नुक्लिक एसिड

जेनेटिक इंजीनियरिंग क्या है?

जेनेटिक इंजीनियरिंग या आनुवंशिक आभियांत्रिकी विज्ञानं का एक आधुनिक अविष्कार है, जिसके अंतर्गत प्राणियों एवं पौधों के डी.एन.ए या जीनोम कोड में हस्तक्षेप करके उसमे बदलाव किया जाता है। इस प्रक्रिया को जेनेटिक इंजीनियरिंग कहा जाता है।

जेनेटिक इंजीनियरिंग का मुख्य उदेश्य जीवो के विषम रोगों का पता लगाना एवं रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है। बायोटेक्नोलॉजी के अतर्गत जेनेटिक इंजीनियरिंग इस महत्वपूर्ण शाखा है, जिसपर अभी भी खोजबीन जारी है। इसे आप कुछ आसान उदाहरण के द्वारा भी समझ सकते है:-

  • जिस प्रकार समुंद्र में रहने वाली जेली फिश अँधेरे के समय जगमगाती है, तो जेली फिश में यह खास तरह का गुण विद्यमान है, इसी को किसी और जीव में डालने के लिए उसका डी. एन. ए. निकालकर खरगोश में स्थापित किया गया, जिस से खरगोश में भी अँधेरे में चमकने के गुण आ गए।
  • इसी प्रकार वैज्ञानिक जटिल रोगों से लड़ने के लिए जीनोम की समस्त सरंचना को बदलने के शोध में लगे हुए है, जिससे व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सके, या पहले से अगर कोई जटिल रोग है, तो उसे नष्ट किया जा सकते।

जेनेटिक इंजीनियरिंग की प्रक्रिया:

जेनेटिक इंजीनियरिंग की प्रक्रिया के अंतर्गत किसी विशेष जीव के गुणों को प्राप्त करने के लिए जीनोम का इस्तेमाल किया जाता है, जो उसके डी. एन. ए. में उपस्थ्ति होता है, इसी जीनोम में सारे गुण सुरक्षित रहते है।

फिर जीनोम को प्राप्तकर्ता की कोशिकाओं में प्रतिस्थापित किया जाता है, और परिणाम के लिए थोडा समय अवश्य लगता है, जिसके बाद वांछित परिणाम स्पष्ट हो जाता है।


Comments

2 responses to “जेनेटिक इंजीनियरिंग क्या है?”

  1. Abhishek Yadav Avatar
    Abhishek Yadav

    Genetic engineering

  2. Ravindra Kumar Avatar
    Ravindra Kumar

    THANKS FOR THIS KNOWLEDGE

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