Last updated on फ़रवरी 19th, 2018 at 08:14 अपराह्न

gurutvakarshan

गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force ) किसी भी दो पदार्थ , वस्तु  या कणो की बिच मौजूद एक आकर्षण बल है। गुरुत्वाकर्षण बल न सिर्फ पृथ्वी और वस्तुवो के बीच का आकर्षण बल है बल्कि यह ब्रह्माण्ड में मौजूद हर पदार्थ या वस्तु के बिच विद्यमान है।

हम जब हवा में उछलते है तो उड़ क्यों नहीं जाते ? हम क्यों दुबारा वापस धरती पर आ गिरते है।  ये सब गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है। यह एक ऐसा आकर्षण बल है जो दिखाई नहीं देता लेकिन हर वो वस्तु जिसका द्रव्यमान ( mass)  होता है उसका गुरुत्वाकर्षण भी होता है।

issac newton

सर इस्साक न्यूटन ने सन 1642 -1727 में यह पता लगाया की  गुरुत्वाकर्षण बल हर प्रकार के वस्तुवो में मौजूद है।

अगर किसी वस्तु का द्रव्यमान अधिक है तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होगा।

चुकी पृथ्वी का द्रव्यमान, मनुष्य से ज्यादा है इसलिए पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल भी मनुष्य के गुरुत्वाकर्षण बल से कही ज्यादा है और यही कारन है की जब हम हवा में उछलते है तो वापस पृथ्वी पर आ जाते है क्यों की पृथ्वी हमें वापस अपनी ओर खींच लेती है और हमारा गुरुत्वाकर्षण बल कम होने के कारन हम पृथ्वी को अपनी ओर नहीं खींच पाते। पृथ्वी को अपनी ओर सूर्य खींचता है क्यों की सूर्य का द्रव्यमान पृथ्वी से कही ज्यादा है और यही कारन है की पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है।

सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल हम पर भी पड़ता है लेकिन वह बहोत की कम है इसलिए हम महसूस नहीं कर पाते। हम बस पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल महसूस करते हैं क्यों की हम पृथ्वी के बहोत नज़दीक हैं।

गुरुत्वाकर्षण बल दुरी साथ कमजोर होते जाता है। अगर हम पृथ्वी से काफी दूर चले जाये तो पृथ्वी का  गुरुत्वाकर्षण बल भी हम पर काम करना बंद कर देगा और हम अंतरिक्ष में उड़ने लगेंगे लेकिन चुकी अंतरिक्ष में हवा नहीं है तो हम जिन्दा भी नहीं बच पाएंगे। हवा अगर हो भी जाये फिर भी सूरज का रेडिएशन से हम क्षण भर भी जिन्दा नहीं बच पाएंगे। यही कारन है की ऑस्ट्रोनॉट सूट पहन कर अंतरिक्ष में जाते हैं।

हमारा वजन अलग अलग क्यों होता है ?

मोटे आदमी का द्रव्यमान पतले आदमी से ज्यादा होता है इसलिए उसपर पृथ्वी द्वारा खिचाव बल ज्यादा लगता है इसलिए उसका वजन ज्यादा होता है। जो पतला होता है उसका वजन कम होता है क्यों की उसका द्रव्यमान कम होता है और इससे पृथ्वी का खिचाव बल भी कम लगता है। वजन एक तरह से गुरुत्वाकर्षण बल का दूसरा नाम है।

F = mg (m = द्रव्यमान और g एक समानुपाती नियतांक है, यह F , Weight यानि की वजन भी है )

इस लिए हम इसे F​ = mg = W  भी लिख सकते हैं। 

इसका मतलब यह हुआ की Weight एक बल है जो mg के बराबर हर वस्तु को निचे की ओर खींच रहा है।

एक चींटी का द्रव्यमान मनुष्य की अपेक्षा बहोत कम होता है इसलिए चींटी का वजन भी बहोत कम होता है। पृथ्वी और चींटी के बीच का आकर्षण बल भी कम  होता है यही कारन है की चींटी उचाई से गिरने के बाद भी घायल नहीं होती।

अलग अलग ग्रहो पर अलग अलग वजन

क्या आपको पता है की हमारा वजन अलग अलग ग्रहो पर अलग अलग होता है ? जी हाँ अगर आपका वजन पृथ्वी पर 100 किलो है तो

अलग अलग ग्रह पर अलग अलग भार

गुरुत्वाकर्षण बल ही वो कारन है जिससे हमारी पृत्वी सूर्य का चक्कर लगाती है और मून पृथ्वी का चक्कर लगता है। गुरुत्वाकर्षण बल सिर्फ द्रव्यमान वाले वस्तुवो को ही अपनी ओर नहीं खींचती बल्कि प्रकाश को भी अपनी और खींच लेती है। हम इस खिचाव को अपनी आँखों से देख नहीं पाते लेकिन वैज्ञानिक इसे मशीनो द्वारा देख सकते हैं।

गुरुत्वाकर्षण बल के कारन ही पृथ्वी पर हवा है और जीवन चल रहा है अगर पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण बल ख़तम हो जाये तो हवा भी अंतरिक्ष में लुप्त हो जायेगा और हममे से कोई नहीं बचेगा। हवा पानी सबकुछ लुप्त हो जायेगा।

गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र

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F=Gm1m2 / r2

G एक समानुपाती नियतांक है जिसका मान सभी पदार्थों के लिए एक जैसा रहता है। इसे गुरुत्वीय स्थिरांक (Gravitational Constant) कहते हैं।

G = 6.6726 x 10-11 m3 kg-1 s-2

m1 और  mदो वस्तुवो का द्रव्यमान है

r दोनों वस्तुवो की बीच की दुरी है