क्रिप्स मिशन के नाम से प्रचलित यही प्रावधान द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की सहायता प्राप्त करने के लिया प्रधानमंत्री चर्चिल द्वारा 1942 ई. में स्टेफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा गया जो कि उस समय इंग्लैंड में मजदूर नेता थे इसी को ‘क्रिप्स मिशन’ कहा जाता है|

हालंकि यह मिशन पूरी तरह से असफल रहा एवं भारत के प्रत्येक वर्ग ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योकि यह भारत की अखंडता एवं एकता के विरुद्ध एक साजिश जैसा प्रतीत हो रहा था|

क्या कारण थे क्रिप्स मिशन को भारत भेजने के?

क्रिप्स मिशन जब भारत में लाया गया उसका मुख्य कारण यही था कि उस समय WW2 वर्ल्ड वॉर द्वितीय चल रहा था जिसमे ब्रिटेन को अधिक से अधिक सहायता की आवश्यकता थी|

ब्रिटेन की साउथ ईस्ट एशिया में बुरी तरह हार हुई अत: ब्रिटेन ने भारत को कुछ विशेष प्रावधानों के साथ एक मिशन तैयार किया जिससे भारत का भी फायदा हो और ब्रिटिश सरकार का भी| इसी कारण उन्होंने अपने लेबर लीडर क्रिप्स को भारत भेजा|

भारत ने द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन का समर्थन किया इस उम्मीद से कि शायद अब उन्हें ब्रिटिश सत्ता से मुक्ति मिल जाएगी किन्तु क्रिप्स मिशन में कुछ ऐसे प्रावधान थे जिसे भारत में स्वीकार नहीं किया गया एवं हर किसी ने इसे ठुकरा दिया|

क्या थे क्रिप्स मिशन के मुख्य प्रावधान?

भारत की जनता को अपने संविधान का निर्माण करने की स्वतन्त्रता दी जाएगी|

लोकतंत्र के साथ यहाँ पर भारतीय संघ स्थापित किया जायेगा जो इंटरनेशनल संस्थाओ, संयुक्त राष्ट्रीय संघ, एवं अन्य देशो के साथ स्वतंत्र रूप से सम्बन्ध स्थापित कर सकता है|

शासन की बागडोर अब भारतीयों के हाथ में दी जाएगी एवं पृथक तौर से राष्ट्रमंडल का निर्माण करने का हक भारत के पास होगा|

संविधान निर्माण के लिए अब अलग से योजना निर्माण किया जायेगा एवं भारत का प्रत्येक प्रान्त अब अपना संविधान निर्माण कर सकेगा|

क्रिप्स मिशन की असफलता के कारण:

भारत को खुश करने के लिए क्रिप्स मिशन ने काफी प्रयास किया किन्तु इसमें कुछ प्रावधान ऐसे थे जिनका देश के हर वर्ग ने विरोध किया| महात्मा गाँधी एवं नेहरु ने भी इसे अस्वीकार कर दिया क्योकि यह भारत के हित में नहीं था|

कांग्रेस द्वारा क्रिप्स मिशन का विरोध:

क्रिप्स मिशन भारत को पूर्णत: आजाद न करके केवल डोमिनिकन राज्य बनाना चाहता था जो कि कांग्रेस ने नहीं माना|

देश के प्रान्तों के मुख्य अधिकारियो एवं नेताओं को निर्वाचन द्वारा न चुनकर अपनी इच्छा से चुनना न्यायपूर्ण नहीं लगा|

क्रिप्स मिशन का सुझाव था कि भारत के सभी राज्य अपना अलग से संविधान बनाने हेतु आजाद है किन्तु यदि गहराई से देखा जाए तो इससे राज्यों के संघ से अलग होने के अवसर ज्यादा है क्योकि प्रत्येक राज्य अलग नियम बनाएगा एवं अखंड भारत धीरे-धीरे टुकडो में विभक्त होता जायेगा| इसी कारण यह प्रावधान उचित प्रतीत नहीं हुआ|

इस मिशन में कही भी स्पष्ट रूप से नहीं लिखा था कि भारत को पूर्ण रूप से स्वतंत्र करके सारी बागडोर भारतीयों के हाथ में देदी जाएगी अत: संदेह होना प्राक्रतिक था|

मिशन में यह स्पष्ट था कि इसके लागू होने के बाद गवर्नर जेनरल ही सर्वोच्च होगा|

मुस्लिम लीग एवं अन्य दलों द्वारा विरोध:

मुस्लिम लीग ने भारतीय संघ के प्रावधान को नकार दिया एवं अलग से पाकिस्तान की व्यवस्था का समर्थन भी नहीं किया|

हिन्दू महासभा ने भी भारत की एकता के विभाजन के डर से इसे अस्वीकार किया|

सिख समुदाय ने भी इस मिशन को समर्थन नहीं दिया क्योकि उन्हें भय था कि पंजाब उनसे छीना जा सकता है| ब्रिटिश सरकार इस मिशन के दौरान अपनी कही बातों से मुकरती नजर आई जिससे राजनीतिज्ञ संतुष्ट नहीं थे एवं उन्हें यह भारत को खंड-खंड करने की चाल लगी इसलिए किसी ने भी इसे नहीं माना|