कोलेस्ट्रोल क्या है ? इसके फायदे नुकसान के बारे में क्या जानते हैं आप ?

कोलेस्ट्रोल यह एक यूनानी शब्द है जो कोले और स्टीरियो (ठोस) से बना है और …

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जब हम थक जाते हैं तो हाथ पैर और पुरे शरीर में दर्द होने लगता है तब हम शरीर की मालिश कराते हैं और हमें आराम मिलता है क्यों ?

उत्तर->इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि हमारे शरीर में अधिक से अधिक O2 की उपस्थिति …

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क्या पौधे कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)लेते हैं और आक्सीजन (O2) छोड़ते हैं ?

क्या हमलोग जो CO2 छोड़ते हैं वह पौधे लेते हैं और पौधे जो O2 छोड़ते …

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विचित्र लेकिन हानिकारक पदार्थ है ‘एस्बेस्टस’ Asbestos in Hindi

एस्बेस्टस एक ऐसा पदार्थ है जों हमारे दैनिक जीवन के एक हिस्से के रूप में हमारे चारों ओर स्थित है, चाहे वह घर की छत हो या फिर छतों पर चढ़ाई जाने वाली चादर। यह एक ऐसा पदार्थ होता है जो आग को नहीं पकड़ता अर्थात यह पूरी तरह से अज्वलनशील होता है। जिसके चलते इसका उपयोग ज्यादा से ज्यादा किया जाता है, ताकि घरों और इमारतों में आग लगने का खतरा कम से कम हो। यह अघुलनशील होता है लेकिन यह सीमेंट में आसानी से मिलाया जा सकता है।

अगर बात करे एस्बेस्टस की उत्पत्ति की तो यह प्राकृतिक रूप से मिलने वाला सिलिकेट का एक प्रकार है। जो की चट्टानों से प्राप्त होता है। एस्बेस्टस की खदानें भी होती है, जो जमीन की मिटटी की सतह के नीचे मिलती है। इसे विस्फोटक और हथौड़ों से फोड़कर निकाला जाता है। लेकिन इसे निकालते समय पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता क्योकि अज्वलनशील होने के साथ-साथ एस्बेस्टस अघुलनशील भी होता है। यह पानी में मिलकर लचीला हो जाता है।

अपने अज्वलनशील गुण के चलते एस्बेस्टस से अग्निरोधक वस्त्र, भवनों की छत, पानी के पाइप और छतों पर चढ़ाई जाने वाली चादरों जैसी कई वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। लेकिन जहां एस्बेस्टस अपने आप में इतने सारे विचित्र गुण लिए है वहीं वैज्ञानिक इसे मृत्युदाता भी मानते है।

वैज्ञानिक शोध के अनुसार इसके चलते सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों के कैंसर जैसी समस्याए हो रही है। दरअसल इससे निकलने वाले रेशे अतिसूक्ष्म होते है और अघुलनशील होने के चलते फेफड़ों के कैंसर का कारण भी बनते है। वहीं डॉक्टरों का मानना है कि अगर इसके इस्तेमाल को नहीं रोका गया तो यह आने वाले दशकों में कई लाख लोगों की मृत्यु का कारण भी बन जाएगा।

जिसके चलते यह दुनिया भर के करीब 50 देशों में प्रतिबंधित है। बावजूद इसके इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके पीछे का कारण है इसका काफी ज्यादा सस्ता होना है। वहीं अगर भारत की बात कि जाए तो भारत में तो यह मिलता ही है किन्तु जिन देशों में यह प्रतिबंधित है वे भी भारत में इसका निर्यात करते है।

एस्बेस्टस के विचित्र और हानिकारक गुण को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जिस तरह हम अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एस्बेस्टस जैसे प्राकृतिक संसाधन का उपयोग अपने हिसाब से कर रह है। कही एक दिन यही प्राकृतिक संसाधन हमारे विनाश का कारण न बन जाए।

सड़े हुए फल के आसपास के फल भी क्यों सड़ जाते हैं?

सभी जानते है कि अच्छी सेहत के निर्माण में फल कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन यह तब ही होगा जब फल ताजा हो। लेकिन अक्सर आपने देखा होगा कि सड़े हुए फलों के संपर्क में आने से उसके आसपास के अन्य फल भी सड़ जाते हैं। यह क्यों होता है ? जबकि अन्य फल तो ताजे थे और आप कुछ समय पहले ही उन्हें बाजार से लेकर आये थे। लेकिन क्या आप जानते है, कि आपके ताजे फल सड़े फलों के संपर्क में आने से क्यों खराब हो गए।

इसके पीछे का मुख्य कारण है सड़े फलों से निकलने वाली एथिलीन गैस। बता दे कि सभी फलों में एथिलीन गैस होती है, किन्तु सड़े हुए फलों में एथिलीन गैस की मात्रा पके हुए फलों की तुलना में अधिक होती हैं। जब हम सड़े हुए फल को अन्य फलों के आसपास रखते है, तो ये फल सड़े फल से निकलने वाली एथलीन गैस के संपर्क में आ जाते है। जिसके चलते अन्य फल भी सड़ जाते हैं।

ये तो हुआ सड़े फलों के कारण अन्य फलों का सड़ना, किन्तु क्या आप जानते है, कि कुछ ऐसी परिस्थियां भी होती है, जब पके फल भी सड़े हुए फलों में परिवर्तित हो जाते हैं। उदहारण के लिए यदि हम केले को फ्रिज में रखते है, तो यह फ्रिज में रखने के कुछ समय बाद ही काला पड़ जाता है, जबकि फ्रिज में रखे गए सभी फल पूरी तरह से ताजे हैं। दरअसल फ्रिज में केले के खराब होने का कारण है, उसका डंठल। शायद आप यह न जानते हो कि केले के डंठल से भी एथिलीन गैस निकलती हैं।

यह गैस केले के साथ-साथ आसपास के फलों को भी जल्दी से पका देती हैं. फलस्वरूप केला तो खराब होता ही है, साथ ही अन्य फल भी खराब हो जाते हैं। ऐसें में अगर आप फ्रिज में मौजूद केले को सड़ने से बचाना चाहते है, तो आप उसके डंठल पर प्लास्टिक को चढ़ा दे, जिससे न केवल केला खराब होने से बचा रहेगा साथ ही साथ अन्य फल भी लम्बे समय तक ताजा बने रहेंगे।

दोस्तों फल अगर ताजे हो तो यह हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते है, किन्तु आजकल फलों को समय से पहले पकाया जा रहा हैं। इसके लिए अत्यधिक मात्रा में एथिलीन गैस का उपयोग किया जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप फल समय से पहले पक जाते है, और उतनी ही तेजी से सड़ भी जाते हैं। हर मौसम में फलों की उपलब्धता के लिए एथिलीन गैस का उपयोग फलों के प्राकृतिक पोषक तत्वों को ख़त्म कर देता हैं।