दूध हम सभी के रोजाना खाद्य पदार्थ का एक अभिन्न अंग है, दूध के बिना हम चाय नही पी सकते, दही नही बना सकते, मिठाई नही बना सकते, पनीर नही बना सकते।

दूध जानवरों से लेकर इंसानों तक सभी के लिए जरूरी है, दूध पीकर हम भूक मिटा सकते है और यह हमारे शरीर को सभी जरूरी पोसक तत्व भी प्रदान करता है।

दूध में मिक्रोएलेमेंट्स ( जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम ), वसा, प्रोटीन, विटामिन, एंजाइम और बैक्टीरिया मौजूद होते हैं।

दूध में मौजूद बैक्टीरिया हमारे लिए हानिकारक नही है लेकिन ये वही बैक्टीरिया हैं जो दूध को गर्मियों में अधिक समय तक रखने पर खट्टा बना देते हैं।

दूध में अधिकतर lactobacillus ( लाक्टोबसिलुस ) नाम का एक बैक्टीरिया पाया जाता है जिसकी सुरुआत में जनसँख्या कम होती है लेकिन जब दूध को अधिक देर तक बिना गर्म किये छोड दिया जाये तो वे अपनी जनसँख्या को बढ़ा लेते हैं।

lactobacillus ( लाक्टोबसिलुस ) बैक्टीरिया दूध में मौजूद एंजाइम (lac­tose) लाक्टोस को लैक्टिक एसिड (lactic acid) में बदल देते हैं।

दूध में लैक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ने से दूध खट्टा हो जाता है, और बहोत ज्यादा बढ़ने से दूध फट भी सकता है।

दूध को lactobacillus ( लाक्टोबसिलुस ) बैक्टीरिया से अगर हम बचा कर रखे तो दूध को कई दिनों तक रखा जा सकता है।

इसके लिए दूध को तेज आंच पर गर्म करना पड़ेगा ताकि उसमे मौजूद बैक्टीरिया मर जाएँ इसके बाद उस दूध को रेफ्रीजिरेटर (फ्रिज ) में रखना पड़ेगा।

ठण्ड में lactobacillus ( लाक्टोबसिलुस ) उतने ग्रो नही कर पाते जितने की गर्मियों में, इसलिए गर्मियों में दूध अक्सर खट्टा हो जाता है।

दूध को फ्रेश रखने के लिए उसको साफ़ बर्तन में रखना चाहिए जैसे की ग्लास या सेरामिक के बर्तन, या स्टील के बर्तन।

दूध के बर्तन को ठन्डे पानी से धोना चाहिए।

दूध को ढक कर और दुर्गन्ध से दूर रखना चाहिए।

दूध को प्रकाश से भी दूर रखना चाहिए क्यों की प्रकाश दूध में मौजूद विटामिन्स को तोड़ देते हैं।