व फिल्म और किताबों तक ही सिमित है। कई कल्पनाकारों ने अपनी किताब में टाइम मशीन का ज़िक्र किया है, उन्हीं में से एक साहित्यकार है एच जी वेल्स, इन्होने भी अपने उपन्यास “द टाईम मशीन” में इसी चीज़ की कल्पना की है। इस उपन्यास का नायक भी एक ऐसी ही अजीब कुर्सी पर बैठता है, इस कुर्सी पर कुछ जलते बुझते बल्ब लगे होते है, जिसमें कुछ डायल होते है, नायक कुछ बटन दबा कर डायल सेट करता है और चंद पलों में ही भविष्य में पहुँच जाता है। जिस समय में नायक भविष्य में पहुँचता है उस समय इंग्लैण्ड पुर्णतः नष्ट हो चूका है, और वहां पर मार्लाक और एलोई नामक नए प्राणियों का बसेरा हो जाता है। समय मशीन की परिकल्पना विज्ञान फतांसी की एक महान कथा से निकली है मगर इस बात पर वैज्ञानिकों ने कभी यकीन नहीं किया। विज्ञान के अनुसार टाइम मशीन की कल्पना सनकी,रहस्यवादी और धुर्तो के कार्यक्षेत्र की अवधारणा है। हालाँकि उनके लिए यह बात कहने के पीछे एक ठोस कारण भी है। लेकिन मौजूदा दौर में क्वांटम गुरुत्व मे हो रही आश्चर्यजनक प्रगति इस अवधारणा की सदियों पुरानी नींव को हिला रही है।

हालाँकि कई रोढ़े भी है जिसकी वजह से यह संभव होने में परेशानी उत्पन्न कर सकते हैं।

1. दरअसल ऐसा कुछ हुआ तो व्यक्ति बिना माता-पिता के भी पैदा हो सकता है। या ऐसा भी हो सकता है व्यक्ति भूतकाल में जाकर अपने पैदा होने से पहले अपने माता पिता की हत्या कर दे, और अपने पैदा होने के कारण को ही ख़त्म कर दे ? इस तरह मानव अस्तित्व खतरे में आ सकता है।

2. एक परेशानी यह भी है कि ऐसा कुछ होने से व्यक्ति का भूतकाल ही समाप्त हो जाएगा। जैसे मान लिया जाए कि एक युवा अपनी लैब में बैठ कर समय मशीन बनाने की कोशिश करता है तभी अचानक से वहां एक वृद्ध व्यक्ति आ जात है वो इस युवा को समय मशीन बनाने की विधि समझा देता है और अदृश्य हो जाता है। इस समय मशीन की सहायता से वो शेयर मार्केट, घुड़दौड़, खेलों के सट्टे से अरबों रुपये कमाता है। और जब वो बुढा हो जाता है तो भूतकाल में जा कर अपने ही युवा अवस्था को समय मशीन बनाने की विधि दे कर आता है। तो प्रश्न तो वही है कि आखिर यह विधि आई कहाँ से ?

इन्हीं समय विरोधाभास को देखते हुए समय मशीन की सहायता से समय यात्रा कर पाना संभव नहीं हो सकता। न्यूटन के अनुसार समय एक बाण की तरह है जिसे एक बार छोड़ दिया तो उसे पकड़ा नहीं जा सकता वो निरंतर एक सीधी रेखा में चलता रहता है। आइंसटाईन के अनुसार ब्रह्माण्ड में उपस्थित हर घड़ी का समय एक जैसा ही चलता है। अर्थात प्रथ्वी का एक सेकंड मंगल के एक सेकंड के बराबर होता है। अपनी इस अवधारणा से आइंसटाईन ने एक नयी क्रांति को जन्म दिया। आइन्स्टाइन के अनुसार समय एक नदी के प्रवाह की तरह है, और यह समय सितारो एवं आकाशगंगाओ के घुमाव की वजह से बहता है।

आइंस्टाइन ने अपने जीवन में एक और परेशानी का सामना किया दरअसल प्रिन्स्टन के एक पड़ोसी कर्ट गोएडल जो कि आजतक पिछले ५०० वर्षो के सर्वश्रेष्ठ गणितिय एवं तर्क शास्त्री है। इन्होने आईन्स्टाईन के समीकरणों का एक ऐसा हल निकाला जो समय यात्रा को संभव कर रही थी। निसंदेह गोयेडल का हल काफी शानदार था, उन्होंने अपने हल से एक ऐसे ब्रह्माण्ड की कल्पना कि जो एक घूर्णन करते हुए द्रव्य से भरा हुआ है। अगर कोई भी इस द्रव के घूर्णन दिशा मे चलता है तो अंत में प्रारंभिक बिन्दू तक पहुँच जाएगा मगर भूतकाल में।

वैसे आइन्स्टाइन को इस बात से खुश होना था मगर उन्होंने लिखा है कि अपने समीकरणों के हल मे समययात्रा की संभावना ने उन्हें काफी हद तक परेशान कर दिया था। मगर उसके बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि ब्रह्माण्ड अपना विस्तार करता है, घूर्णन नहीं करता। इस कारण गोएडल के हल को माना नही जा सकता। स्वाभाविक है कि यदि ब्रह्मांड घूर्णन करता होता तब समय यात्रा सारे ब्रह्मांड मे संभव होती।

इसी तरह ब्लैक होल के सहारे समय यात्रा करने के संदर्भ में १९६३ मे न्युजीलैंड के एक महान गणितज्ञ राय केर ने घूर्णन करते हुए ब्लैक होल के लिये आइंसटाईन के समीकरणों का हल निकाला। उन्होंने अपने तथ्यों के द्वारा इस बात को प्रमाणिक किया कि अंतरिक्षीय का यह सूराख ना केवल अंतरिक्ष के दो स्थानो को जोड़ते है बल्कि दो समय क्षेत्रो को भी जोड़ता है। उनका मत था कि इसके सहारे समय यात्रा संभव हो सकती है।

हालाँकि समय यात्रा करना इतना भी आसान काम नहीं होगा। अगर सबसे बड़ी कोई परेशानी खड़ी करेगा तो वो है उर्जा ! क्योंकि बिना उर्जा के किसी भी यान का चल पाना संभव नहीं है, जैसे गाड़ियों के लिए पेट्रोल चाहिए वैसे ही समय यान के लिए भी अत्यधिक मात्रा में उर्जा की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए हमें तारों की सम्पूर्ण उर्जा का उपयोग कर पाने की तकनीक सीखनी होगी। इसके लिए हमें ऋणात्मक पदार्थों को भी खोजना पड़ेगा जिन पर गुरुत्वाकर्षण नियम लागू न हो जी कि अभी तक यह खोजा नही गया है। ध्यान दे ऋणात्मक पदार्थ प्रतिपदार्थ (Antimatter) या श्याम पदार्थ(Dark Matter) नही है।

सवाल यह उठता है कि क्या भविष्य में भी इस चीज़ की अभी तक कोई खोज नहीं हुई है, क्योंकि भविष्य में यह खोज हो चुकी होती तो कोई भविष्य यात्री तो हमारे पास आता, मगर अभी तक ऐसी कोई घटना नहीं घटी है तो इसका अर्थ यह है कि हम इतने महत्वपूर्ण नही है। अगर भविष्य में ऐसी कोई तकनीक विकसित भी हो गयी होगी तो यह सभ्यता काफी विकसित होगी, वह किसी भी तारों की सम्पूर्ण ऊर्जा के दोहन में सक्षम हो सके होंगे। अब जो सभ्यता किसी तारे की ऊर्जा पर अपना नियंत्रण कर सकती है उसके सामने हमारा औचित्य क्या होगा ? उनके सामने हम पशु समान है। क्या आप पशुओं को अपना ज्ञान, औषधी या ऊर्जा देते है ? कुछ लोग तो उन्हें कुचल कर आगे भी बढ़ जाते हैं।

मगर इस बात का भी ख्याल रखें की अगर कोई कल आपका दरवाजा खटखटाए और कहे कि वह भविष्य से आया है और आपके पोते के पोते का पोता है तो दरवाजा बंद मत करिये। क्योंकि हो सकता है वो सही हो।