अपशिष्ट पदार्थ नियमित रूप से इकट्ठा होने वाले उस कचरे को कहा जाता है, जो रोज कारखानों, ऑफिस, घरों, एवं अन्य इमारतों की साफ-सफाई के बाद एकत्रित होता है, तथा जिसे हम कचरापात्र या सड़क और नदियों में ऐसे ही फेंक देते है|

अपशिष्ट पदार्थो की वृद्धि के चलते पर्यावरण प्रदूषण में दिनोदिन काफी बढ़ोतरी हो रही है, जिसका मानव एवं अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड रहा है|

अपशिष्ट प्रबंधन:

अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत ठोस, द्रव एवं गैस के अपशिष्ट को अलग-अलग रूप से सुनियोजित करने का प्रस्ताव है, जिसमे विभिन्न तकनीको का प्रयोग करके कचरे को या तो नष्ट कर दिया जाता है, या उसे पुनर्चक्रण करके फिर से इस्तेमाल योग्य बनाया जाता है| इस प्रक्रिया के अंतर्गत निम्न प्रकार की प्रणालियोंक का क्षेत्रो के अनुसार निर्माण किया गया है, जैसे कि:-

  • निपटान प्रणाली:

इस प्रणाली के अंतर्गत अपशिष्ट को मिटटी में दफना दिया जाता है, एवं गैसों को नष्ट करने के लिए यंत्र स्थापित करके जला दिया जाता है|

  • भस्मीकरण प्रणाली:

इस प्रणाली के अंतर्गत ठोस एव गैसों के अपशिष्ट को नष्ट करने के लिए छोटे एवं बड़े दोनों पैमानों पर इन्हें भीष्म ऊष्मा से जला दिया जाता है|

  • पुनर्चक्रण प्रणाली:

इसमें अम्शिष्ट पदार्थो को पुनः इस्तेमाल करने के विचार से नष्ट करके फिर से योग्य बनाया जाता है|

  • भौतिक पुनःपरिष्करण प्रणाली:

इसमें भी अपशिष्ट पदार्थो का परिष्करण करके फिर से काम में लाने योग्य बनाया जाता है|

  • जैविक पुनःपरिष्करण प्रणाली:

खाद्य अपशिष्ट को एकसार करके जैविक खाद तैयार की जाती है|