कोलेस्ट्रोल क्या है ? इसके फायदे नुकसान के बारे में क्या जानते हैं आप ?

कोलेस्ट्रोल यह एक यूनानी शब्द है जो कोले और स्टीरियो (ठोस) से बना है और …

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जीव विज्ञान की शाखाएँ व इनके जनक Father of Branches of Biology

जीव विज्ञान की अनेक शाखाएँ हैं। इन विभिन्न शाखाओं के जनक भी भिन्न-भिन्न हैं। इस लेख में हम आपको जीव विज्ञान की कुछ शाखाओं व उनके जनक के बारे में बता रहे हैं। 

शाखाएँ        जनक

जीव विज्ञान- अरस्तु

सूक्ष्म जीव विज्ञान- लुइस् पाश्चर

आयुर्वेद- चरक

भारतीय ब्रायोलॉजी- एस.आर.कश्यप

भारतीय पारिस्थितिकी- आर. मिश्रा

भारतीय कवक विज्ञान- जे.बटलर

भारतीय शैवाल विज्ञान- एम.ओ.ए.अय्यंगर

आनुवांशिकी- ग्रेगर जॉन मेंडल

आधुनिक आनुवांशिकी- टी. एच. मॉर्गन

विकिरण आनुवांशिकी- एच. जे. मुलर

वनस्पति विज्ञान- थियोफ्रेस्टस

आधुनिक वनस्पति विज्ञान- लीनियस

वर्गिकी- लीनियस

शरीर रचना विज्ञान (शारीरिकी)- हेरोफिलस

आधुनिक शारीरिकी- एंड्रियास विसैलियस

रक्त परिसंचरण- विलियम हार्वे

उत्परिवर्तनवाद- ह्युगो डी. ब्रिज

प्रतिरक्षा विज्ञान- एडवर्ड ज़ेनर

कोशिका विज्ञान- रॉबर्ट हुक

सूक्ष्म जीव विज्ञान- ल्यूवेन हॉक

जीवाणु विज्ञान- रॉबर्ट कोच

पादप शारीरिकी- एन. ग्रेयु

कवक विज्ञान- माइकेले

सुजननिकी- फ्रांसिस गॅल्टन

चिकित्सा शास्त्र- हिप्पोक्रेट्स

औतिकी- मार्सेलो मैलपिगी

भ्रूण विज्ञान- फ्रेडरिक वोल्फ

आधुनिक भ्रूण विज्ञान- कार्ल इ.वॉन बेयर

जीवाश्म विज्ञान- लियोनार्डो दी विन्ची

आधुनिक जीवाश्म विज्ञान- कुवियर्

बैक्टीरियोफेज- टवार्टव दी हेरिल

एंडोक्राइनोलॉजी- थॉमस एडिसन

पादप क्रिया विज्ञान- स्टीफन हेल्स

पादप रोग विज्ञान- जे.बटलर

एंटीसेप्टिक(रोगाणुरोधक) सर्जरी- जे.लिस्टर

प्रतिजैविकी- एलेक्जेंडर फ्लेमिंग

ब्रायोलॉजी- जॉन हेडविग

कीमोथेरेपी- पॉल एर्लिक जॉर्ज

डी.एन. ए. फिंगर प्रिंटिंग- एलेक् जेफ्री

ईलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी- ऐंथोवन कैस्पर

महामारी विज्ञान- जॉन स्नो कोनरेड

आधुनिक विकृति विज्ञान- रुडोल्फ विरकॉ

तनाव शरीर क्रिया विज्ञान- हेन्स स्ल्ये

स्टेम सेल के बारे में रोचक तथ्य Interesting Facts about Stem Cell

स्टेम सेल सम्बन्धी कुछ रोचक तथ्य इस प्रकार हैं-

स्टेम सेल (कोशिका) को प्रायः भ्रूण से प्राप्त किया जाता है।

स्टेम सेल मुख्य रूप से दो प्रकार के हैं- प्ल्यूरिपोटेंट स्टेम सेल व मल्टीपोटेंट स्टेम सेल।

प्ल्यूरिपोटेंट स्टेम सेल सभी कोशिकाओं के रूप में विकसित होने की क्षमता रखती है, जबकि मल्टीपोटेंट स्टेम सेल कुछ कोशिकाओं के रूप में ही विकसित हो सकती हैं।

स्टेम सेल को ब्लैंक सेल भी कहा जाता है।

स्टेम सेल में शरीर में पायी जाने वाली कोशिकाओं के समान विकास करने की क्षमता पायी जाती है।

शरीर के किसी भी भाग में यदि किसी कोशिका में कोई कमी या खराबी आ जाती है तो स्टेम सेल पूर्णतया उस कमी व खराबी को दूर कर क्षतिपूर्ति करती है।

स्टेम सेल को 300 तरह की कोशिकाओं में परिवर्तित किया जा सकता है।

स्टेम सेल में विभाजन की प्रवृति पायी जाती है।

स्टेम सेल तकनीक की खोज 1998 में अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा की गयी थी।

स्टेम सेल तकनीक की सहायता से शरीर में अनुपयोगी व खराब हो चुकी कोशिकाओं को नष्ट करके नव कोशिकाओं का निर्माण किया जा सकता है। इस तकनीक को “एम्ब्रॉयनिक स्टेम सेल तकनीक” के नाम से जाना जाता है।

इस तकनीक में स्टेम सेल का प्रवेश शरीर में इंजेक्शन के माध्यम से करवाया जाता है।

डायबिटीज, लीवर, किडनी, दिल के रोग, एड्स, ट्यूमर, रीढ़ की हड्डी सम्बन्धी परेशानी तथा आनुवांशिक रोगों जैसी अनेक घातक बीमारियों से बचाव करने व इनसे होने वाले  प्रभाव में कमी लाने में स्टेम सेल काफी हद तक सहायक होती है।

वर्तमान समय में अपनी स्टेम सेल को सुरक्षित रखने के लिए “स्टेम सेल बैंकिंग” की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

स्टेम सेल बैंकिंग में इस सेल को सुरक्षित तरीके से जीवित रखने के लिए -196℃ तापमान पर संग्रहित किया जाता है।

भ्रूण से प्राप्त की जाने वाली स्टेम सेल में 75 से भी अधिक प्रकार के रोगों से बचाव करने की क्षमता पायी जाती है और इसमें 5000 के करीब प्रोटीन पाये जाने की पुष्टि हुई है।

विज्ञान की माने तो स्टेम सेल से दिल का वॉल्व, कृत्रिम शुक्राणु व धमनियाँ भी बनाई गयी हैं।

“होप- इन विट्रो” नामक उपन्यास भी स्टेम सेल पर आधारित है।

गर्भावस्था के दौरान यदि स्त्री के जननांग में कोई घाव या जख्म हो जाता है तो गर्भस्थ शिशु की सहायता से स्टेम सेल द्वारा उसका स्वतः ही प्राकृतिक रूप से उपचार हो जाता है।

वर्तमान समय में स्टेम सेल सम्बन्धी विषय पर भविष्य में रोजगार के भी कई विकल्प उपलब्ध हैं|

About cat in Hindi – बिल्ली के बारे में जानकारी

वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत (Kingdom) : (Animalia ) जंतु
संघ (Phylum) : (Chordata) कौरडेटा
वर्ग (Class) : (Mammalia) स्तनधारी
गण (Order) : (Carnivora) मांसाहारी
कुल (Family) : (Felidae) फ़ेलिडाए
वंश (Genus) : (Felis) फ़ीलिस
जाति : फ़ीलिस कैटस

बिल्ली – एक ऐसी चार पैरो वाली जानवर जिसे हम अक्सर देखते है, ये बिल्लियाँ बंदरो से कम नही हैं कही भी चढ़ जाती हैं दूध पिने के लिए या फिर चूहे मारने के लिए।

कुछ लोग बिल्लियों को पालते भी हैं वहीं कुछ लोग इसे असुभ जानवर मानते है। चलिए आइये इस पोस्ट में हम बिल्लियों के बारे में अधिक जानकारी इक्कठा कर के ये पता लगाये की क्या बिल्लियाँ सचमुच में असुभ हैं या फिर एक शानदार जानवर है।

बिल्ली का वैज्ञानिक नाम Felis catus ( फ़ीलिस कैटस ) है। ये हजारो सालो से इंसानों के साथ रहती आयीं हैं। आज से 4000 साल पहले पहली बार इनको Egypt में पालतू बनाया गया था

ऐसा माना जाता है की इनकी चूहों को मारने की काबिलियत से इन्सान इन्हें पालतू बनाने लगे

Egypt में तो बिल्लियों को पूजा भी जाता था और उनका mummy भी तैयार किया जाता था साथ में चूहे का भी mummy तैयार करके रखा जाता था।

बिल्ली एक स्तनधारी और मांसाहारी जानवर है जिसकी सुनने और सूंघने की छमता अतुलनीय है

बिल्लियों के बारे में कुछ रोचक तथ्य

बिल्ली रात में भी देख सकती है।

बिल्लियों की औसतन आयु 15 साल है।

बिल्लियों का शरीर बहुत ही लचीला होता है और इनका दांत छोटे जानवरों का शिकार करने के लिए बना है जैसे की चूहा।

इनकी सूंघने और सुनने की छमता काफी अचूक है। इनकी स्वाद चखने की छमता हम इंसानों से काफी कम होती है , ये मीठा स्वाद का पता नही लगा सकती क्यों की इनके पास मीठे स्वाद का taste bud है ही नही।

अपनी जिन्दगी के 70 % समय बिल्ली सोने में बिता देती है, ऐसा माना जाता है की सोकर बिल्लियाँ एनर्जी को संचित करती हैं ।

Egypt में बिल्ली को मरना अवैध था क्यों की बिल्लियाँ चूहों पर नियंत्रण रखती थी

एक बिल्ली अपने height से 6 गुना ज्यादा दुरी तक उछल सकती है और रेस में उसेन बोल्ट जैसे धावक को हरा भी सकती है

एक बिल्ली एक बार में लगभग 2 से 5 बच्चे को जन्म दे सकती है

एक पालतू बिल्ली, जंगली बिल्ली के हिसाब से आकर के छोटी होती है तथा उसका वजन लगभग 4 से 5 किलो तक हो सकता है

बिल्ली के दांत बहुत ही तेज होते हैं और इस वजह से वह अपने शिकार के गले में दांत डालकर उसके स्पाइनल कॉर्ड को क्षति पंहुचा देती है जिससे की शिकार अपाहिज होकर तुरंत मर जाता है

एक बिल्ली ऐसे चलती है ताकि उसके पैर से आवाज़ न आये

बिल्ली दिन की अपेक्षा रात में ज्यादा सक्रीय होती है

Male Cat, Female Cat को पाने के लिए अक्सर लड़ाई करते है और इसमें जीत उन्ही की होती है भरी भरकम और मजबूत होता है

मछली पानी में कैसे सांस लेती है

हम सभी फेफड़े के द्वारा हवा में साँस लेते है, फेफड़ा ऑक्सीजन को खून में मिला देता है और खून फिर पुरे शरीर में ह्रदय के द्वारा पंहुचा दिया जाता है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है की मछलियाँ ये सब पानी के अन्दर रहकर कैसे करती है ?

जिस तरह हमारे पास फेफड़ा होता है उसी तरह मछली के पास गिल होता है जिससे वह पानी में से घुला हुआ ऑक्सीजन निकालती है

गिल पानी से निकला ऑक्सीजन खून में मिला देता है और फिर यह पुरे शरीर को पहुचाया जाता है

हम मछली का गिल उसके सिर के पीछे देख सकते है , यह दिखने में झिल्लीदार स्पंज जैसा होता है

जैसा की हम जानते है की पानी ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से बना है लेकिन मछली पानी को तोड़कर ऑक्सीजन नही ले सकती क्यों की ऐसा करने के लिए बहुत एनर्जी की आवस्यकता पड़ेगी, इसके बजाये मछली पानी में घुला हुआ ऑक्सीजन लेती है

क्या सभी मछलियों के पास गिल होता है ?

हाँ और नही, क्यों की हम मानते है की ब्लू व्हेल मछली है, डॉलफिन मछली है लेकिन ये दोनों मछली नही बल्कि मैमल्स में आते हैं और दोनों ही बच्चे को जन्म देते है न की अंडे

व्हेल और डॉलफिन के पास गिल नही होता उन्हें साँस लेने के लिए पानी के ऊपर आना पड़ता है

हालाँकि सभी मछलियों में गिल पाया जाता है, (व्हेल और डॉलफिन को छोड़कर क्यूँ की ये मछली नही हैं ) लेकिन सभी मछलियाँ अपने गिल का उपयोग नही करती जैसा की Lungfish  (लंग फिश ) जो मीठे पानी में रहती है उसके पास लंग्स भी होता है, ये मछली लंग्स से साँस लेती है

अक्सर रुका हुआ पानी में घुले हुए ऑक्सीजन की मात्रा इतनी कम हो जाती है की एक मछली उसमे गिल से साँस नही ले सकती इसलिए वह अपने लंग्स का इस्तेमाल करती है और पानी के ऊपर आकर साँस लेती है

सभी मछलियों में गिल्स होता है लेकिन सभी मछलियों में लंग्स नही होता

भारतीय विशाल गिलहरी

इस गिलहरी को मालाबार विशालकाय गिलहरी भी कहा जाता है। यह भारत में पेड़ की गिलहरी की सबसे बड़ी प्रजाति है।

स्रोत: विकिपीडिया

इस गिलहरी का आकार 25.4-45.7 सेमी तक होता है और इनका वजन होता है 
1.5-2 किग्रा

वे भारत के विभिन्न राज्यों जैसे गुजरात, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं।

वे पेड़ों पर रहते हैं और सर्वाहारी हैं। वे स्वभाव से शर्मीले हैं जिससे उन्हें जंगल में ढूँढना मुस्किल हो जाता है

उनका संभोग अक्टूबर से जनवरी के महीने में शुरू होता है। 
इनका गर्भकाल अवधि 21-25 दिनों की होती है

जीवन अवधि जंगल में कम हो सकती है लेकिन इनकी अधिकतम जीवन अवधि (कैप्टिव – बंदी ) 20 वर्ष पाई गई।

स्रोत: animalpot.net

वे क्या खाते है?

चूंकि वे सर्वाहारी हैं। वे फल, नट, फूल, कीड़े, पक्षियों के अंडे का भोजन करते हैं।

वे पेड़ों में अपना आश्रय बनाते हैं और कभी-कभी एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर चले जाते हैं।

वे दो पैरों पर खड़े होकर और 2 हाथों का उपयोग करके खाते हैं। और अपने शरीर को संतुलित करने के लिए पूंछ का उपयोग भी करते हैं

वे अपने द्वारा खाए जाने वाले बीजों को फैलाते हैं, जो वनीकरण में मदद करता है।

ये एकान्त जानवर हैं जो ज्यादातर प्रजनन के समय एक साथ आते हैं।

स्रोत: सौम्यदीप चटर्जी