मानव शरीर हजारों लाखों छोटी बड़ी नसों से मिलकर निर्मित हुआ है, एवं ये एक जाल की तरह मनुष्य शरीर में उपर से नीचे तक फैली हुई है| आपने कभी ख्याल किया कि शरीर को दर्द का एहसास क्यों होता है, यह कई बार ज्यादा या कम क्यों होता है, या कुछ लोगों को इसका एहसास कभी अधिक या कभी न के बराबर होता है ऐसा क्यों है?

बिजली के जैसे तीव्रता से गति करती हुई मानव शरीर की ये लाखों नसे शरीर में हुई किसी भी हलचल या खराबी का संदेश दिमाग तक पहुचाती है जिससे उसे दर्द का पता लग जाता है|

क्या है कारण दर्द होने का?

यह तो जाहिर सी बात है कि शरीर में कही भी दर्द है तो इसका कोई न कोई जाना अनजाना कारण अवश्य होगा| रक्त संचरण अनियमित होना, तनाव, चोट, किसी प्रकार का संक्रमण, सूजन, कोई बीमारी, जलन आदि दर्द के कारण हो सकते है|

इसके साथ यदि भावनात्मक स्तर पर देखे तो गुस्सा, चिडचिडापन, अवसाद आदि के कारण भी शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है|

दर्द के बढने पर इसके लक्ष्ण बाहर स्पष्ट होने लगते है, जैसे की उलटी आना, बेहोश होना, रक्तदाब बढना, कमजोरी आना आदि|

दर्द को कम करने हेतु कई तरह की दर्द निवारक दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है| एक्यूप्रेशर एवं सुजोक पद्दति भी दर्द को कम करने का कार्य करती है एवं रक्त संचार को ठीक किया जाता है|

कैसे होता है दर्द का एहसास:

शरीर में मौजूद किसी नस के क्षतिग्रस्त होने, रक्त संचार में बाधा आने, या नस के फटने पर दर्द का एहसास होता है| नसों को नुकसान पहुचने पर उत्तकों को भी हानि पहुचती है जिससे काफी दर्द का एहसास होता है|

दर्द की तीव्रता का एहसास अलग-2 व्यक्तिओं में अलग होता है, कई लोग बिलकुल भी दर्द बर्दाश्त नहीं कर पाते जबकि कुछ में दर्द सहने की क्षमता काफी अच्छी होती है|

दर्द के प्रकार Types of Pain:

प्रमुख रूप से दर्द को दो भागों में बांटा गया है:-

स्थायी दर्द:

लम्बे समय तक रहने वाला यह दर्द किसी जटिल बीमारी या संक्रमन के कारण होता है| इसे ठीक होने में काफी समय लगता है एवं दर्द निवारक दवाई का सेवन भी लम्बे समय तक करना पड़ता है| इसे क्रोनिक पेन भी कहा जाता है|

अस्थायी दर्द:

यह दर्द कुछ समय के लिए शरीर को प्रभावित करता है जैसे हड्डी टूटने, चोट लगने या नस आदि फटने पर किन्तु दवाई के द्वारा कुछ समय बाद यह ठीक हो जाता है, इसे एक्यूट पेन भी कहा जाता है|

विभिन्न प्रकार के दर्द:

न्यूरोपैथिक पेन:

किसी कारणवश जैसे की डायबिटीज, HIV, या स्ट्रोक जैसी स्थिति पैदा होने पर सीधा नुकसान तंत्रिका तन्त्र को होता है जिससे ये नष्ट होने लगती है एवं दर्द पैदा होता है| कीमोथेरेपी, जिसका प्रयोग कैंसर के इलाज के लिया किया जाता है इससे भी तंत्रिकाओं को नुकसान होता है| तंत्रिकाओ को नुकसान होने का सीधा असर केन्द्रीय तंत्रिका तन्त्र तक पहुचता है|

सायिकोजेनिक पेन:

तंत्रिकाओ या नसों के क्षतिग्रस्त होने से शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द होता है किन्तु कुछ मरीजों में डर या अवसाद के कारण दर्द का प्रभाव और बढ़ जाता है जिससे मरीज तनाव में रहने लगता है, वह सो नहीं पाता न ही अच्छे से भोजन कर पाता है, इस प्रकार की स्थिति को मानसिक इलाज द्वारा ठीक किया जाता है|

रेफार्ड पेन:

इस प्रकार के दर्द में दर्द का एहसास उसकी ठीक जगह पर न होकर कही और होने लगता है, जैसे कई बार हार्ट अटैक के समय छाती में दर्द न होकर बाजू एवं कंधे में होने लगता है, इसलिए इसे रेफेलेक्टिव पेन भी कहा जाता है|

टेल बोन पेन:

मेरुदंड के निचले हिस्से में यह दर्द होता है, कई बार एक स्थान पर अधिक समय तक बैठे रहने या यह जन्मजात विकृति भी इसका कारण हो सकता है| इसके इलाज के लिए केवल दवाई कारगर नहीं इसलिए मसाज, थेरपी, या छोटी सर्जरी के द्वारा इसे ठीक किया जा सकता है|

साइकोसोमेटिक पेन:

ऐसे बहुत से लोगों में देखा गया है कि शारीरिक जांच में उनके शरीर में किसी भी प्रकार का कोई रोग अथवा दर्द का कारण सामने नहीं आया किन्तु फिर भी वे लगातार दर्द की शिकायत करते है, तो इसे साइकोसोमेटिक पेन कहा जाता है जो केवल आपके दिमाग में होता है|

सिरदर्द:

दर्दों में सबसे साधारण माने जाना वाला सिरदर्द है एवं महिलाओं में इसकी समस्या पुरुषों के मुकाबले अधिक होती है| तनाव, शोर, गैस बनना, ब्रेन ट्यूमर, कब्ज, गलत खानपान, देर तक जागना, शराब आदि इसके मुख्य कारण होते है| माइग्रेन इसका सबसे भयंकर एवं तेज दर्द है एवं करीब 10% लोग माइग्रेन से पीड़ित होते है|

जोड़ो का दर्द:

बुजुर्गो में यह समस्या अधिक होती है क्योकि उम्र बढने के साथ जोड़ो को लचीला बनाये रखने वाला लुब्रिकेंट कम होने लगता है या खत्म हो जाता है जिससे जोड़ो में दर्द रहने लगता है| इसके साथ किसी बीमारी या चोट के कारण भी जोड़ो में दर्द हो सकता है|

जोड़ो की समस्या से निजात पाने के लिए कसरत करना, कैल्शियम युक्त पदार्थ खाना जैसे , पनीर, आदि एवं अधिक समय तक खड़े या बैठे रहने को इग्नोर करना चाहिए|

कमर दर्द:

रीड की हड्डी शरीर को सहारा देने का सबसे मुख्य अंग है जो कि 32 वर्तिब्रे से मिलकर बना होता है जिसमे से 22 कार्यशील होती है| इसके साथ ही यह डिस्क, मांसपेशियों, लिंगामेंट्स, जोड़ आदि सबसे मिलकर बने होते है| इन सब में से किसी में भी कोई खराबी आने पर कमर में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है|

कई बार कमर दर्द अस्थायी होता है जो ठीक हो जाता है किन्तु कई बार यह आसानी से ठीक नहीं होता एवं रीड की हड्डी की सर्जरी करवाने जैसी नोबत आ जाती है|

विटामिन D की कमी, कैल्शियम की कमी, गलत खानपान, वजन उठाना, चोट, एक्सीडेंट, अधिक समय तक खड़े रहना, आदि कारण कमर दर्द के लिए जिम्मेवार है| इसलिए सुबह की धूप अवश्य ले, कसरत करे, एवं संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए|

निष्कर्ष:

ऐसा कोई भी मनुष्य नहीं होगा जिसने कभी दर्द का एहसास न किया हो अत: अपने जीवन स्तर में सुधार करना चाहिए| उम्मीद है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी, अपने विचार हमसे जरुर शेयर करे|