आप सब ने अपने आस-पास दीवालों पर छिपकली को चिपके और चलते हुए देखा होगा। पर क्या आपको पता है की आखिर ये कैसे संभव होता है ? की छिपकली बिना किसी समस्या के कितनी भी चिकनी सतह पर आसानी से चलती रहती है । इस ब्लॉग में मै आपके साथ छिपकली के इस गुण के पीछे का विज्ञान साझा करूँगा ।

शुरुआत में लोगों का मानना था की छिपकली के पंजो में एक अजीब लिसलिसा पदार्थ पाया जाता है जिससे यह आसानी से चिकनी सतह और दीवाल पर चल पाती है, पर समय के साथ यह तथ्य झूठ साबित हुआ।

कुछ समय पश्चात एक नई अवधारणा आयी, वह थी – की छिपकली के पंजो एवं दीवाल के मध्य निर्वात जैसा माध्यम बन जाता है जो इनको चिपके रहने और आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक चलने में मदद करता है पर यह अवधारणा भी गलत प्रमाणित हुई ।उसके बाद जंतु वैज्ञानिकों द्वारा कई शोध किये गए, जिनमे उन्हें कई ऐसी भी जातियां मिली जिनमे पंजों के मध्य कोई निर्वात नहीं बन रहा था मगर वह आसानी से चिकनी सतहों पर चल पा रही थी । तो जंतु वैज्ञानिकों ने पुनः शोध करना शुरू कर दिया, दुनिया में छिपकली की लगभग छह हजार प्रजितयां पायी जातीं है,जिनमे अधिकतम में शोध करने के उपरांत जो निष्कर्ष निकला वह बेहद ही चौंकाने वाला था।

शोधकर्ताओं ने बताया की छिपकली के पंजों में बाल के जैसे अंदाजन दो लाख से अधिक अति छोटे सेल्फ जैसी रचनाएँ पायी जाती है, बात यहीं ख़त्म नहीं होती, ये जो महीन संरचनाएं होती है वह स्वयं २००० से अधिक भागों में विभक्त होतीं है| क्यूंकि यह अत्यंत महीन होती है इसलिए छिपकली कितनी भी चिकनी सतह पर आसानी से चल पातीं है। इस तरह छिपकली किसी भी प्रकार की सतह पर अपनी पकड़ अत्यंत मजबूत बना पाती है और बिना गिरे चल पाती है ।