कोशिका के मुख्य भाग इस प्रकार है:-

कोशिका भित्ति

केवल पादप कोशिका में पाया जाने वाली कोशिका भित्ति सेल्युलोज से निर्मित होती है, जो कोशिका की बनावट एवं एक निश्चित आकार प्रदान करने में सहायता करती है|

कोशिका झिल्ली

कोशिका झिल्ली का स्वरूप अर्धपारगम्य होता है, जिसके अंतर्गत यह कोशिका के भीतर प्रवेश करने वाले पदार्थो एवं भीतर से बाहर आने वाले पदार्थो का निर्धारण करती है| मुख्य रूप से यह झिल्ली काफी पतली होती है, एवं कोशिका के सभी घटक इस से आच्छादित रहते है| इसीलिए इसे कोशिका झिल्ली कहा जाता है|

अंत: प्रद्व्य जालिका

अंत: प्रद्व्य जालिका एक छोर से कोशिका कला एवं दूसरे छोर से केन्द्रक झिल्ली से जुडी होती है| इसके किनारों पर राइबोसोम नामक पदार्थ के परत चढ़ी रहती है, जो छोटी-छोटी कणिकाओ के रूप में उपस्थित रहता है| इस जालिका का प्रमुख कार्य केन्द्रक झिल्ली एवं कोशिका झिल्ली का निर्माण करने वाले प्रोटीन एवं वसा का संचार करना है, जिससे सब कार्य अच्छे से सम्पन्न हो सके|

तारक का्य

समसूत्री विभाजन के अंतर्गत ध्रुव का निर्माण करने वाला यह पदार्थ अधिकांशत: जन्तु कोशिकाओ में मिलता है या पाया जाता है| तारकका्य के अंदर सेंट्रीयोल नामक छोटे कणों जैसे सरंचना होती है, जिसके खोज सर्वप्रथम बोबेरी ने की थी|

माईटोकांडरिया

कोशिका की श्वसन प्रणाली कहा जाने वाला यह अवयव कोशिका का शक्ति केंद्र भी कहा जाता है, जिसका कोशिका के निर्माण एवं विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है| इसकी संख्या का अंदाजा कोशिका में निश्चित नहीं होता किन्तु इससे कार्बनिक पदार्थो का आक्सीकरण होता है, जिससे कोशिका को अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा की प्राप्ति होती है| सर्वप्रथम इसकी खोज १८८६ ई. में ऑल्टमैन ने की थी, बाद में बेंदा ने इसका नामकरण माईटोकांडरिया के रूप में किया|

राइबोसोम

राइबोसोम, RNA या राइबोन्यूक्लिक एसिड कहे जाने वाले प्रोटीन एवं अम्ल का बना होता है, यह प्रोटीन उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है इसी कारण इसे फैक्ट्री ऑफ़ प्रोटीन भी कहा जाता है| सर्वप्रथम पेलैद ने जन्तु कोशिका के अंदर राइबोसोम की खोज १९५५ ई. में की, एवं राबिन्सन एवं ब्राउन ने पादप कोशिका की खोज की| बाद में रोबर्ट ने १९५८ में इसे राइबोसोम नाम दिया|

गाल्जीका्य

गाल्जीका्य अति सूक्ष्म नलियों के समूह एवं थेलियों से निर्मित होता है, जिसकी खोज इटली के वैज्ञानिक कैमिलो गाल्जी द्वारा की गई थी| गाल्जीका्य कोशिका द्वारा संचारित प्रोटीन एव् सम्बन्धित पदार्थो की पैकिंग पुटिकाओ के रूप में करके, उन्हें उनके स्थान पर भेज देता है| किसी पदार्थ के कोशिका से स्त्रावित होने पर यह पुटिकाए उसे कोशिका झिल्ली से निष्कासित कर देती है, इस प्रकार गाल्जीका्य एक अच्छे यातायात प्रबन्धन का कार्य करता है, एवं लाइसोसोम एवं कोशिका भित्ति के निर्माण के लिए भी यह जिम्मेवार माना जाता है|

लवक

यह पादप कोशिका में पाया जाने वाला महत्वपूर्ण घटक है, इसके प्रकार के नाम है:

हरित लवक:

इसके अंदर पर्णहरित कहा जाने वाला पदार्थ पाया जाता है, जिसके कारण ये हरे रंग का प्रतीत होता है| हरित लवक के कारण प्रत्येक पौधा, प्रकाश संश्लेषण के क्रिया द्वारा अपना भोजन बनाने में समर्थ हो पाता है|

अवर्णी लवक:

ये लवक भूमिगत जडो एवं तनो से भोजन बनाने में सहायता करते है, क्योकि ये प्रकाश से वंचित लवक होते है| ये रंगहीन होते है|

वर्णी लवक:

ये रंगीन लवक पौधे के पुष्प, बीज आदि में पाए जाते है|

लाइसोसोम

यह थैली जैसे सरंचना होती है, जिसमे २४ तरह के एन्ज्याम्स होते है| इसका काम भक्षण एवं उनको पचाना है|

रसघानी

तरल पदार्थ से युक्त यह निर्जीव सरंचना, पादप एवं जन्तु दोनों कोशिकाओ में पाई जाती है|

केन्द्रक

कोशिका का महत्वपूर्ण अंग कहा जाने वाला यह घटक धागेनुमा जाल के रूप में दिखाई पड़ता है, जो DNA एवं प्रोटीन से निर्मित होता है, एवं जिसे क्रोमेटिन कहा जाता है|