बर्फ पानी पर क्यों तैरता है

ice berg floating on water

अगर आप कई तरह के ठोस (जिंक, कॉपर, सिल्वर, गोल्ड ) को पानी में डालते है तो वह डूब जाता है | पर बर्फ( जो की एक ठोस है ) पानी के ऊपर आसानी से तैरती रहती है | हम जानतें होंगे की पदार्थ के तीनो रूप – ठोस , द्रव , गैस में सिर्फ अणुओं की सघनता का अंतर होता है | ठोस में अणु अत्यंत सघन मतलब पास होतें है | जबकि द्रव में अणुओं की सघनता ठोस की अपेक्षा कम होती है और गैस में यह अंतर अत्याधिक होता है | और जब किसी पदार्थ का घनत्व पानी से कम होता है वह वस्तु पानी पर तैरती रहती है |

इसी प्रकार बर्फ पानी से कम घनत्व वाला होता है , जब पानी माइनस ४ डिग्री सेल्सिअस तक होता है तो वह अपने में मौजूद हैड्रोजन एक दुसरे से जुड़ कर ठोस बर्फ का निर्माण करती है | क्यूंकि इसका आकर सायोंजित नही होता अतः उनके बीच में हवा भर जाती है| जिससे वह काफी हल्का और पानी के उप्पर आर्कमडीज के सिन्धात के अनुसार यह पानी में तैरती रहती है और डूबती नही है |

तेल पानी पर क्यों तैरता है

silly boy thinking

आपने देखा होगा की एक लकड़ी का टुकड़ा पानी में तैरता रहता है, जबकि उसी आकर का पत्थर पानी में डूब जाता है| इसकी वजह होती सघनता या घनत्व, अर्थात कोई वस्तू पानी में तैरती है तो उसका घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है | तेल की स्थिति दो वजहें होती है पहला तो तेल का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है क्यूंकी तेल के अणुओं की सघनता पानी की अणुओं की सघनता से कम होती है |

ये बिलकुल उसी प्रकार है जैसे हीलियम गैस से भरा गुब्बारा आसमान में उड़ जाता है क्यूंकी, हीलियम गैस का घनत्व वातावरण में मौजूद गैस के घनत्व से कम होता है और वह आसमान में उड़ जाता है, या फिर हॉट एयर बलून में हम गैस को गर्म कर इसकी सघनता को कम करतें है जिससे वह आसमान में उड़ पाता है |

दूसरी वजह है ये तेल और पानी आपस में अविलेय है, ये दोनो आपस में घुलते नही है अगर हम इन्हें काफी जोर से हिलाएं या मिलाने की कोशीश का लें, थोड़ी देर बाद पानी और तेल अलग हो जाता है | इसलिए वह पानी के ऊपर तैरता है |

समुद्र का पानी खारा क्यों होता है?

dead sea pic

आप सबको यह जानकारी होगी की हर समुद्र का पानी खारा होता है| पर इसकी वजह आखिर क्या होती है ? शायद ये नही पता होगा | दरसल समुद्र के पानी की खारा होने की कई वजहें है | पहली जब नदियों का पानी समुद्र की ओर बहता है रहता है तो ज्यादा से ज्यादा पानी वाष्पीकृत होकर उड़ जाता है और बादल बन जाता है, और कुछ पानी समुद्र में चला जाता है | जब यह बादल बरसतें है, तो आसमान में मौजूद कई गैसों (जैसे- कार्बन-डाई-अक्साइड, सल्फर , नाइट्रोजन) को अपने साथ मिला लेता है | जो की वर्षा के पानी को लवणीय बना देती है | और यह पानी जब पहाड़ों पर गिरता है तो ये लवण पानी में अच्छी तरह से घुल जातें है, जो इसे खारा बना देतें है |

नदियों में यह अम्लीय लवण बहुत छोटी मात्रा में मौजूद होतें है | दूसरा कारण समुद्र की तल पर पाई जाने वाली चट्टानें और ज्वालामुखी होतें है | यह समुद्र जल में लवण बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण होता है, जिससे समुद्र का पानी खारा होता है | एवं समुद्र में मौजूद क्लोरीन तथा सोडियम भी जब एक दुसरे से रासायनिक क्रिया करके सोडियमक्लोराइड अर्थात नमक का निर्माण करतें है जो की समुद्र के पानी को खारा बनातें है

लोहे की सुई पानी की सतह पर किस कारण तैरती है

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लोहे की क्षण पानी में डूब जाती है तो इसमें कोई आश्चर्य नही होता | यह एक समान्य सी बात लगती है, परन्तु यदि कोई आपसे यह कहे की लोहा पानी में तैर सकता है तो आप इस बात पर विश्वास नहीं करेंगे | पर क्या वाकई ये संभव है? जी हाँ, लोहे की सुई पानी में तैर सकती है, बल्कि आप भी ये कारनाम खुद कर सकतें है | दरअसल वह हर वस्तु जिसका घनत्व पानी के घनत्व से अधिक अर्थात ज्यादा होता है, वह पानी में डूब जाती है | तथा वह हर वस्तु जिसका घनत्व मतलब पृष्ठीय क्षेत्रफल पानी के घनत्व से कम होता है वह पानी में तैरने लगती है |

किसी सुई को एक पतले कागज के ऊपर रखकर पानी के एक कटोरे में रख देतें है. कुछ समय बाद, काजग गीला होकर कटोरे के ताल पर चला जाता है और सुई पानी के उपर तैरती रहती है | क्यूंकि उस सुई का पृष्ठीय क्षेत्रफल (घनत्व) पानी के घनत्व से कम होता है, जिस वजह से लोहे की सुई पानी के ऊपर आसानी से तैरती रहती है |

इसी कारण आपने देखा होगा कई कीड़े मकोड़े भी पानी पर चलते है और डूबते नहीं।

मृत सागर में वस्तु क्यों तैरती है

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मृत सागर के बारे में आपने कभी न कभी सुना होगा या पढ़ा होगा | की इसे मृत सागर क्यूँ कहतें है? इत्यादि | पर का आपको मृत सागर की एक विशेषता पता है की यहाँ वस्तुएं तैरती रहती है |

है न कमाल की बात, एक एसा समुद्र जहाँ कोई डूब नही सकता परन्तु इसे मृत सागर कहतें है | दरसल मृत सागर सी लेवल से ४०० मीटर नीचे स्थित है | और यह दुनिया की सबसे ज्यादा खारे पानी वाला समुद्र है | इसकी कई विशेषताएं है –

जैसे – मृत सागर में कई प्रकार के खनिज लवण(कैल्सियम , जिंक , सल्फ़र, ब्रोमाइड, पोटाश, मग्नीशियम इत्यादि ) पाए जातें है, जो मानव शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होते है | परन्तु इसका इस्तेमाल खाने के लिए न करके विभिन्न तरह की औषधियों, स्पा इत्यादि में किया जाता है| क्यूंकि यह काफी खारा होता है तो इसमें कोई जलीय जीव नही जीवित रह पाते इसी लिए यह मृत सागर कहलाता है | क्यूंकि इसमें नमक की मात्रा किसी दुसरे समुद्र से सात से आठ प्रतिशत तक अधिक होती है, जिस कारण इसका घनत्व काफी होता है , और इसमे कोई भी वास्तु डूबती नही वरन तैरती रहती है |

प्रेशर कुकर में खाना जल्दी क्यों पकता है

pressure cooker with boy

क्या आपको पता है की प्रेशर कुकर में भोजन अन्य बर्तनों की अपेक्षा जल्दी पकता है, पर क्या आप जानतें है की यह कमाल की मशीन काम कैसे करती है और इसके पीछे का विज्ञान क्या है ?

दरसल ये कमाल है छोटे से तर्क का, जब हम खुले बर्तन में भोजन पकाते है तो उसमें बनने वाली भाप उड़ जाती है और वह किसी काम में नही आती जबकि, जब हम भोजन ढक कर पकातें है तो वह खुले की तुलना में जल्दी पकता है| कुछ इसी प्रकार जब हम प्रेशर कुकर में भोजन पकातें है तो इसमें बननें वाली वाष्प का इस्तेमाल दबाव बनाने में होता है| और जल्दी दबाव बढ़ने के कारण पानी का क्वथनांक मतलब पानी का तापमान भी जल्दी काफी आधिक हो जाता है | और तापमान और दबाव किसी खुले बर्तन की अपेक्षा बहुत ज्यादा होता है, और प्रेशर कुकर को कुछ इस प्रकार से बनाया गया है की इसमें कहीं से भी वाष्प का रिसाव न हो, इस प्रकार यह एक पुर्व निर्धारित तापमान और दबाव को रोक कर रखता है , जिससे भोजन जल्दी पक जाता है |

यही कारण है की प्रेशर कुकर में खाना जल्दी क्यों पकता है |

पहाड़ों पर खाना देर से क्यों बनता

mountain cartoon pic

पहाड़ सी (समुद्र ) लेवल से काफी ऊँचाई पर स्थित होतें है | और सी (समुद्र )  लेवल पर पानी का क्वथनांक १०० डिग्री सेल्सिअस होता है |

जैसे – जैसे उंचाई बढती है जो वातावरण का अर्थात हवा का दबाव होता है वह कम होता, जाता है | और यह दबाव प्रति अणु पर होता है, अर्थात सी लेवल की ऊँचाई पर प्रति अणु जो दबाव होता है वह ऊँचाई बढ़ने से कम होने लगता है एवं इसी कारण जो पानी का क्वथनांक होता है कम होता जाता है| लगभग सी लेवल से एक किलोमीटर की ऊँचाई पर पानी का क्वथानांक ९२ डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है |

इसी कारण से पानी जल्दी उबल जाता है और सब्जी या भोजन जलने का खतरा ज्यादा होता है | इसलिये अगर आप पहाड़ों में खुले बर्तन में भोजन पकाएंगे तो यह काफी थका देने वाला और सरदर्द वाला काम हो सकता है| परन्तु अगर आप बंद बर्तन का इस्तेमाल करेंगे तो यह काफी सहज हो सकता है, परन्तु आप के घर से थोडा ज्यादा समय लगेगा | यही कारण है की पहाड़ों पर खाना देर से पकता है |