हमारे समाज में वैज्ञानिक शोध के आने से पहले ग्रहणों ने भय और अंधविश्वासों को प्रेरित किया है। पूर्ण चंद्रग्रहण में चंद्रमा के लाल हो जाने से कई सभ्यतायें सिहर उठती रही हैं। ग्रहण कैसे होता है इस ज्ञान के अभाव में देवताओं और दैवीय शक्तियों को इन अंतरिक्षीय घटनाओं का दोषी ठहराया जाना स्वाभाविक ही है। आधुनिक समय में हम भाग्यशाली हैं के विज्ञान के आधार पर ये परिघटनायें समझायी जा सकती हैं, और हमारे विलक्षण अंतरिक्ष के बारे में हमारी जिज्ञासा और ज्ञान बढ़ते ही जा रहे हैं।

सरल आकाशीय यांत्रिकी के थोड़े से ही ज्ञान से ये आसानी से समझ में आ जाता है की चंद्र ग्रहण आखिर होता कैसे है।

चंद्र ग्रहण तब होते हैं जब पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा के बीच में आकर चन्द्रमा की सतह पर पड़ने वाली सूर्य की रौशनी को अवरुद्ध कर देती है जिससे की चन्द्रमा पर पृथ्वी का छाया पड़ने लगता है । चंद्र ग्रहण के कुल तीन प्रकार हैं – पूर्ण, आंशिक और पीनम्ब्रल।

इनमे भी सबसे नाटकीय पूर्णचंद्र ग्रहण महसूस होता है, जिसमें पृथ्वी की छाया पूरी तरह से चंद्रमा को ढक लेती है, और चन्द्रमा देखते देखते लगभग गायब सा हो जाता है। चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा पर ही हो सकता है। पूर्ण चंद्रग्रहण तब ही हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा पूरी तरह से एक ही रेखा में स्थित हों। इस संरेखण में कोई भी कमी आंशिक चंद्र ग्रहण को जन्म देती है या फिर ऐसे में कभी कभी कोई ग्रहण बनता ही नहीं है।

चूंकि पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा की तुलना में थोड़ी अंडाकार है इसलिए ग्रहण के लिए ज़रूरी पूर्ण संरेखण हर पूर्णिमा पर नहीं होता। पूर्ण चंद्रग्रहण कभी कभी ही दिखाई देता है। आम तौर पर पूरी घटना के लिए दो घंटे का समय तक लग सकता है।

चंद्रग्रहण

चंद्रग्रहण के दौरान पृथ्वी की दो छायाएं चन्द्रमा पर पड़ती हैं: उम्बरा यानि के छाया का बीच वाला सबसे घना काला हिस्सा और पेनम्ब्रा यानि के आंशिक बाहरी छाया। चन्द्रमा दो चरणों में अपनी गति के अनुसार इन दोनों में से गुज़रता है।

पूर्ण ग्रहण ब्रह्मांडीय घटनाओं की एक विचित्र उपलब्धि हैं। जब चंद्रमा लगभग 4.5 अरब साल पहले बना था, तब से यह हमारे ग्रह से लगभग 1.6 इंच या 4 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गति से दूर होता जा रहा है। अभी पृथ्वी की छाया से पूरी तरह से ढक जाने के लिए चन्द्रमा बिलकुल सही दूरी पर है लेकिन अभी से कुछ करोड़ साल में यह स्थिति नहीं रहेगी। शुक्र है कम से कम हम तो इस मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्य को देख सके।