क्या है कार्बोहाइड्रेट?

कार्बोहाइड्रेट् शरीर के लिए एक आवश्यक तत्व है, जिससे हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है एवं यह हमे रोजमर्रा के भोजन से प्राप्त हो जाता है|

चावल, गेहूं, बीन्स, आलू, एवं अन्य चीजों में भी इसकी प्रचुर मात्रा पाई जाती है| शारीरिक विकास के लिए भी कार्बोहाइड्रेट का महत्वपूर्ण योगदान रहता है, किन्तु इसकी अधिक मात्रा से शरीर को नुकसान भी हो सकता है|

एक स्वस्थ व्यक्ति को एक दिन में 225 से 335 ग्राम तक कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है, जिससे शरीर को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए ऊर्जा मिल जाती है, किन्तु इससे अधिक मात्रा लेने पर कई बार वजन बढ़ने की सम्भावना रहती है, इसलिए जो लोग फिट रहना पसंद करते है, उन्हें अपने भोजन में से कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को घटाने के लिए कहा जाता है|

कार्बोहाइड्रेट के प्रकार:

कार्बोहाइड्रेट के कई प्रकार होते है, जिसमे से कुछ स्वास्थ्य के लिए अच्छे एवं कुछ नुकसानदायक होते है, जो इस प्रकार है:-

चीनी:

चीनी या शुगर अनेक उत्पादों में प्राक्रतिक रूप से विद्यमान होती है, जैसे दूध, सब्जिया, लगभग सभी प्रकार के फल आदि| इन पदार्थों में शुगर तीन प्रकार से मौजूद रहती है, लेक्टोज, फ्रुक्टोज, एवं सुक्रोज| शुगर हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है एवं यह शरीर के लिए अनिवार्य भी है|

स्टार्च:

इसको भी शुगर का ही एक प्रकार माना जाता है, जो की आलू, फलियाँ, मटर, चावल आदि में पाया जाता है तथा मोटापे के लिए सबसे ज्यादा इसे ही जिम्मेवार माना जाता है|

फाइबर:

यह भी मुख्य रूप से शुगर का हिस्सा है, यह सोया, सेम, फाइबर युक्त सब्जियां, एवं फलो व् साबुत अनाज में पाया जाता है| फाइबर युक्त भोजन आसानी से पच जाता है एवं इससे पाचन प्रणाली भी ठीक रहती है एवं पेट सम्बन्धी समस्याए नहीं होती|

कार्बोहाइड्रेट के लाभ:

जैसा की पहले भी कहा जा गया है, की कार्बोहाइड्रेट शरीर को उर्जावान बनाये रखने के लिए आवश्यक है, इससे शरीर रोजमर्रा के कार्य करने में समर्थ रहता है एवं थकावट महसूस नहीं होती| हालांकि अधिक सेवन से मोटापा आ सकता है, किन्तु यदि इसके बिलकुल भी न लिया जाये तो शरीर में कमजोरी आना स्वाभाविक है|

यह पाचन शक्ति को भी मजबूत करता है, एवं भोजन आसानी से पच जाता है| इससे आप चुस्त महसूस करते है एवं विभिन्न प्रकार के रोगों से रक्षा करता है| यदि पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन किया जाये तो इसके नुकसान से बचा जा सकता है|

कार्बोहाइड्रेट के नुकसान:

प्रकृति में उपस्थित कोई भी उत्पाद का यदि जरूरत से ज्यादा प्रयोग किया जाए तो उसके लाभ से ज्यादा नुकसान ही होते है| आजकल के व्यस्त समय में उचित खानपान की कमी के चलते शरीर में कार्बोहाइड्रेट के बढने से विभिन्न प्रकार के रोग जन्म ले लेते है, जैसे मोटापा, दिल से सम्बन्धित रोग, यहाँ तक की दिमाग पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है, जैसे स्मरण शक्ति का कमजोर होना, आलसी बनना आदि|

चूँकि कार्बोहाइड्रेटयुक्त भोजन में अत्यधिक मात्रा में कैलोरीज होती है, एवं आज के युग में जंक फ़ूड का चलन जोर-शोर से प्रचलित है, जैसे बर्गर, पिज़्ज़ा, पास्ता आदि में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा जरूरत से ज्यादा होती है, जो शरीर को नुकसान पहुचाती है|

कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन खाने में स्वादिष्ट लगता है, किन्तु इससे डायबिटीज होने का भी खतरा रहता है क्योकि मनुष्य शरीर इतनी कैलोरीज पचाने में असमर्थ होता है|

कार्बोहाइड्रेट की मात्रा:

अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है, कि कैसे तय करे की कार्बोहाइड्रेट की कितनी मात्रा का सेवन सही रहेगा? क्योकि इसे लेना भी आवश्यक है, एवं पूर्णत: छोड़ा भी नहीं जा सकता|

अलग-अलग व्यक्तियों की कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अलग-अलग होती है, जो व्यक्ति शारीरिक रूप से अधिक मेहनत करते है उनमे इसकी मात्रा अधिक होनी चाहिए, क्योकि इसका प्राथमिक कार्य शरीर को शक्ति देना है|

जैसे यदि आपको एक दिन में 2000 कैलोरीज की आवश्यकता है तो 40 से 50 प्रतिशत कैलोरीज कार्बोहाइड्रेट द्वारा पूरी की जाएगी| कार्बोहाइड्रेट के 1 ग्राम में 4 तक कैलोरीज होती है अत: एक स्वस्थ व्यक्ति को 225 से 335 ग्राम तक का रोज का सेवन अनिवार्य है, इसमें कभी-कभी कमी या बढ़ोतरी की जा सकती है परन्तु ज्यादा मात्रा में नहीं|

कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्त्रोत:

यदि आप में कार्बोहाइड्रेट की कमी है तो इससे कुपोषण होने का खतरा पैदा हो सकता है, अत: बाहर के हानिकारक पदार्थो के अलावा इसे प्राक्रतिक रूप से हासिल करे|

फाइबरयुक्त फल जैसे बेर, तरबूज, अंगूर, संतरा, नाशपति, बेरीज, खजूर आदि में प्रचुर फाइबर पाया जाता है एवं इससे स्वास्थ्य को भी कोई हानि नहीं होती, इनका इस्तेमाल कार्बोहाइड्रेट की कमी को पूरा करने के साथ-साथ शरीर में मिनरल्स एवं विटामिन्स की कमी को भी पूरा करता है|

शुद्ध किये हुए अनाज से बेहतर है की आप साबत अनाज का प्रयोग करे जैसे बाजार में मिलने वाला आटा काफी बारीक़ होता है जिसमे फाइबर की मात्रा ना के बराबर होती है अत: चोकोरयुक्त आटे का सेवन करे| इसके साथ ही रिफाइंड दालें एवं अन्य उत्पाद भी साबत प्रयोग करे|       

इसके अलावा फलियाँ, मटर, सेम आदि में फाइबर पाया जाता है, एवं इसमें कोलेस्ट्रोल एवं वसा भी नहीं होती न ही नुकसानदायक कार्बोहाइड्रेट होता है, इसे भी आप जब चाहे खा सकते है, एवं दिल के मरीज भी इसका प्रयोग कर सकते है| इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम, सेलेनियम आदि तत्व पाए जाते है जो शरीर के विकास के लिए आवश्यक है एवं विभिन्न रोगों से लड़ने में सहायता करते है|

डेयरी उत्पाद द्वारा भी कार्बोहाइड्रेट की कमी को पूरा किया जा सकता है, किन्तु यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि डेयरी उत्पाद में नकली शुगर नहीं होनी चाहिए केवल प्राक्रतिक शुगरयुक्त पदार्थ का सेवन किया जाना चाहिए|

अंतत: यह कहा जा सकता है कि कार्बोहाइड्रेट शरीर के विकास एवं पोषण हेतु अनिवार्य है, परन्तु यह भी सच है की इसके कई नुकसानदायक पहलू भी है| जब भी हम भोजन करते है तो पाचन तन्त्र उसे पचाता है एवं फिर उसे शुगर एवं स्टार्च में तोड़ता है, जिसमे इन्सुलिन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है|

फिर यही ग्लूकोज के रूप में शरीर को ऊर्जा देता है, यदि खाने में शुगर अधिक होगी तो बाद में यह फैट या मोटापा बन जाती है|