ब्रह्मांड में सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाली यह हाइड्रोजन ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर जल का निर्माण करती है| हाइड्रोजन को एक उच्च श्रेणी का अपचायक माना जाता है एवं ऑक्सीजन एवं वायु की उपस्थ्ति में यह ज्वलनशील होता है|

हाइड्रोजन की खोज का श्रेय ‘हेनरी क्वेंडीस’ को दिया जाता है, जिन्होंने 1766 ई में इसकी खोज की| वैसे तो हाइड्रोजन को अनेक रूपों में इस्तेमाल किया जाता है, जैसे वनस्पति तेल बनाने, उर्वरक बनाने, ईंधन आदि क्योकि इसके जलने का ताप काफी ज्यादा होता है एवं विभिन्न तत्वों के साथ मिलकर यह अलग-अलग प्रक्रियाए करता है|

हाल ही में हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में शोध एवं अनुसन्धान किये जा रहे है| हाइड्रोजन गैस को ईंधन के रूप में यूज़ करना कारगर साबित हो सकता है एवं भारत के कुछ क्षेत्रों में हाइड्रोजन ऊर्जा के संयत्र स्थापित भी किये गये है|

हाइड्रोजन ईंधन के प्रयोग का उद्देश्य:

हाइड्रोजन को अनेक विधियों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है किन्तु इसे प्राप्त करने की सबसे सरल एवं सस्ती तकनीक ‘जल गैस’ विधि है|

हाइड्रोजन ईंधन का प्रयोग दुपहिया वाहन, तीनपहिया वाहन, विभिन्न औद्योगिक संयंत्रो एवं ऊर्जा निर्माण हेतु किया जाने के बारे में विचार किया जा रहा है एवं ऐसा अनुमान है कि कुछ ही समय में भारत में हाइड्रोजन इंधन से चलने वाले वाहनों का आवागमन होगा|

भारत में अनेक उच्च संघठनो में हाइड्रोजन निर्माण के लिए कार्यशालाए स्थापित की गई है जिससे हाइड्रोजन का भंडारण सर्वश्रेष्ठ रूप से कैसे किया जाए इस बारे में प्रयोग किये जाते है| हाइड्रोजन ईंधन का उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए करना एवं जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभी इसपर और भी प्रयोग होना अभी बाकी है एवं ऐसा अनुमान है कि कुछ ही वर्षो में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे|