इन दिनों सड़कों पर आपने बिना आवाज के सरपट दौड़ते खुले रिक्शों को देखा होगा, यही रिक्शा ‘ई रिक्शा’ कहलाते है। वजन में काफी हल्के और बैटरी से चलने वाले ये ई रिक्शा आम लोगों की पंसद बन चुके हैं। लेकिन आखिर ई रिक्शा क्या है? और इसे बाजार में उतारने का कारण क्या है? हम हमारे इस लेख के माध्यम से आपको इस विषय में जानकारी देंगे।

सबसे पहले तो आपको बता दे कि ई रिक्शा बैटरी चलित लास्ट माइल कनेक्टिविटी देने वाला वाहन हैं। जो 25 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलता हैं तथा इसके अन्दर लगी बैटरी 2000 वाट की होती है। इतना ही नहीं चार सवारियों के साथ 40 किलोग्राम वजन का अतिरिक्त सामान उठाने वाले ई रिक्शा पूरी तरह से ईको फ्रेंडली हैं। बैटरी को छोड़कर इसमें मौजूद सम्पूर्ण पार्ट्स पूरी तरह रीसाइकिल किये जा सकते हैं। बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम और पर्यावरण प्रदुषण को ध्यान में रखते हुए ई रिक्शा लास्ट माइल कनेक्टिविटी का एक बेहतरीन विकल्प हैं।

यह तो हो गई ई रिक्शा के विषय में जानकारी, लेकिन क्या आप जानते है कि इसे बाजार में कब और क्यों उतारा गया? दरअसल पर्यावरण को बचाने के सन्देश से साल 2010 में दिल्ली में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेल के दौरान पहली बार ई रिक्शा बाजार में आये। बैटरी से चलने के साथ चारों तरफ से खुले होने के कारण ये विदेशीं पर्यटकों को आकर्षित करने में सफल रहे। इसके बाद साल 2013 में ई रिक्शा ने बाजार में अपनी पकड़ को मजबूत किया। आम लोग इनका उपयोग यातायात के अन्य साधनों के विकल्प के रूप में करने लगे।

वातावरण के अनुकूल होने के चलते और पेट्रोल-डीजल की तुलना में सस्ते होने के कारण ई रिक्शा आम लोगों के बीच काफी ज्यादा प्रचलित हो चले हैं। अगर ई रिक्शा से जुड़े फायदों को देखा जाए तो इसका सबसे बड़ा फायदा, इसका ईको फ्रेंडली होना हैं। ई रिक्शा को खरीदने के लिए सरकार द्वारा विशेष प्रकार की सब्सिडी भी मिलती है, जो चालाक को आकर्षित करती हैं। इतना ही नहीं इनसे यात्रा करने वाले लोगों को यह यातायात के अन्य साधनों की तुलना में काफी सस्ते भी पड़ते हैं। अगर ई रिक्शा की संख्या की बात की जाए तो पूरे भारत में लगभग 10 लाख से भी ज्यादा ई रिक्शा चल रहे हैं। जिन राज्यों में इन्होने अपनी पकड़ काफी मजबूत की है उनमे दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार मुख्य रूप से शामिल हैं। धीरे-धीरे ई रिक्शा सम्पूर्ण देश में यातयात के मुख्य साधन के रूप में अपनी जगह बनाता जा रहा हैं।