स्त्रावी ग्रन्थिया मुख्य रूप से २ प्रकार के होती है, बहि:स्त्रावी ग्रन्थिया एवं अंत:स्त्रावी ग्रन्थिया| बहि:स्त्रावी ग्रन्थियो के अंतर्गत अश्रु ग्रन्थि, दुग्ध ग्रन्थि, स्वेद ग्रन्थि आदि आते है, जिनसे एन्ज्याम्स स्त्राव होता है, जबकि अंत:स्त्रावी ग्रन्थियों के अंतर्गत पीयूष ग्रन्थि,अवटु या थाइरोइड और परा-अवटु आदि ग्रन्थिया शामिल है| ये ग्रन्थिया नलिकाहीन होती है, एवं हॉर्मोन निकलता है जो प्लाज्मा द्वारा मनुष्य के शरीर के विभिन्न भागों में पहुचाया जाता है|

अंत:स्त्रावी तंत्र

थॉमस एडिसन को एन्ड्रोक्रायिनोलोजी या अंत:स्त्रावी विज्ञानं का जनक माना जाता है| यहाँ हम अंत:स्त्रावी ग्रन्थियो एवं उनके कार्यों के बारे में विस्तारपूर्वक अध्ययन करेंगे:-

पीयूष ग्रन्थि:

पीयूष ग्रन्थि को मास्टर ग्रन्थि भी कहा जाता है, इसका भार ०.६ ग्राम के आस-पास होता है, मतलब यह मटर के एक दाने जितनी होती है| यह मानव मष्तिष्क में पाई जाती है एवं सबसे छोटी ग्रन्थि मानी जाती है|

पीयूष ग्रन्थि से स्त्रावित होने वाले हॉर्मोन व् उनके कार्य:

STH हॉर्मोन:

यह हॉर्मोन मानव शरीर की वृद्धि के लिए जाना जाता है, जिसकी कमी से मनुष्य बौना रह जाता है एवं अधिकता से मनुष्य भीमकाय लगता है|

TSH हॉर्मोन:

यह हॉर्मोन थायरोइड ग्रन्थि को प्रेरित करता है, जिससे उसमे से हॉर्मोन का स्त्रावण हो सके|

ACTH हॉर्मोन:

यह हॉर्मोन एड्रीनल कार्टेक्स से होने वाले स्राव पर नियन्त्रण रखने का कार्य करता है|

GTH हॉर्मोन:

यह हॉर्मोन जनन अंगो से होने वाले हॉर्मोन स्त्राव पर नियन्त्रण रखता है, यह भी २ प्रकार का होता है, FSH एवं LH हॉर्मोन|

LTH हॉर्मोन:

यह हॉर्मोन शिशु के स्तनपान के लिए दूध स्त्राव में सहायता करता है|

ADH हॉर्मोन:

यह हॉर्मोन शरीर में पानी के संतुलन को बनाये रखने में सहायता करने के साथ-साथ रक्त कोशिकाओं का संकीर्णन करता है|

अवटु ग्रन्थि:

यह सबसे बड़ी अंत:स्त्रावी ग्रन्थि मानी जाती है, जो गले में श्वास नली के पास लेरिक्स के नीचे की तरफ स्थित होती है| इसमें से थाईराक्सिन व् ट्रायोडोथाइरोनिन नामक होर्मोन स्त्रावित होता है| इस हॉर्मोन की कमी से गलगंड रोग हो जाता है|

यह हॉर्मोन शरीर में बालों, हड्डियों आदि के विकास के लिए आवश्यक है| यह जनन अंगो की सक्रियता एवं संतुलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|

इस हॉर्मोन की कमी से बच्चो का शरीरिक एवं मानसिक विकास रुक सकता है| इससे मिक्सीडमा एव हाईपोथाईराय्जिम नामक रोग हो सकते है| जिसके कारण मनुष्य कई बार गूंगा बहरा तक हो सकता है| इस हॉर्मोन की अधिकता से रक्त दाब बढ़ जाता है एवं धडकन तेज हो जाती है|

पराअवटु या पैराथायरोइड ग्रन्थि:

यह अवटु ग्रन्थि के बिलकुल पीछे स्थित होती है, जिसमे से दो प्रकार के हॉर्मोन स्त्रावित होते है:-

पैराथायरोइड हॉर्मोन:

यह रक्त में कैल्शियम के कमी होने के कारण स्त्रावित होता है|

केलसीटोनिन हॉर्मोन:

यह रक्त में कैल्शियम की मात्रा अधिक होने के कारण स्त्रावित होता है|

अधिवृक्क या एड्रेनल ग्रन्थि:

यह ग्रन्थि ठीक वृक्क के उपर स्थित होती है, एवं क्रोध या ज्यादा उत्साह के समय सक्रिय हो जाती है| इसके २ भाग होते है:-

कोर्टेक्स:

बाहरी भाग को कोर्टेक्स कहा जाता है, जिसमे से विभिन्न प्रकार के हॉर्मोन स्त्रावित होते है, जो शरीर की विभिन्न क्रियाओ को नियन्त्रण करते है| यह अत्यंत महत्वपूर्ण हॉर्मोन है जिसके बिना मनुष्य जीवित नहीं रह सकता|

मेडुला:

इसके द्वारा एपिनेफ्रिन एवं नारएपिनेफ्रिन नामक हॉर्मोन स्त्रावित होते है, जो अमीनो एसिड होते है| यह हॉर्मोन ह्दय की गतिविधियों में सहायक होते है|

जनन ग्रन्थि:

इसके कारण पुरुषो के वृष्ण में टेस्टोंस्टेरोन हॉर्मोन का स्त्रावण होता है, एवं महिलाओं में प्रोजेस्ट्रोन एवं रिलैक्सिन नामक हॉर्मोन स्त्रावित होते है, जो बच्चा पैदा करने एवं गर्भाशय एवं अंडाशय में उपस्थित रहता है|

पीनियल ग्रन्थि:

इस ग्रन्थि को मनुष्य की तीसरी आँख भी कहा जाता है| यह मस्तिष्क के आगे वाले भाग में उपस्थित रहती है| इस ग्रन्थि से मिलेटोनिन नामक हॉर्मोन निकलता है|