आज हम जिस प्रकार के इंटरनेट के स्वरूप को जानते हैं और प्रयोग करते हैं, उस इंटरनेट के स्वरूप की उत्पत्ति के लिए हम किसी एक व्यक्ति को श्रेय नहीं दे सकते। इंटरनेट का वर्तमान स्वरूप बहुत से लोगों के सतत योगदान से प्राप्त हुआ है। इंटरनेट के वर्तमान स्वरूप की संरचना की शुरुवात १९६० के दशक के अंत में, कैलिफ़ोर्निया में हो गयी थी। जब ऑनलाइन विश्व का विचार विकसित ही हो रहा था, तभी कई शोधकर्ताओं ने पहले ही अपनी दूर दृष्टि से दुनिया में डेटा सिस्टम की उपस्थिति को बहुत ही प्रभावी ढंग से भांप लिया था। निकोला टेस्ला ने मध्य-१९०० में ‘वर्ल्ड रिमोट फ्रेमवर्क’ की संभावना को भांपा था और उसे प्रयोग करने और व्यवहारिक रूप देने का प्रयास भी किया था। १९४० के दशक में दूरदर्शी विद्वानों जैसे पॉल ओटलेट ने, किताबों और मीडिया के मोटर युक्त, और सुलभ क्षमता वाले फ्रेमवर्क के बारे में सोचा था।
अगर हम १९६० के पहले हुई सभी खोजो और विचारों को सम्मिलित भी कर लें, तो भी हम ये नहीं कह सकते की इंटरनेट की रचना मध्य-१९६० के पहले हो संभव हो पायी थी। मध्य-१९६० में MIT के जे.सी.आर. लिकलिडर ने पर्सनल कंप्यूटर के एक ‘इंटरगैलेक्टिक नेटवर्क’ की संभावना को पहचाना और बढ़ावा दिया।

इंटरनेट के अंतर्निहित विचार के लिए अगर हम किसी को श्रेय दे सकते हैं तो वह हैं लियोनार्ड क्लेनरॉक। उन्होंने ३१ मई, १९६१ में, अपने पहले पत्र को वितरित किया था, जिसका शीर्षक था, ‘इन्फॉर्मेशन फ्लो इन लार्ज कम्युनिकेशन नेट्स’। जैसा की पहले भी बताया गया कि १९६२ में जे.सी.आर. लिकलिडर IPTO के मुख्य निदेशक बन गए और फिर उन्होंने अपने गैलेक्टिक विज़न की दृष्टि को सबके सामने रखा। इसी प्रकार से, लिकलिडर और क्लेनरॉक के विचारों के साथ, रोबर्ट टेलर ने एक ऐसी प्रणाली की संभावना जताई जो बाद में चलकर ARPANET बनी। दिसम्बर, १९६८ में , नेटवर्क प्रणाली पर काम कर रहे लोगों ने अपनी पहली सभा आयोजित की। इस सभा का नेतृत्व एल्मर शापिरो ने किया और इस मीटिंग का सार उन्होंने SRI में अपनी रिपोर्ट ‘अ स्टडी ऑफ़ कम्युनिकेशन नेटवर्क डिजाईन पैरामीटर्स’ के रूप में दिया। इस मीटिंग में कई सारे प्रतिभागी थे, जैसे स्टीव कार्र, स्टीव क्रॉकर और रौन स्टाउटन। उन्होंने सभा में उन मुद्दों पर चर्चा की जो मेज़बानों के दिमाग में पहले से ही थे और जो आपसी बातचीत से सामने निकाल कर आये थे।

पॉल बरन, थॉमस मारिल और अन्य लोगों के काम करने से पहले ही लॉरेंस रोबर्ट्स और बैरी वेसलेर ने, ‘इंटरफ़ेस मेसेज प्रोसेसर’ (IMP IMP) का विवरण दे दिया था। बाद में, IMP सब नेटवर्क की रूपरेखा और निर्माण का ज़िम्मा जोल्ट बेरनेक और न्यूमन, इंक (BBN) को दे दिया गया था। इंटरनेट जैसे अभिनव विचार के लिए (जो की इतना विस्तृत है और जो निरंतर परिवर्तित हो रहा है) किसी भी एक व्यक्ति को इसका श्रेय नहीं दिया जा सकता। इंटरनेट की उत्पत्ति का श्रेय बहुत से शोधकर्ताओं, सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और विशेषज्ञों को देना होगा, जिन्होंने बहुत से नए आयामों और विचारों पर रौशनी डाल कर एक ऐसे ‘डाटा सूपरहाईवे’ की संरचना की, जिसे हम आज इंटरनेट के नाम से जानते हैं और प्यार करते हैं।

इंटरनेट का मुख्य व्यवहारिक मॉडल १९६० के दशक के अंत में, ARPANET की उत्पत्ति के साथ आया था। APRANET ने एक इकलौते सिस्टम की मदद से बहुत से कंप्यूटरों को आपस में जोड़ दिया था, जिससे की आसानी से सूचना का आदान-प्रदान होने लगा था। इन संशोधानोंका का विकास १९७० तक होता रहा। १९७० के दशक में ही शोधकर्ता रॉबर्ट काह्न और विनटन ने  TCP/IP बनाया, जो की बहुत से कंप्यूटर सिस्टम्स के बीच सूचना के आदान-प्रदान का मुख्य प्रोटोकॉल था। APRANET  ने १९८३ में  TCP/IP  को अपना हिस्सा बना लिया। १९९० में ऑनलाइन वर्ल्ड के सामने वापस चुनौती तब आई, जब PC शोधकर्ता टिम बर्नर्स ने ‘वर्ल्ड वाइड वेब’ बनाया। हालांकि, वर्ल्ड वाइड वेब को ही कुछ लोग इंटरनेट समझ लेते है, पर ऐसा नहीं है। वर्ल्ड वाइड वेब तो वास्तव में ऑनलाइन सूचना एकत्रीकरण का एक सबसे आसान और जाना-माना तरीका है। साइट्स और हाइपरलिंक्स की मदद से हम आसानी से किसी भी सूचना को ढूंढ सकते हैं। इंटरनेट के साथ-साथ अब वेब भी आधुनिक हो गया है और ऑनलाइन डेटा के अंतहीन भंडारण का एक प्रधान आधार बन चुका है।