आखिर ई-मेल का अविष्कार किसने किया, यह आज तक रहस्य ही बना हुआ है। १९७१ में APRANET के लिए ई-मेल बनाने का श्रेय वास्तव में ‘रे टॉमलिन्सन’ को दिया जाता है। १९७८ में, एक १४ वर्षीय बच्चे – शिव अय्यादुरै ने ईमेल फ्रेमवर्क पर अपना कार्य प्रारम्भ किया था। उसका प्रोजेक्ट था की उसे कागज़-आधारित ऑफिस मेल फ्रेमवर्क को इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलना था। १९८२ में उसने अपने इस उत्पाद को ‘ई-मेल’ के रूप में कॉपीराइट कराया था। अय्यादुरै का विवाद ये था कि जहाँ टॉमलिंसन ने त्वरित सन्देश भेजने के लिए केवल एक साधारण फ्रेमवर्क बनाया था, वहीँ अय्यादुरै ने ई-मेल का वह फॉर्म तैयार किया था जो की आज मौजूद है। इसीलिए ई-मेल के निर्माता का श्रेय उसे ही दिया जाना चाहिए ऐसा उसका कहना था।

इंटरनेट के कार्य प्रारम्भ करने से पहले ही ई-मेल का उपयोग उसी PC के विभिन्न ग्राहकों को संदेश भेजने के लिए किया जाने लगा था। परन्तु अगर अलग-अलग पीसी को आपस में किसी सिस्टम पर संपर्क साधना होता, तो यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो जाती। समस्या यह थी कि आखिर अलग-अलग पीसी को अलग-अलग एड्रेस कैसे दें। ऐसा करने के लिए, एक ऐसे तरीके की ज़रुरत पड़ने लगी जिसके द्वारा हम ये बता सकें की आखिर सन्देश भेजना किसे है। ये एक पोस्टल फ्रेमवर्क की तरह ही था। ये ही कारण है की रे टॉमलिन्सन को ई-मेल का जनक कहा जाता है। टॉमलिन्सन ने एक APRANET के लिए एक वर्कर की तरह, बोल्ट बेरनेक और न्यूमैन के लिए काम किया। उसने ‘@’ प्रतीक का प्रयोग सन्देश को एक PC से दूसरे PC तक भेजने के लिए किया। उस समय, जो भी इंटरनेट के नियमों का उपयोग कर रहा था, उसके लिए बस इतना ही समझना काफी था की उसे उपयोगकर्ता के बाद ‘@’ प्रतीक लगा कर PC का नाम लिखना है। वेब उपयोग करने में अग्रणी जॉन पोस्टल, इस नये फ्रेमवर्क के प्रमुख ग्राहकों में से एक थे। उन्हें इस कार्य को एक ‘डिसेंट हैक’ की उपाधि देने के लिए भी जाना जाता है। और सच में ऐसा था भी और ऐसा अभी वर्तमान में है भी।

इंटरनेट के द्वारा बेशुमार सुविधायें प्रदान करने के बाद भी, आज भी, ई-मेल इंटरनेट का एक सबसे महत्वपूर्ण अंग बना हुआ है। पूरे विश्व में करीबन ६०० मिलियन लोग ई-मेल का प्रयोग कर रहे हैं। १९७४ तक ईमेल के कईं सारे सैन्य ग्राहक थे, क्योंकि APRANET ने इस बात के लिए उन्हें बहुत समय तक प्रोत्साहित किया था।

उस समय के बाद चीज़ें थोड़ी तेज़ी से होने लगीं। लैर्री रोबर्ट्स ने अपने प्रबंधक के लिए कुछ ई-मेल फ़ोल्डर्स बनाए ताकी उन्हें अपने मेल को अच्छे से रखने में आसानी हो। १९७५ में, जॉन विटटेल ने ई-मेल से सम्बंधित कुछ उत्पाद बनाए। १९७६ तक ई-मेल ने काफी लंबा सफ़र तय कर लिया, और उसका व्यापार मॉडल स्पष्ट दिखने लगा। २ से ३ साल के अंतर्गत ही APRANET की ७५% क्रियाओं को ई-मेल से जोड़ दिया गया।

प्रिंसिपल ईमेल मानक को एसएमटीपी (SMTP ), या सरल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल कहा जाता था। उस समय एसएमटीपी बहुत बुनियादी था, लेकिन आज भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

वर्ल्ड वाइड वेब और उसके वेब इंटरफ़ेस की वजह से कईं ईमेल आपूर्तिकर्ता बहुत आसानी से उपलब्ध होने लगे, जैसे Yahoo और Hotmail। क्यूंकि ई-मेल सुविधाजनक था, इसलिए सभी के पास कम से कम एक ईमेल एड्रेस होने लगा, और इसी कारण इस अद्भुत माध्यम को ना केवल थोड़े बल्कि बहुत से लोगों ने गले लगा लिया और इसका प्रयोग शुरू कर दिया।