चार्ल्स बैबेज का जन्म, लन्दन के एक आमिर घराने से सन 1791 में हुआ था ।

उनके माता पिता का नाम बेंजामिन और एलिज़ाबेथ था। उनके पिता लन्दन में बैंकर थे। बेंजामिन के 4 बच्चे थे लेकिन, बचपन में बस चार्ल्स और उनकी बहन मैरी अन्न ही बच पायीं। इकलौता बेटा होने के कारन बेंजामिन ने चार्ल्स को अच्छे अच्छे स्कूलों में भेजा। ऑक्सफ़ोर्ड और कैंब्रिज के ट्रिनिटी collage से उन्होंने सन 1810 में पढाई पूरी की।

16 – 17 साल की उम्र में उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड के एक tutor से कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के लिए तैयारी की।

1810 में उन्होंने कैंब्रिज में दाखिला लिया और 1814 तक वो ग्रेजुएट हो गये। इस दौरान उन्होंने कैंब्रिज में बहुत कुछ किया। वे कैंब्रिज के टॉप क्लास के गणितज्ञ बन चुके थे।

उन्होंने जॉन हेर्चेल और जोर्ज पीकॉक के साथ मिलकर एनालिटिकल सोसाइटी की स्थापना की।

चार्ल्स बैबेज को father ऑफ़ कंप्यूटर के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने Difference Engine और Analytical Engine बनायी, हलाकि ये दोनों इंजन जैसा चार्ल्स बैबेज ने सोचा था वैसा नही बन पाए थे लेकिन उस समय के हिसाब से ये काफी पावरफुल चीज़ थे।

उन्होंने इतिहास का पहला कंप्यूटर बना दिया था।

Difference Engine गुणा और जोड़ करने में सक्षम था, Analytical Engine पहला ऐसा मशीन था जो प्रोग्राम किया जा सके यह सोच कर बनाया गया था, जैसा की आज मॉडर्न डे में हम कंप्यूटर को प्रोग्राम करते हैं।

हलाकि पोलिटिकल और इकनोमिक कारणों से उनका Analytical Engine इंजन कभी पूरा नही हो पाया।

चार्ल्स बचपन से ही तेज तर्रार थे। वे एक मैथमेटिकल और मैकेनिकल जिनिअस थे। कहा जाता है की चार्ल्स स्कूल में अलजेब्रा खुद ही सिख गये थे क्यों की वे अज्लेब्र से बहुत ही मन मोहित थे।

चार्ल्स को गणित में इतना इंटरेस्ट था की जब वे हाई स्कूल गये तब 3 बजे से सुबह 5 बजे तक छुपकर स्कूल जाते थे ताकि वे खुद से कैलकुलस पढ़ पाए।

25 साल की उम्र में वे रॉयल सोसाइटी के मेम्बर बन चुके थे। बाद में उन्हें Lucasian Professor of Mathematics का इनाम भी मिला। यह इनाम इसाक न्यूटन को भी मिला था।

चार्ल्स रिलिजन और भगवान में भी विश्वास करते थे। वे मानते थे की इस दुनिया का सबसे बड़ा प्रोग्रामर भगवान ही हैं।