आज मै बात करूंगी एक ऐसे पदार्थ की जो होता तो मोम जैसा है परन्तु इसका निर्माण हमारे शरीर के भीतर होता है | जी हाँ आप सही पढ़ रहें है, आपके और हम सबके शरीर के अंदर इस पदार्थ का निर्माण होता है, जिसे कोलेस्ट्रॉल कहतें है |

कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के सही तरीके से काम करने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है| यह हमारे शरीर की कोशिका झिल्ली में पर्याप्त रूप से तरलता बनाये रखने में अहम योगदान देता है | मनुष्यों में यह शरीर के लगभग हर भाग से लेकर कोशिका झिल्ली में भी उपस्थित होता है | यह बॉडी में उपस्थित चर्बी को पचाने में इस्तेमाल किया जाता है, साथ ही हमारे शरीर में उपयोगी हार्मोन और भोजन पचाने के लिए पाचक रस और हड्डियों को ताकतवर बनाये रखने के लिए विटामिन डी का निर्माण करता है |

पूरे शरीर का लगभग एक चौथाई कोलेस्ट्रॉल का निर्माण लीवर के द्वारा किया जाता है | और इनका सबसे बेहतर स्रोत ज्यादा वसा वाले भोजन जैसे मांसाहारी भोजन, दूध, घी इत्यादि होतें है |

परन्तु ज्यादा शाकाहारी भोजन जैसे – फल-फूल, हरी पत्तेदार सब्जियां इत्यादि में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है | वैसे तो हमारे शरीर के लिए सारे उपयोगी तत्व हमारे खून द्वारा अवशोषित करके, और खून में घुलकर शरीर के बाकि हिस्सों में पहुंचा दिए जातें है | परन्तु कोलेस्ट्रॉल खून में नहीं घुलता है | और कहा गया है की कोई भी चीज तब तक उपयोगी है जब तक सीमा में होती है | क्यूंकि यह खून में नहीं घुलता इसी वजह से जब यदि शरीर में इसकी मात्रा बाद जाती है तो यह कई भयानक, दिल से जुडी हार्टअटैक जैसी बीमारी की वजह बन जाता है | उच्छ्रक्तचाप आदि की समस्या कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के कारण भी होती है|

कोलेस्ट्रॉल कुल तीन रूपों में विभाजित होता है –

पहला- यल डी यल – इसका घनत्व काफी कम होता है, जिसके कारण इसे खराब गुणवत्ता का कोलेस्ट्रॉल माना जाता है तथा इसका निर्माण पूर्ण रूप से लीवर में होता है, एवं यहाँ से यह शरीर के दूसरे आंतरिक भागों में कोलेस्ट्रॉल भेजता है | और अगर बहुत ही ज्यादा मात्रा में कोलेस्ट्रॉल एकत्रित जो जाता है तो यह धमनियों की दीवारों में जमाने लगता है और बड़ी बीमारी को जन्म देता है |

दूसरा – एच डी यल- – हमारे शरीर के लिए उपयोगी माना जाता है | क्यूंकि यह पित्त और कोलेस्ट्रॉल को हमारे शरीर में रीसाइकिलिंग कर के हमारे लीवर तक पहुँचता है

तीसरा – व्ही डी यल- यह सबसे गंदा होता है, इससे बहुत बड़ी – बड़ी बीमारियों का कारण बन सकतीं है |