ग्रीन हाउस प्रभाव एक महत्वपूर्ण प्राक्रतिक घटना है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी की सतह को उष्म बनाये रखना एवं सूर्य से आने वाले ताप को अवशोषित करना है। ग्रीन हाउस प्रभाव एक प्राक्रतिक व्यवस्था है, जो पृथ्वी पर जीवन को पनपना सम्भव बनाती है।

ग्रीन हाउस प्रभाव के अंतर्गत कुछ महत्पूर्ण गैसे वातावरण को गर्म बनाये रखने में सहायता करती है जैसे, मीथेन, कार्बन डाई आक्साइड, ओजोन एवं नाइट्रस ऑक्साइड आदि। इन्ही गैसों का, ताप को अवशोषित करने में अहम् योगदान रहता है, एवं इनके बिना पृथ्वी केवल एक ठंडा ग्रह होती, जहाँ पर जीवन का कोई नामों-निशान नहीं मिल पाता।

ग्रीन हाउस प्रभाव की प्रक्रिया एवं महत्ता:

सम्पूर्ण पृथ्वी का ७५% भाग पानी से घिरा हुआ है, इसका मतलब तीन चौथाई भाग पर पानी, और यही पानी ठोस, द्रव एवं वाष्प के रूप में पृथ्वी पर विद्यमान रहता है। ग्रीन हाउस प्रभाव के अंतर्गत पृथ्वी पर तापमान समान्य रहता है और हमे पीने योग्य जल प्राप्त हो पता है।

सूर्य से आने वाली प्रकाश की किरने जब पृथ्वी की सतह तक आती है, तो ग्रीन हाउस की परत उसे ऊष्मा के रूप में परिवर्तित कर देती है, जिसका कुछ भाग पेड़-पौधों, जल एवं मिटटी द्वारा सोख लिया जाता है।

ग्रीन हाउस प्रभाव की वर्तमान स्थिति:

आज के वर्तमान युग में ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रीन हाउस प्रभाव की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़े है। इसके कारण ग्रीन हाउस गैसेस का स्तर जैसे कार्बनडाईआक्साइड, मिथेन आदि की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिससे पृथ्वी पर ऊष्मा का स्तर भी बढ़ रहा है जो की चिंताजनक विषय है।

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