DNA – finger print किसे कहते हैं? इसके उपयोगों को बताएं । 

बढ़ते हुए अपराधिक मामले को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों द्वारा ऐसा तकनीक विकसित किया गया है जो सच को सच और झूठ को झूठ साबित कर सकता है अर्थात हर व्यक्ति के हाथों की अंगुलियों के निशान अलग-अलग होती है उसमें डीएनए के साथ क्रोमोसोम, एलिल एवं जीन जैसे अनुवांशिक पदार्थ भी पाए जाते हैं जो सब में अलग-अलग होते हैं इसलिए हर व्यक्ति के पक्के सबूत के रूप में फिंगर प्रिंट लेने का प्रावधान चलाया गया है जिसे डीएनए फिंगरप्रिंट कहा जाता है इसका अर्थ होता है अंगुलियों का छाप ।

DNA- finger print को सबसे पहले Alak jeffry ने  1985  में विकसित किया था परंतु 2 साल बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा मान्यता प्राप्त हुआ था भारत में डीएनए फिंगरप्रिंट को मान्यता दिलाने वाले Dr. B.K कश्यप ने 1988 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था भारत में सबसे पहले केरल के एक अदालत में फिंगरप्रिंट लिया गया था परंतु सबसे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने 1989 ईस्वी में राजीव गांधी के हत्यारे को पकड़ने में सफल हुआ था।

डीएनए फिंगरप्रिंट का निम्नलिखित जगहों पर उपयोग किया जाता है।

1  मृत व्यक्ति की पहचान करने में –  कभी-कभी ऐसा पेचीदा मामला सामने आ जाता है की गड़े मुर्दे को उखाड़ना पड़ता है ताकि सच साबित किया जा सके ऐसी हालत में डीएनए फिंगरप्रिंट काम करता है।

2 अपराधी को सजा दिलाने में- कभी-कभी ठोस सबूत ना मिलने के कारण निर्दोष को सजा मिलने के कारण दोसी बरी हो जाता है और निर्दोष को सजा मिल जाता है वैसी स्थिति में डीएनए का फिंगरप्रिंट दूध का दूध और पानी का पानी कर देता है।

3 पैतृक परीक्षण – कभी-कभी झूठे संतान बनने का मामला सामने आता है तो कभी-कभी झूठे मां बाप बनने का।
ऐसी स्थिति में यही डीएनए फिंगरप्रिंट असली मां बाप को तथा अपनी संतान को पहचानने में मदद करती है।

4 वंश वृक्ष तैयार करने में- वंश वृक्ष तैयार करने में डीएनए फिंगरप्रिंट काफी कारगर साबित होता है।