क्या आपको वो दिन याद है जब आपको कोई चोट लग जाती थी ?  हाँ ! तो उस स्थिति में आप पहली कौन सी चीज देखने की उम्मीद करतें है? आप कहेंगे की जाहिर है – चोट से खून बाहर निकलता है | पर इसमे कमाल की बात क्या है?

तो कमाल की बात यह है की, हम देखतें है की रक्त का रंग लाल होता है | पर आप ने कभी ये सोचा है की रक्त का रंग लाल ही क्यों होता है, कोई और रंग क्यों नहीं ?

अब आप के दिमाग में तुरंत लालरक्त कणिकाओं और हीमोग्लोबिन का ध्यान आएगा पर आपको ये नहीं पता होगा की क्या ये वाकई रक्त के लाल होने का कारण है की नहीं ? | बहुत सारे लोग इन बड़े वैज्ञानिक शब्द का इस्तेमाल करतें है , बल्कि मै कहूंगा की सारे बिंदु सही दिशा में है  मगर ये तो आप भी जानतें होंगे की आधी – अधूरी जानकारी किसी काम की नहीं होती |

तो इस ब्लॉग में मै आपको इसका सच बताना चाहूंगा |

शायद आपको पता हो की रक्त में तीन घटक पाए जातें है – पहला है लाल रक्त कणिकाएं जिसे हम आर बी सी के नाम से जानतें है, दूसरा है सफेद रक्त कणिकाएं जिसे हम डब्लू व्ही सी के नाम से जानतें है और तीसरा प्लेटलेट्स और वो द्रव जो इन सारी चीजों को मिलाकर रखता है वह है प्लाज्मा |रक्त के इस मिश्रण में लाल रक्त कणिकाएं अधिकतम मात्रा में होती है,और इसका अंदाजा इस बात से लगा सकतें है की जो लाल रकत कणिकाओंऔर सफेद रकत कणिकाओं का अनुपात होता है वह बहुत अधिक होता है जो की ६०० आर बी सी में से १ डब्लू बी सी होती है |

तो आप सोचेंगे, क्यूंकी लाल रक्त कणिकाओं की मात्रा अधिक होती है जिनका रंग लाल होता है जिसके कारण रक्त लाल होता है | पर ये तो सिर्फ आधी कहानी थी |

लाल रक्त कणिकाओं के लाल रंग होने के साथ- साथ उनकी एक और विशेषता है की यह रक्त में ऑक्सीजन को शरीर के सभी भागों में परिवहन  भी करतीं है| आर बी सी में एक पिग्मेंट पाया जाता है जिसे हीमोग्लोबिन कहतें है जो आयरन से युक्त होता है , जब आप इसकी रासायनिक संरचना देखेंगे तो पता चलेगा की जो आयरन होता है वह ऑक्सीजन के साथ एक जाल नुमा संरचना बनाता है ये वही ऑक्सीजन होती है जो हम साँस के साथ अंदर खींचतें है और यही मिश्रण ही रक्त को लाल रंग का बनाता है |