पेड़ व पौधों के हिन्दी व अँग्रेजी नाम

कनेर Oleander

पीला कनेर Yellow Oleander 

कंगन Ixora

मेहँदी Hennah

गुलतुर्रा Peacock Flower

दिकमाला Brilliant Gardenia

गन्धराज Jasmine

तुलसी Tulasi

लाल पत्ते Lobster Plant

रंगून की बेल Rangoon Creeper

चाँदनी Moonbeam

गुड़हल Hibiscus

हारसिंगार Tree of sorrow

कलिहारी Glory Lily

मुलता Sky Flower

बबूल Acacia

बास Bamboo

सिरस Abbizia Labbek

भोजपत्र Birch

बरगद Banyan

सागवान Teak

देवदार Cedar

रुद्राक्ष Eleocarpus

बेंत Cane

नागफनी Cactus

देवदार Fir

नारियल का पेड़ Cocoa Tree

सुपारी का पेड़ Betel Nut Tree

सेब का पेड़ Apple Tree

ककड़ी का पेड़ Bilimbi Tree

आम का पेड़ Mango Tree

खजूर का पेड़ Date Palm

अमरुद का पेड़ Guava

अँगूर की बेल Grape Vine

कटहल का पेड़ Jack Tree

सरू Cypress

सन Flax

झाऊ Conifer

आबनूस Abony

पटसन Jute

अंजीर Fig

महोगनी Mahogany

बलूत Oak

चन्दन Sandal

नील Indigo

ताड़ का पेड़ Palm Tree

धान का पौधा Paddy

चीड़ का पेड़ Pine

साल का पेड़ Saal Tree

अशोक Polyalthia

जीरा Staman

रामधन चम्पा Golden Champak

रोहिड़ा Desert Teak Tree

सहजन Drumstick Tree 

आँवला Emblica 

गोंद Gum 

बेर Jujube

नीम Neem

इमली Tamarind 

पीपल Peepal

पलाश Parrot Tree

पँजीरा Coral Tree

अर्जुन Pride of India

रगतूरा Tulip Tree

अमलतास Pudding Pipe Tree

शिवलिंगम Cannon Ball Tree

महुआ Indian Butter Tree

ताल Fan Palm

पदार्थ व इनके रासायनिक नाम

हम अपने रोजमर्रा के जिंदगी में अनेक पदार्थों का प्रयोग करते हैं। इन्हें हम सामान्य नाम से पहचानते हैं, परन्तु ये पदार्थ रसायन से युक्त होते हैं और इनके रासायनिक नाम भी होते हैं।

आज इस लेख में हम आपको कुछ उपयोगी पदार्थों के रासायनिक नाम से अवगत करवाना चाहते हैं। कुछ पदार्थों के नाम व रासायनिक नाम निम्नलिखित हैं-

नौसादर- अमोनियम क्लोराइड

द्राक्ष शर्करा (अंगूर का सत)- ग्लूकोज़

स्लेट- सिलिका एल्युमिनियम ऑक्साइड

लाल सिंदूर- लेडपर ऑक्साइड

चूना- केल्शियम ऑक्साइड

लाल दवा- पोटेशियम परमैग्नेट 

खाने का सोडा- सोडियम बाई कार्बोनेट

धोने का सोडा- सोडियम कार्बोनेट

शोरा- पोटेशियम नाईट्रेट

शोरे का अम्ल- नाइट्रिक एसिड

कास्टिक पोटाश- पोटेशियम हाइड्रोक्साइड

स्प्रिट- मैथिल एल्कोहल

बुझा चूना- कैल्शियम हाइड्रोक्साइड

लाफिंग गैस- नाइट्रस ऑक्साइड

चाक- कैल्शियम कार्बोनेट

हरा कसीस- फेरिकसल्फेट

नीला थोथा- कॉपर सल्फेट

सफेद थोथा- जिंक सल्फेट

जिप्सम- कैल्शियम सल्फेट

फिटकरी- पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट 

सुहागा- बोरैक्स

मण्ड- स्टार्च

गंधक- सल्फ्यूरिक एसिड

टी. एन. टी.- ट्राई नाइट्रो टॉल्विन

बालू रेत- सिलिकॉन ऑक्साइड

साधारण नमक- सोडियम क्लोराइड

नमक का अम्ल- हाइड्रोक्लोरिक एसिड

चीनी- सुक्रोज

हल्दी- कुर्कुमा लौंगा

संगमरमर- कैल्शियम कार्बोनेट

ब्लीचिंग पाउडर- कैल्शियम हाइपो क्लोराइट

प्लास्टर ऑफ़ पेरिस- कैल्शियम सल्फेट हाफ़ हाइड्रेट

चिली साल्टपीटर- सोडियम नाईट्रेट

चाइना व्हाइट- जिंक ऑक्साइड

मार्श गैस- मेथेन

पानी- हाइड्रोजन डाई ऑक्साइड

यूरिया- कार्बोनेट

हाइपो- सोडियम थायोसल्फेट

एल्कोहल- इथाइल एल्कोहल

गैलेना- लेड सल्फाइड

अश्रु गैस- क्लोरो एसीटो फेनोन

कंप्यूटर का उपयोग Importance of Computer Uses in our Life

कंप्यूटर क्या है, यह कैसे कार्य करता है, एवं आधुनिक समय में इसके उपयोग एवं महत्व से ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं जो अनभिज्ञ हो| घर में, ऑफिस में, शिक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में, मनोरंजन में, एवं अन्य बहुत तरह से इसका उपयोग किया जाता है एवं आज का हमारा आर्टिकल कंप्यूटर के उपयोग से सम्बंधित है|

कंप्यूटर का उपयोग:

शिक्षा के क्षेत्र में:

कंप्यूटर एवं इन्टरनेट ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना अहम योगदान दिया है| अब स्टूडेंट्स को किसी भी विषय की जानकारी एक जगह बैठे प्राप्त हो जाती है| वे कंप्यूटर के द्वारा अपने प्रोजेक्ट्स एवं असाइनमेंट तैयार कर सकते है एवं एक्सपर्ट्स की राय ले सकते है|

विभिन्न प्रकार के वेबसाइट द्वारा वे अपने ज्ञान का विस्तार कर सकते है एवं आजकल कई प्रकार के ऑनलाइन कोर्सेज एवं डिप्लोमा उपलब्ध है इसे डिजिटल लर्निंग कहा जाता है, जिससे ऑनलाइन स्टडी की जा सकती है|

चिकित्सा क्षेत्र में:

अब आपको अस्पतालों में लम्बी लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं पडती क्योकि आप कंप्यूटर के द्वारा अपनी ऑनलाइन अपॉइंटमेंट ले सकते है| आजकल कुछ वेबसाइट घर बैठे ही आपको दवाई एवं जाँच की सुविधा उपलब्ध करवाती है जो चिकित्सा के क्षेत्र में किसी क्रांति से कम नहीं|

चिकित्सक भी अब विदेश में बैठे एक्सपर्ट से किसी केस की जानकारी एवं सलाह कुछ ही मिनिट में ले सकते है| इसके साथ ही रोज आने वाले हजारो मरीजो का डाटा आसानी से मैनेज किया जा सकता है एवं जरूरत के समय ओपन किया जा सकता है|

बैंकिंग के क्षेत्र में:

क्लाइंट्स का रिकॉर्ड रखने के लिए, ऑनलाइन पैसे भेजने या प्राप्त करने के लिए, विभिन्न प्रकार के अन्य ऑफर्स एवं सुविधाए प्राप्त करना काफी आसान हो गया है| आजकल सभी बैंक में कंप्यूटर होना आम बात है|

स्पोर्ट्स में:

कंप्यूटर मानव से अधिक तेजी से कार्य करता है एवं खिलाडियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है जिसे कितनी बार भी देखा जा सकता है एवं अन्य देशों की अलग-अलग तकनीक सीखने में भी सहायता मिलती है|

बीजनेस के क्षेत्र में:

अपने बीजनेस का प्रमोशन करना, ऑनलाइन billing, पूरी दुनिया में इसे बढ़ाना आदि सब कार्य कंप्यूटर ने आसान कर दिए है| अब आप घर बैठे अपना बीजनेस या जॉब कर सकते है एवं पैसे और नाम दोनों कमा सकते है|

विज्ञानं एवं अविष्कार के क्षेत्र में:

इसके अंतर्गत दुनिया भर के वैज्ञानिक एक दूसरे से सम्पर्क में रहते हुए अपने प्रयोग एवं अनुसन्धान पर गहनता से अध्ययन कर सकते है| एक दूसरे की खोजों के बारे में जान सकते है एवं अपनी खोज की महत्वपूर्ण जानकारी सेव रख सकते है|

मौसम की जानकारी हेतु:

विभिन्न प्रकार की app कंप्यूटर में डालकर मौसम में होने वाले बदलाव का पता लगाना और भी आसान हो गया है जिससे आने वाली तबाही पर कुछ हद तक नियत्रण किया जा सकता है एवं आम जनता को संकट से बचाया जा सकता है|

मनोरंजन के लिए:

मनोरंजन के क्षेत्र में कंप्यूटर की जितनी तारीफ की जाए कम है| आप एक जगह बैठे पूरी दुनिया को अपनी स्क्रीन पर देख सकते है, विडियो गेम्स खेल सकते है, गाने सुन सकते है, अपनी रूचि से सम्बंधित गहन जानकारी प्राप्त कर सकते है, एवं पूरी दुनिया में बैठे लोगो से जुड़े रह सकते है|

डिफेन्स या रक्षा के लिए:

अपने मिशन की ख़ुफ़िया जानकारी सिक्योर रखने के लिए, दुश्मन पर नजर बनाये रखने के लिए कंप्यूटर को कैमरा के साथ जोड़ा जाता है एवं रक्षा दल के स्टाफ एवं मेम्बेर्स के डाटा को सेव रखने हेतु भी कंप्यूटर का यूज़ किया जाता है|

सरकारी कार्यों हेतु:

आजकल लगभग सभी सरकारी क्षेत्रों में कंप्यूटर का उपयोग होने लगा है| अब आप आसानी से रेल टिकेट बुक करवा सकते है, आधार कार्ड की जानकारी लेना, या पासपोर्ट अप्लाई करना आदि कार्य कर सकते है|  

वेब हॉस्टिंग सर्विसेज क्या हैं? What is Web Hosting Services?

आपकी वेबसाइट को अद्यतन या अपडेट रखने के लिए, उसमें नए आर्टिकल, ब्लॉग्स, फोटो, वीडियो आदि को दिखाने व समय-समय पर उनमें परिवर्तन करने के लिए वेबसाइट को प्रतिपल होस्ट करना होता है। उच्च स्तर पर लाने के लिए, प्रोमोशन के लिये और उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए वेबसाइट की होस्टिंग आवश्यक है। 

कई कम्पनियों द्वारा वेब हॉस्टिंग सर्विसेज उपलब्ध करवाई जाती हैं। 

वेबसाइट की हॉस्टिंग कितने तरीकों से की जाती है?

वेब हॉस्टिंग सर्विसेज के प्रकार- वेब हॉस्टिंग सर्विसेज कई तरीकों से उपलब्ध करवाई जाती है। सभी अलग-अलग सुविधाओं से युक्त होती हैं। वेब हॉस्टिंग सर्विसेज के प्रकार निम्नलिखित हैं-

शेयर्ड वेब हॉस्टिंग सर्विस- एक ही कम्प्यूटर के एक सर्वर पर अनेक वेबसाइट एक साथ एकत्र कर के रखी होती हैं। यानि कि भिन्न-भिन्न वेबसाइट ने ही सर्वर को साझा (शेयर) किया हुआ होता है। उस कम्प्यूटर के सर्वर पर जितनी वेबसाइट चल रही होती हैं, वे सब मिलकर उसके प्रॉसेसर, हार्ड डिस्क, रैम व अन्य प्रोग्राम का इस्तेमाल करती हैं। 

इस कारण से कई बार सर्वर की गति धीमी हो जाती है। किसी एक वेबसाइट के विज़िटर यदि कम या ज्यादा होते हैं या किसी वेबसाइट के पेज को खोलने वाले लोगों की संख्या कम या ज्यादा हो जाती है तो क्रमशः सर्वर की कार्य की गति भी कम या ज्यादा होगी, तो इस कारण अन्य वेबसाइट पर भी उसका प्रभाव पड़ता है। अनेक वेबसाइट का एक ही सर्वर होने के कारण ऐसा होता है। इस कारण अन्य वेब होस्टिंग सर्विसेज की तुलना में यह सर्विस कम खर्चे वाली होती है।

वर्चुअल प्राइवेट सर्वर वेब हॉस्टिंग सर्विस-  यह शेयर्ड वेब हॉस्टिंग से थोड़ी भिन्न है। इसे उदाहरण द्वारा आसानी से समझा जा सकता है, जैसे-एक मकान के पाँच कमरों में से एक कमरा आपके द्वारा खरीद लिया जाये तो उसमे रहने व उपयोग का हक आपका ही होगा। इस वेब हॉस्टिंग सर्विस में भी एक सर्वर को  विभक्त कर के कई आभासी (वर्चुअल) सर्वर का रूप दे दिया जाता है। आपकी वेबसाइट इस आभासी सर्वर में चल रही है तो इस सर्वर में अन्य कोई वेबसाइट नही शामिल की जायेगी। यानि कि आपको अपना आभासी सर्वर वेबसाइट चलाने के लिए उपलब्ध होता है। यह सुविधाजनक होता है। शेयर्ड वेब होस्टिंग की तुलना में इसमें खर्चा ज्यादा लगता है।

क्लाउड वेब हॉस्टिंग सर्विस- इसमें विभिन्न देशों के कई वेब सर्वर आपस में इंटरनेट के जरिये एक दूसरे से जुड़ कर समूह बनाते हैं। इसमें सर्वर डाउन होने की स्थिति न के बराबर होती है। इसमें यदि एक वेब सर्वर क्लाउड की गति धीमी हो जाये या कार्यशील न हो तो तुरन्त उसकी सूचना दूसरे क्लाउड सर्वर में भेज दी जाती है और आपकी वेबसाइट दूसरे क्लाउड के जरिये अपनी गति पर बनी रहती है। वेबसाइट का विस्तार अन्तर्देशीय हो तो यह काफी फायदेमंद व सुविधाजनक है और यह सर्विस महंगी होती है।

डेडिकेटेड वेब हॉस्टिंग सर्विस- डेडिकेटेड यानी समर्पित। नाम के अनुसार इस सर्विस में  सर्वर पूरी तरह से आपको समर्पित होता है, क्योंकि आपकी वेबसाइट के लिए आपको हार्ड डिस्क, रैम, प्रोसेसर के साथ एक पूर्ण सर्वर  दिया जाता है। इसमें न सर्वर को साझा किया हुआ होता है और न सर्वर के हिस्से किये होते हैं। 

इस सर्विस में वेबसाइट के पेज खोलने पर लोडिंग नही लेती। यदि आपको अपनी वेबसाइट के लिए अलग से सर्वर की आवश्यकता हो और अधिक संख्या में लोग आपकी वेबसाइट में रूचि रखते हैं तो आप इस सर्विस का चुनाव कर सकते हैं। यह आपको काफी अच्छी परफॉर्मेंस देती है, परन्तु यह सर्विस अधिक खर्चे वाली होती है। 

रिसेलर वेब हॉस्टिंग सर्विस- इसमें हॉस्टिंग कम्पनी आपको अपनी वेबसाइट की आपको संभालने का मौका प्रदान करती है। इस सर्विस में आप अपनी वेबसाइट का संचालन स्वतः कर सकते हैं। इसमें आप स्वयं अपनी वेबसाइट को होस्ट कर सकते हैं। अपनी ज्ञान क्षमता के आधार पर आप इस सर्विस का उपयोग करते हुए वेबसाइट को उच्च स्तर तक ले जा सकते हैं। 

फ्री वेब हॉस्टिंग सर्विस- कुछ कम्पनियाँ वेबसाइट की हॉस्टिंग के लिए मुफ़्त सुविधा प्रदान करवाती हैं। ये अपनी इच्छानुसार कार्य व सुविधाएँ उपलब्ध करवाती हैं|

ईमेल एड्रेस क्या होता है?

पुराने समय में अन्यत्र स्थित किसी व्यक्ति तक कोई सन्देश व सूचना प्रेषित करने के लिए पत्र, चिठ्ठी का इस्तेमाल किया जाता था। यह विलम्ब से होने वाली क्रिया थी, क्योंकि चिठ्ठी के उस व्यक्ति तक पहुँचने में ही कुछ दिनों का समय लग जाता था। परन्तु तकनीकी तरक्की के फलस्वरूप आज यह स्थिति दिखाई ही नही पड़ती और दिनों में पूरा होने वाला काम आज केवल कुछ क्षणों में पूरा हो जाता है, क्योंकि आज के समय में संवाद के अनेक स्त्रोत बन गए हैं। इनमें से ही एक स्त्रोत है- ईमेल।

सर्वप्रथम सन् 1972 में ईमेल द्वारा सन्देश प्रेषित किया गया। तब से लेकर आजतक ईमेल का प्रयोग किया जा रहा है। वर्तमान समय में तो बहुत बड़ी तादात में लोगों द्वारा ईमेल का उपयोग हो रहा है। छोटे से बड़े कार्य में सूचना व सन्देश भेजने व ग्रहण करने का एक मुख्य माध्यम ईमेल है। ईमेल का उपयोग संवाद के लिए भी किया जाता है।

ऐसा भी माना जा सकता है कि स्मार्टफोन, कम्प्यूटर व लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का अपनी एक ईमेल आई.डी. अवश्य ही होगी। यही से आप अनुमान लगा सकते हैं कि ईमेल के इस्तेमाल का स्तर काफी ऊँचा है।

यह तो सब जानते ही हैं कि ईमेल का इस्तेमाल करने के लिए ईमेल एड्रेस होना जरूरी है। ईमेल एड्रेस के बिना ईमेल व्यर्थ  है, उपयोग नही किया जा सकता।

ईमेल एड्रेस क्या होता है?

ईमेल एड्रेस के दो आधार होते हैं। पहले में नाम, जो की उपयोगकर्ता अपनी इच्छा से कुछ भी रख सकता है। यह आवश्यक नही है कि अपने वास्तविक नाम ही लिया जाये। अपने व्यवसाय, पेशे आदि का नाम भी लिया जा सकता है। नाम में अक्षरों व संख्याओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर Rahulkumar, 

Rahulcreations, Rahul1234, आई.डी. बनाते वक्त उपलब्धता के आधार पर हम नाम रख सकते हैं, क्योंकि यह यूनिक होना आवश्यक है। कई बार उपलब्धता न होने पर नाम में थोड़ा परिवर्तन भी करना पड़ता है और इस सम्बन्ध में हमारे लिए वहाँ कई विकल्प की सुविधा भी दी होती है।

ईमेल एड्रेस के दूसरे भाग में डोमेन का नाम होता है। उदाहरण के लिए gmail.comHotmailyahoo.com आदि।

ये दोनों भाग आपस में @ चिन्ह के द्वारा जुड़कर ईमेल एड्रेस बन जाते हैं। उदाहरण के लिए, rahulkumar@gmail.com।

प्रत्येक ईमेल एड्रेस यूनिक होता है। एक ही नाम का कोई ओर ईमेल एड्रेस नही होता है। इसका यूनिक होना ही व्यक्तिगत पहचान करवाता है। सूचना को सही व्यक्ति तक समय पर पहुँचाने के लिए ईमेल एड्रेस का यूनिक होना जरूरी है। 

ईमेल एड्रेस यूनिक क्यों होता है

जरा सोच कर देखिये ,यदि आप किसी को ईमेल द्वारा कुछ भेजना चाहते हैं और उस  ईमेल एड्रेस के समान ओर भी कई  ईमेल एड्रेस हो तो वह सम्बन्धित व्यक्ति के पास जाये या न जाए या समान ईमेल एड्रेस वाले सभी व्यक्तियों के पास पहुँच जाए तो गोपनीयता कायम नही रह सकती और भेजी गयी सूचना या संवाद लीक हो सकता है।

अतः यह एक पते (एड्रेस) के समान ही है, जो कि सही व यूनिक होने पर सही व्यक्ति तक सूचना भेजने में सहायक होता है। सन्देश प्रेषक व प्राप्तकर्ता दोनों का ईमेल एड्रेस होता है, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। इस प्रक्रिया में केवल कुछ क्षण का ही समय लगता है।

एक जगह से दूसरी जगह, दूसरे शहर, दूसरे देश तक ईमेल के जरिये सन्देश व सूचनाएँ भेजी व प्राप्त की जा सकती है। ईमेल एड्रेस का उपयोग आजकल बैंक, व्यवसाय, स्कूल, कॉलेज व अन्य कई कार्यों में अद्यतन रहने के लिए भी किया जाता है तथा अनेक प्रकार के खातों में लॉग इन करने के लिए ईमेल एड्रेस का उपयोग होता है।

हम कह सकते हैं कि इसका क्षेत्र व उपयोग अत्यन्त व्यापक है|

जल प्रदूषण के कारण Essay on Water Pollution: Causes and Prevention

आधुनिक समय में जल प्रदूषण अत्यंत चिंता का विषय बना हुआ है एवं इससे लड़ने के लिए कई उपाय किये भी जा रहे है| किन्तु मनुष्य को यह समझना होगा कि यह किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं अपितु सभी को प्रकृति को पहुचाये नुकसान को दूर करने के लिए सहयोग देना होगा|

यदि समय रहते जल प्रदूषण को नहीं रोका गया तो अगले कुछ वर्षों में इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध शायद पानी के लिए हो| इसलिए सबसे पहले जल प्रदूषण के कारणों का पता लगाकर उसे रोकने के उपाय किये जाने चाहिए| इसके कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार है:-

औद्योगिक व तकनीकी विकास- उद्योगों व तकनीकी कार्यविधियों के दौरान कई तरह के ठोस व द्रव अपशिष्ट निकलते हैं, जिनकी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण ये नाली से नहरों व नदियों में मिलकर जल को जहरीला बना देते हैं।

घरेलू अपशिष्ट पदार्थ- घरों से निकलने वाले कूड़े, मल-मूत्र व अन्य कचरे के नष्ट न होने के कारण यह नालियों के द्वारा जल के अन्य स्त्रोतों में मिलकर जल को दूषित करता है।

धार्मिक प्रचलन- हिंदू धर्म में पूजा सामग्री, शव, अस्थि आदि का नदियों में प्रवाह करने जैसे रिवाज भी जल प्रदूषण जी वजह बनते हैं। ऐसी धार्मिक गतिविधियों के कारण पानी गन्दा हो जाता है।

अम्ल वर्षा- अम्ल वर्षा एक प्रकार के रसायन से युक्त जल की वर्षा होती है। जहाँ कहीं भी अम्ल वर्षा होती है, उस क्षेत्र के जल स्थान में यह अम्ल मिलकर उसे रसायन से युक्त कर देता है और जल हानिकारक हो जाता है।

रासायनिक प्रयोगशाला- कुछ प्रयोगशालाओं में रसायनों के नए-नए प्रयोग किये जाते है और कहीं ऐसे उत्पादों का निर्माण किया जाता है, जिनमें भिन्न-भिन्न रसायनों का उपयोग होता है। ऐसे प्रयोगों व उत्पाद निर्माण के दौरान जो रसायन अपशिष्ट के रूप में निकलने है, वे भी बहते हुए जल में मिलकर जल प्रदूषण का कारण बनते हैं।

खेतों से निकासी- आजकल कृषि कार्य में खेती में वृद्धि के लिए रासायनिक खाद, रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जा रहा है। ये रासायनिक उत्पाद मिट्टी में मिलकर भूमि प्रदूषण करते है तथा खेतों में दिया जाने वाला पानी भी रसायन से युक्त हो जाता है और अतिरिक्त पानी आगे नालियों से निकलता हुआ नहरों में मिलकर जल को भी रसायन युक्त कर के दूषित कर देता है।

ज्ञान का अभाव- ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें जल प्रदूषण का मतलब ही नही पता, क्योंकि वे पढ़े-लिखे नही है तथा ज्ञान के विभिन्न स्त्रोतों के उपयोग से भी अछूते हैं। ऐसे लोग अपनी अज्ञानता की वजह से जल को दूषित करते जा रहे हैं और वैसे ही दूषित जल का नियमित उपयोग भी कर रहे हैं। फलस्वरूप इससे होने वाले नुकसान को भी झेल रहे हैं।

जन सामान्य की लापरवाही- अधिकतर लोग जो जल-प्रदूषण के नुकसान व कारणों से अनभिज्ञ नही हैं, लेकिन फिर भी वे लापरवाही दिखाते हुए ऐसे कार्य करते हैं जो जल को गन्दा करते हैं। जैसे नहरों के किनारे कपड़े धोना, घर का कचरा नहरों में बहाना, नदी में नहाते हुए मल-मूत्र त्याग देना व साबुन का प्रयोग करना आदि।

जल प्रदूषण के निवारण-

कारणों के ज्ञान से ही निवारण होगा। उपर्युक्त वर्णित सभी कारणों पर ध्यान देकर इन्हें कम करने या खत्म करने के प्रयास से ही जल प्रदूषण में कमी लायी जा सकती है।

समय-समय पर आम जनता को जल प्रदूषण से होने वाले खतरों से सचेत करवाने के कार्य भिन्न-भिन्न माध्यमों जैसे स्कूल, कॉलेज, नुक्कड़ कार्यक्रम, इन्टरनेट, विज्ञापन, टी.वी. आदि के द्वारा किये जाने चाहिए।

घरों, उद्योगों, प्रयोगशालाओं व प्रत्येक स्थान से अपशिष्ट की निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। 

हर व्यक्ति को अपने स्तर पर जल-प्रदूषण की रोकथाम के सुधारात्मक प्रयास करने चाहिए|

जल संरक्षण की आवश्यकता ।Essay on water conservation in Hindi

जल को दूषित होने से बचाना, जल के अनावश्यक उपयोग पर नियंत्रण, जल के व्यर्थ होने पर रोकथाम और जल का उचित उपयोग व बचाव ही जल का संरक्षण है।

प्राचीन समय में जल की गुणवत्ता उचित स्तर की होती थी तथा जल प्रदूषण के स्त्रोत नही पाये जाते थे, परन्तु आज के समय में तकनीकी व औद्योगिक विकास के फलस्वरूप जल की गुणवत्ता में निरन्तर कमी आती जा रही है और जल का दोहन भी बुरे तरीके से हो रहा है। 

कुछ लोगों की अनदेखी व लापरवाही की आदत भी जल की बर्बादी कर रही है।

आज के समय में अंधाधुंध तरीके से जल की बर्बादी की जा रही है। शुद्ध पेयजल की मात्रा निरन्तर कम होती जा रही है। कई बड़े शहरों में तो हालात ऐसे हैं कि वहाँ लोगों को पीने योग्य पानी खरीदना पड़ रहा है, क्योंकि सड़कों पर लगे नल, कुओं, हैंडपम्प का पानी दूषित है व पीने योग्य नही है। नहरों व नदियों का जल स्तर भी घट रहा है और शुद्ध जल की मात्रा में गिरावट आ रही है।

एक अनुमान के अनुसार जब एक नल से बूँद टपकती रहती है तो गणना में एक मिनट में 30 बूँद गिरती है और एक साल में 46 हजार लीटर पानी की बर्बादी होती है।

यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति प्रतीत होती है। इस प्रकार आप जान सकते हैं कि जल की एक बूँद की भी कीमती होती है। 

यदि जल का बचाव व संरक्षण न हो, सुरक्षित न रखा जाए तो इससे कई संकट पैदा हो सकते हैं, जो अत्यन्त दुष्प्रभावी हो सकते हैं। 

आगे इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि जल का संरक्षण करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है? 

क्यों अनिवार्य है जल सरंक्षण?

कृषि कार्य- अन्न का स्त्रोत कृषि कार्य पर भी निर्भर करता है। जल के दुरूपयोग के साथ  संरक्षण की अनदेखी हमारी कृषि पर भारी पड़ सकती है। यदि जल नही होगा तो खेती नही होगी और फसलों की पैदावार नही होगी। जल के अभाव में फसलें सूखकर नष्ट हो जायेगी। अब जरा सोच कर देखिये बिना अन्न के मनुष्य खायेगा क्या और कितने समय तक जीवित रहेगा। 

शारीरिक महत्व- जल को दूषित करना, पेयजल की बर्बादी, जल में अस्वच्छता पैदा होने से पीने योग्य पानी में कमी आएगी और गन्दे पानी के सेवन से शरीर में कई तरह के विकार उत्पन्न होते हैं। त्वचा सम्बन्धी, पेट के रोग, पाचन गड़बड़ी आदि हो जाते हैं। इस प्रकार मनुष्य को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए जल संरक्षण के लिए उचित प्रयास करते रहना चाहिए, ताकि वे स्वयं तथा उनकी भावी पीढ़ियों को जल अभाव में बुरी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। 

प्राकृतिक आपदाओं से बचाव- ग्लोबल वार्मिंग आज के समय में संकट का चर्चित विषय बना हुआ है। जल का संरक्षण न होने से ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ अन्य संकट जैसे सूखा, वर्षा में कमी, तापमान में वृद्धि आदि अनेक आपदाएँ आ सकती है। ऐसी आपदाओं के परिणाम के बारे में बताने की तो आवश्यकता ही नही है, क्योंकि आप इनसे अनभिज्ञ तो नही हैं। 

इस प्रकार आप अनुमान लगा सकते हैं कि जल का संरक्षण करना हमारे लिए अत्यन्त आवश्यक है। यदि मानव जीवनकाल में विकास करना है तो प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी माध्यम से जल संरक्षण का कार्य करना चाहिए। हमारे द्वारा किया गया जल का संरक्षण स्वयं का व आगे आने वाली नयी पीढ़ी के हित का भी संरक्षण सिद्ध होगा।

आज की गयी लापरवाही घातक हो सकती है। अतः जितना हो सके जल संरक्षण की युक्तियाँ अपनाई जानी चाहिए तथा दूसरों को भी जल संरक्षण के कार्य के लिए प्रेरित करना चाहिए। यह सुधार के पथ पर आगे ले जायेगा|

संचार Communication क्या है?

संचार या communication शब्द का साधारण भाषा में अर्थ है, अपने विचारो या भावों का किसी अन्य व्यक्ति से आदान-प्रदान करना अथवा किसी सूचना या मेसेज को एक से दूसरी जगह प्रेषित करना या भेजना संचार कहलाता है|

किसी भी सूचना का तभी उपयोग है जब वह किसी दूसरे तक भेजी जाती है|

जिस प्रकार एक व्यक्ति भोजन करता है, सोता है, उसी प्रकार बोलना एवं अपने विचारों को व्यक्त करना जिन्दगी की आवश्यक प्रक्रिया है|

संचारण की प्रक्रिया के दौरान एक व्यक्ति sender अर्थात सूचना भेजने वाला एवं दूसरा व्यक्ति reciever यानी सूचना ग्रहण करने वाला होता है|

संचार की परिभाषा एवं प्रक्रिया के सम्बन्ध में अलग-अलग विद्वानों के अलग-अलग मत है किन्तु सभी का सार यही है कि इसमें विचारों, सूचनाओं, एवं भावों का आदान-प्रदान किया जाता है|

संचार प्रक्रिया के प्रकार:

संचार प्रक्रिया के मुख्य रूप से चार प्रकार होते है:-

Intrapersonal communication या अंत: वैयक्तिक संचार:

संचार करने की यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत व्यक्ति स्वयं से संचार करता है| इसमें व्यक्ति खुद से विचार विमर्श करता है एवं विभिन्न प्रकार के निष्कर्ष निकालता है|

Interpersonal communication अंतर वैयक्तिक संचार:

संचार की इस प्रक्रिया के अंतर्गत इसमें दो लोग शामिल होते है जो आपस में विचारों, भावों एवं सूचनाओं का एक्सचेंज करते है| संचार करने का यह अच्छा तरीका है क्योकि इसमें दूसरे की सहमति या राय जानी जा सकती है|

जन संचार Mass communication:

इस प्रक्रिया में संचार को जन तक पहुचाने के लिए TV, रेडियो, मोबाइल, इन्टरनेट, आदि का इस्तेमाल किया जाता है| वर्तमान समय में संचार का यह सबसे प्रसिद्ध तरीका बन गया है| इसके अंतर्गत पूरी दुनिया से जानकारी एवं तत्कालीन होने वाली घटनाओं का पता लगाया जा सकता है|

समूह संचार Group communication:

जैसा कि नाम से पता लग रहा है कि इसमें संचार की प्रक्रिया एक ग्रुप में होती है जिसमे कई लोग शामिल होते है| व्यक्तित्व के विकास के लिए एवं संचार को गहनपूर्ण बनाने के लिए यह प्रक्रिया कारगर साबित होती है|

Communication & Technology:

संचार मानव जीवन का इतना महत्वपूर्ण अंग है कि इसे प्रभावी एवं तीव्र बनाने के लिए हमने कितने उपकरण खोज डाले जिसमे से सेटलाइट, मोबाइल, इन्टरनेट आदि आते है एवं इन्ही प्रयासों ने सूचना क्रांति एवं प्रोद्योगिकी को जन्म दिया| इसी के कारण कम से कम समय में एवं कम खर्च में बिना कही जाए किसी से भी संचार किया जा सकता है|

संचार के कंपोनेंट्स या घटक:

डाटा अथवा उपयोगी सूचना को एक स्थान से दूसरे तक सम्प्रेषित करने के लिए कुछ माध्यम या डिवाइस का प्रयोग किया जाता है जो सही समय पर सही जगह उस सूचना को पहुचाने का कार्य करते है| इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए संचार के घटकों को जानना अनिवार्य है जो इस प्रकार है:-

सन्देश:

इसमें वो सभी डाटा, इनफार्मेशन, एवं सूचना आती है जो आप किसी को भेजना चाहते है| यह डाटा ऑडियो, विडियो, आंकड़े, टेक्स्ट, फाइल आदि किसी भी रूप में हो सकता है|

प्रेषक या Sender:

sender वह व्यक्ति होता है जो सन्देश को आगे भेजता है एवं उसे इस बात का पता होता है कि उसे किसे, कितना, कब, कहाँ, और क्या डाटा भेजना है|

माध्यम:

Medium या माध्यम सन्देश को भेजने में सहायता करता है एवं वह कुछ भी हो सकता है जैसे कि फैक्स, टेक्स्ट मेसेज, विडिओ, प्रिंट, या एक पोस्टमैन भी संचार के माध्यम के अंतर्गत आता है|

प्राप्तकर्ता या Reciever:

सन्देश या डाटा प्राप्त करने वाली डिवाइस या व्यक्ति प्राप्तकर्ता कहलाता है जो भेजे गये डाटा को receive करता है|

प्रोटोकॉल:    

इसका कार्य भेजे गये डाटा को मैनेज करना होता है एवं इससे संचार की प्रकिया को कारगर बनाने में सहायता मिलती है| असल में यह रूल्स का एक समूह होता है जो reciever को आपकी बात समझाने का कार्य करता है|

ग्लोबल वार्मिंग कारण व उपाय (Global Warming: Causes and Remedy)

ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ है भूमण्डलीय ऊष्मीकरण। साधारण तौर पर पृथ्वी पर तापमान की निरन्तर होती वृद्धि को ही ग्लोबल वॉर्मिंग कहते हैं।

पृथ्वी पर ताप प्राप्ति का मुख्य स्त्रोत सूर्य है। सूर्य से आने वाली सौर किरणों पर ही पृथ्वी का तापमान कायम है। ये किरणें कई मण्डलों से गुजरती हुई पृथ्वी के तल तक पहुंचती है और वहीं से टकराकर परावर्तन के कारण वापिस चली जाती है। 

चूँकि यह तो सर्वविदित ही है कि पृथ्वी पर जलवायु व तापमान की विविधता पायी जाती है। एक ही समय में प्रत्येक क्षेत्र की जलवायु एक समान नही रहती है। 

परन्तु बीते कुछ वर्षों में जलवायु व तापमान में असामान्य रूप से परिवर्तन नजर आये हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के तापमान में तुलनात्मक रूप से निरन्तर वृद्धि होती जा रही है। कुछ लोगों द्वारा यह भी कहा गया है कि सूर्य की स्थिति परिवर्तित होकर यह धीरे-धीरे पृथ्वी के नजदीक आता जा रहा है, जिससे तापमान में वृद्धि हो रही है। इस तरह  बहुत सी बाते सामने आयी हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण क्या हैं

ग्लोबल वार्मिंग होने का मुख्य निम्न आधार है- 

ग्रीन हाउस गैस- ग्रीन हाउस गैस तापमान में नियन्त्रण बनाये रखती है जिसके अंतर्गत कार्बन डाई ऑक्साइड, मिथेन, आदि गैस शामिल है किन्तु वर्तमान समय में इन गैसेस में वृद्धि होने के कारण तापमान तेजी से बढने लगा है एवं जलवायु में भी तीव्रता से परिवर्तन आया है|कुछ आंकड़ो के अनुसार पिछले कुछ 15 से 20 वर्षो में Co2 का वातावरण में उत्सर्जन 40 से 50% तक बढ़ गया है इसलिए ग्लेशियर तेजी से पिघलते जा रहे है एवं मौसम में बदलाव आया है| 

प्रदूषण- जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, विकिरण प्रदूषण आदि से भी पृथ्वी पर तापमान बढ़ता है। वातावरण प्रदूषण से वर्षा में कमी आती है तथा जहरीली गैसें तापमान का सन्तुलन बिगाड़ती हैं। ताप वृद्धि से ग्लेशियर पिछलने के कारण जलवायु में गड़बड़ पैदा होती है। 

पेड़ों का कटाव-

पेड़ों के कटाव से ऑक्सीजन में कमी आती है और कार्बन डाई ऑक्साइड बढ़ती है, जो कि ग्रीन हाउस गैस में वृद्धि का कारण बनता है। वर्षा में कमी का कारण भी पेड़ों की कटाई है। हरियाली न होने के कारण वायु अशुद्ध व गर्म हो जाती है। ये सब तापमान में बढ़ोतरी करते हैं।

तकनीकीकरण- मशीनों का विकास, कारखाने, वाहन आदि के प्रयोग से वातावरण में अशुद्धता आती है। इसी के साथ एयरकंडीशनर, फ्रीज,कोल्ड स्टोर आदि से निकलने वाली गैसें अत्यधिक हानिकारक होने के साथ-साथ ग्रीन हाउस प्रभाव पैदा करती है तथा तापमान में वृद्धि का कारण बनती हैं।

जनसंख्या वृद्धि- जनसंख्या वृद्धि से अनगिनत समस्याएं पैदा होती हैं। जैसे-जैसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे शहरीकरण बढ़ रहा है, जिससे पेड़ों की कटाई की जा रही है। वाहनों, मशीनों, एयरकंडीशनर, फ्रीज आदि सब का प्रयोग बढ़ रहा है और प्रदूषण भी बढ़ रहा है।

उपर्युक्त सभी कारणों से ग्लोबल वार्मिंग की दर बढ़ती जा रही है।

ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के उपाय-

ग्लोबल वार्मिंग के कारणों पर गौर करके इस पर नियंत्रण करने के लिए कुछ उपाय किये जा सकते हैं। 

ग्रीन हाउस गैस के प्रभाव को बढ़ाने वाले साधनों के प्रयोग पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। एयरकंडीशनर, फ्रीज़ आदि के उपयोग में कमी आने से दूषित गैसों की मात्रा में भी कमी आएगी। 

पेड़ों को काटा नही जाना चाहिए, क्योंकि पेड़ों के कटने के ग्लोबल वार्मिंग के अतिरिक्त अन्य कई खतरे पैदा होते हैं। जनसंख्या नियंत्रण के उचित प्रयास कर कई सुधार हो सकते हैं।

अन्ततः जब तक प्रत्येक व्यक्ति को ग्लोबल वार्मिंग के खतरों का ज्ञान न हो तब तक सभी प्रयास नाकामयाब रहेंगे। अतः आम जनता को ग्लोबल वार्मिंग से होने वाले नुकसान के बारे में अवगत करवाया  जाना चाहिए। इस हेतु स्कूलों में विद्यार्थियों को इसका ज्ञान दिया जाना चाहिए तथा जन चेतना कार्यक्रम के तहत सामान्य लोगों तक ज्ञान पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि हर व्यक्ति अपनी इच्छा से इस खतरे को कम करने के लिए प्रयासरत रहें|

पर्यावरण की परिभाषाएं और अर्थ (Definitions and meaning of the Environment)

साधारण शब्दों में यदि कहे तो हमारे चारों तरफ का जो वातावरण है, जिसमे सभी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, प्रकृति, मनुष्य, हवा, पानी, मिटटी आदि तत्व सम्मिलित हो उसे पर्यावरण कहा जाता है|

अंग्रेजी भाषा में पर्यावरण को Environment कहा जाता है जो फ्रेंच भाषा के Environs से लेकर परिष्कृत किया गया है जिसका अर्थ होता है आस-पास या वातावरण|

हिन्दी भाषा में पर्यावरण शब्द दो शब्दों के संयोजन से मिलकर बना है जो है, परि+आवरण| इसमें परि शब्द का अर्थ है हमारे चारों ओर एवं आवरण शब्द का अर्थ है, ढका हुआ अर्थात ऐसा जो हमे चारों ओर से घेरे हुए है या ढके हुए है उसे पर्यावरण कहा जाता है|

पर्यावरण के अंतर्गत वे सभी संजीव एवं निर्जीव चीजे शामिल है जिन्हें हम अपने आस-पास देखते है| मनुष्य को इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है जो पर्यावरण को सबसे अधिक प्रभावित करता है|

आज के आधुनिक युग में पर्यावरण एक सोच का विषय बना हुआ है क्योकि जिस वातावरण में हम जीते है सांस लेते है आज वही विभिन्न प्रकार से प्रदूषित हो चुका है एवं समस्त पृथ्वी पर इसके सम्बन्ध में फैसले लिए जा रहे है कि कैसे पर्यावरण को नुकसान से बचाया जाये क्योकि यदि यही साफ़ नहीं होगा तो जीवित प्राणियों का विनाश सम्भव है|   

पर्यावरण के प्रकार:

मोटे तौर पर पर्यावरण की परिभाषा हम सभी जानते होंगे किन्तु भली प्रकार जानने के लिए इसके प्रकार समझने होंगे| वैसे तो इसके बहुत प्रकार है किन्तु मुख्य रूप से इसे तीन भागों में बांटा गया है जो इस प्रकार है:-

प्राकृतिक पर्यावरण:

प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत प्रकाश, हवा, पानी, मिटटी, पौधे, ऊष्मा, खाद्य वस्तुएं, खनिज, ज्वालामुखी, जंगल, नदियाँ, पहाड़ आदि सभी सम्मिलित है| ये सभी मनुष्य एवं अन्य संजीवो पर अपना प्रभाव डालती है एवं उसे अच्छे एवं बूरे दोनों तरफ से प्रभावित करती है|

जैविक पर्यावरण:

जैविक पर्यावरण के भी दो प्रकार है जिसमे सभी जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधे एवं वनस्पति सम्मिलित है| इसमें ऐसा माना जाता है कि प्रत्येक प्राणी अथवा वनस्पति किसी न किसी रूप में अन्य को प्रभावित करती है|

इस प्रकार में वनस्पति पर्यावरण एवं जन्तु पर्यावरण दोनों आते है| चूँकि ये दोनों ही पर्यावरण के मुख्य अंग है एवं मनुष्य से भी आन्तरिक एवं बाहरी रूप से जुड़े हुए है|

मनो-सामाजिक पर्यावरण:

पर्यावरण का यह प्रकार सीधा प्रकृति से सम्बंधित न होकर मनुष्य के आस-पास के पड़ोस, उसके अन्य संबंधों से जुड़ा हुआ है, जिसमे उसके रहन-सहन, भाषा, पहनावा, आदि का अध्ययन किया जाता है|

पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कारण:

जैसा कि सर्वविदित है कि पर्यावरण को प्रदूषित करने में मनुष्य का सबसे बड़ा योगदान रहा है| दिन-प्रतिदिन होने वाली वृक्षों की कटाई एवं अपने स्वार्थ के लिए जीव-जन्तुओ को हानि पहुचने के कारण पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ा है|

रोज कारखानों से जहरीली गैसे एवं अपशिष्ट पदार्थ का निष्कासन किया जाता है जिससे जल एवं वायु प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है एवं पीने के पानी एवं हवा के खराब होने से विभिन्न प्रकार के असाध्य रोग पैदा होते है|

आज के समय में विकर्णीय प्रदूषण फैलता जा रहा है जिसमे से हानिकारक रेडियोएक्टिव किरने निकलती है जो अप्रत्यक्ष रूप से जीवित प्राणियों को नुकसान पहुचाती है| रोज नये-नये उपकरण खोजे जा रहे है एवं इन्टरनेट के प्रयोग को और आधुनिक बनाने के लिए कभी 3G, 4G, और अब 5G की खोज ने सभी प्राणियों के लिए संकट पैदा किया हुआ है|

पर्यावरण की महत्ता:

पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता सबसे ज्यादा आवश्यक है| मनुष्य एक बुद्धिमान प्राणी है एवं उसे अन्य जीवों से ज्यादा ज्ञान है| इतना तो मनुष्य को जागरूक बनना होगा कि जहा वह रहता है, खाता है, सांस लेता है, उसे सुरक्षित रखे|

How Tesla Autopilot works

Modern time is an era of technology. Tesla autopilots are very helpful in the reduction of accident ratio nearby 50%. Tesla autopilot has autonomous features. It is a driver-less technology.

Tesla autopilot works with the sensor system. It has auto-steering system that controls the steering wheel. A car is internally covered by the many sensors in Tesla autopilot. This system includes a camera, radar, GPS, Ultrasonic Sonar, auto-brakes, and other sensors.

These all help to move the car automatically. These sensors have the capacity to sense every movement surrounding 16 feet distance from car. Tesla autopilot system has one more quality of self car parking in a parallel position and perpendicular position.

Tesla autopilot system is useful only when a car runs on the highway because roads and streets of cities are heavily rushed.

How to activate the autopilot?

If we want a car to move it then first of all, we have to activate autopilot mode.

For activation just pull the stalk twice. After activation car will be able to change lanes, auto-breaking controls speed and other activities.

About the camera:

The forward facing camera is just like the eye of the car and it is set on the windshield. All system is computerized and the camera works automatically to see traffic ahead of the car.

Radar:

The radar of Tesla autopilot has the capacity to look forward about 500 feet away from the car. Elon Musk, the founder of Tesla autopilot said that radar can see through the sand, rain, and fog. Radar also helps to detect traffic around the car.

Ultrasonic Sonar:

The ultrasonic sonar helps to observe some objects near the car like animals, children, barriers, etc. It will be also helpful when it’s very dark or less lighting on the road.

GPS:

As you all know about it very well. GPS or Global Positioning System helps to locate the car on anywhere. It is also a navigation system.

Cruise control system:

Tesla autopilot has advance software of driver-less technology. Cameras, radars and all sensors of this system adjust the car speed according to the traffic. Tesla system also examines the position of other vehicles around the car and manages every activity needed on the highway. 

About Tesla autopilot

Here we want you to know about the Tesla Autopilot from the beginning. 

Mr. Elon Musk is known as the founder of Tesla Autopilot System.

In October 2014, two types of Tesla models released, these are the initial versions- Tesla Model S and Tesla Model X.

In October 2015, the new version of Tesla was announced that is called Tesla 7.0.

After that, Elon Musk released a new version of Tesla autopilot in august 2016, it is Tesla autopilot 8.0. Later in the year 2016 a model 8.1 also announced as an enhanced model and extra features. It has more convenient and advanced technical features.

Nowadays many drivers are using Tesla autopilot system on highways. It prevents to stick behind the slow speed vehicles and makes our travel easy and fast. Auto steering system controls the steering wheel itself and it also has a lane-changing system so car changes lanes without the help of a driver.

Here you must notice that Tesla autopilot system wouldn’t work when it is not enabled and signs of roads are unclear. It doesn’t work perfectly in the residential area and urban streets. 

In some situations, driver must pay attention to the car. 

There is an awesome quality in it that if the autopilot system is unable in self-controlling and the driver doesn’t take it under control then it gives audible and visual indications to the drivers. Drivers must be aware, if he is careless and couldn’t get alerts then it can cause an accident.  

How Lithium-ion Battery Works

If you are using a laptop, iPod, a mobile, or an Mp3 player or a PDAs then you must know that these all devices include lithium-ion battery with rechargeable advantage. These batteries efficiently work well and provide power to our gadgets that runs for a long time.    

Nowadays it is breaking news that lithium-ion batteries extremely burst and injured people that is a minus point of the batteries but it happens twice or thrice into millions of cases.

We would surely credit the person for discovering the lithium ion concept and his name was Gilbert Lewis and these batteries are popular since 1991. Now we must understand the concept that how lithium-ion battery works and they are so much powerful and energetic so let’s have a closer look at that:-

The working procedure of lithium-ion batteries:

Like any other ordinary battery lithium-ion battery also contains multiple power-building boxes that are known as cells. Each cell has three modules one is a negative electrode, second is, a positive electrode and the third one is, an electrolyte that is a chemical present between negative and positive electrode. It is also called separator.

The positive part is made off lithium-ion phosphate or lithium cobalt oxide and the negative part is made of carbon.        

When the batteries set up for charging the positive part gives some electrodes to the negative part that floats through the electrolytes.

The battery store up this energy and lithium is a powerful component that can store power for a long time.   

When the battery gets discharged, the lithium-ion moves through lithium cobalt oxide from carbon.

Each cell of lithium battery generates 3.7 volts and this is quite powerful that is also needed to charge the batteries fast.

Sometimes your device or gadget becomes hot during charging, in that case, you must avoid the start the devices or there can be a short circuit or severe damage can happen.

The movements of lithium-ion batteries are connected with each other if one movement stops working the other will automatically stop. That’s why whenever you switch off the phone the electrons stops and instantly the ions stop as well.

Benefits of lithium-ion batteries:

The lithium-ion batters are light-weighted and many efficient batteries and they are less harmful for our environment.

These batteries are far better that those old nickel-metal batteries that were very heavy.

Lithium-ion batteries never suffer from memory effect means whenever you lose charging you can easily charge them up.      

These batteries can face numbers of charging and discharging periods without any extra damage and they work for a long time.

Disadvantages of lithium-ion battery:

It has been seen is some cases that lithium-ion batteries can work better for 3 to 4 years and after that, they start losing their power storing ability.

These batteries are very sensitive to heat and can burst into flame that is one of the most dangerous parts of lithium-ion batteries.

If you leave this battery uncharged for a long time then it can be ruined properly and you will have to buy a new one.

Conclusion:

Lithium-ion batteries have been used in various field and they have transformed the technology by providing a long-lasting battery back-up to our devices. Like any other technology it has also pros and cons and there are many researches are under revision to reduce the negative effects of lithium-ion batteries.

Try to avoid excess charging of batteries and whenever you feel that device is hot due to batteries leave it for some time and let it cool down and use your gadget.   We hope now you understand how these batteries used and how they work.

How Microwave Works

Microwave ovens are reckoned as one of the great inventions of the 20th century and it has eased up our life and the domestic chores that often takes a lot of time. You just have to press some few buttons and set the temperature and the food cooks in a few minutes.

The microwave working procedure depends on radio waves and when they launched first in the 1970’s they rock the modern kitchens and people liked them so much.

In this article, we would discuss microwaves technology, how they work and many more interesting things so stay tuned with us and check out the whole details.

The technique behind Microwave:

To heat up the meal and form cooking it properly the microwaves have been used through radiation. The radiation spread around the food and even cooks small molecules.   

The electromagnetic waves can work throughout in a small area as the microwaves are designed. Commonly a basic microwave oven uses 2.45 gigahertz frequency to cook food.

These electromagnetic waves are absorbed by sugar water and fat and after a few seconds converted into heat. These waves don’t affect a ceramic and plastic utensil that’s why we use them rather than metallic bowls.  

How does microwave works:

Microwave made from sturdy metal material and there is a small generator has been installed to produce microwaves known as a magnetron. When you switch on the microwave instantly magnetron fetch power from the circuit and starts heats up the microwave with spreading waves around the metallic box via a wave-guide.

As we know that you keep your food at a spinning glass plate and it rotates so the food can evenly cook from every side.

The tiny waves enter into the food and heat and cook its small particles well. The microwaves are very fast and their speed helps to heat the food fast and well.

Normally, the inside air of the microwave is like normal room temperature and if you want a crust on your pastries or baking items then you have to use cardboard to get it as the experts use it.

Microwave can’t enter into the thick layer and works efficiently with 1 inch. If you are thinking about cooking something bigger and thicker like a meat piece then the outer layer will be cooked but the inner part would be raw.

Generally, people cook small portions of their food because they know the fact well.

Are microwave are safe to use:    

   

Yes, this is a big true that microwave ovens are a far better and efficient way to cook food compared to a conventional oven.

There is a metallic grid has been installed with holes in the microwave and you can see it that works like a protective shield and locked up the waves inside the microwave.

It comes with a sensor and interlock and when your food is ready it give an indication with a buzzer fixed with the magnetron.  

In any case of any leaking or the door is not closed properly, the microwave stops working but never harm you.

Conclusion:

The tiny metallic box is really stunning and efficient to cook food. Our ancestors must be very happy if they had seen it before. The food that takes hours in cooking and takes a lot of energy and time can be cooked in minutes.

Now there are many modern and smart microwaves are launched in the industry that works on sensors and are very safe to use.

We hope now you know how a microwave works and whenever you will see this in your kitchen you will feel acquainted with it.    

How Jet Ski works

Jet skies are the most favorable things to have amazing and adventure water activities and they float like a pro on the water and people who love speed they never want to miss the Jet Ski experience. 

Lifeguards use Jet Ski at the sea line to save people’s life. It is also known as PWC or personal watercraft and it is totally different from any regular boat though it works on a powerful jet engine that pushes the water behind and moves speedily the Jet Ski. 

Now you must be curious to know how Jet Ski works.

Well, in this article, we will describe the whole procedure that will project the whole scene of Jet Ski working way so let’s have a closer look at that. 

Newton’s law: 

The law of Newton works behind the technology of PWC and without knowing Newton’s science one can’t understand how Jet Ski works. 

In 1666, Newton explained three laws of motion and described how things move forward and according to his third law, when a particular force pulls or pushes anything with a great energy simultaneously the other thing pushes or pulls the opposite thing and you must know that this is very confusing and this law also known as action and reaction law. 

Action and Reaction: 

It sounds contradictory but it is true as well.  A jet ski is a heavy motorbike and it needs such force to move forward. A small sized pump has been installed to a PWC that is called Impeller. When you start the motor this pump sucks enough water below the craft and generates a force that pulls the Jet Ski.  

When you start a jet ski the big intake grate sucks the water with a force fixed to the bottom of the PWC. A traditional jet ski or PWC has all these parts available only the outer design can be different.  

This power has been provided by a powerful engine with four cylinders and four strokes and a branded PWC can have 1500 engine with 20 gallons fuel tank. The fuel tank must be huge so whenever you are stuck in the ocean it never faces any emergency situation. 

As we drive a car or a bike it has an engine so as a PWC has an impeller with pipes that sucks excess water and through the pipes with the help of gasoline engine and blow it out.  

aerial aqua jet ski in the europe city sea bay near the coast

There are three sturdy blades attached with an impeller and these blades also help to cool down the engine. Each blade is 5 inches long and sucks water efficiently. There is a nozzle has been fixed behind the jet ski for exiting the water and it also provides flexibility and speed to a jet ski.  

Installing the nozzles behind a PWC is a smarter way to get the excess water intake and throw this out.  

Handling a jet ski is similar to steering a car or a bike all you have to notice that you are steering on the water not on the road and the other noticeable point of steering a PWC is that it floats superbly in the speed.  

Now there are many tremendous and powerful Jet Ski available but their working procedure is the same except little changes in their engine or impeller system. 

The branded and most used PWC were invented in 1960 and the only inventor was ‘Clayton J. Jacobson’ must be credited for inventing it.  

We hope now you know how a jet ski works.  If you still have any doubt or any question regarding this then feel free to ask us and we will try to help you out stay connected with us for more interesting information.