हम मोटे कैसे हो जाते हैं

हम मोटे कैसे हो जाते हैं ? क्या आपने कभी सोचा है। हममे से कई लोग मोटापे के शिकार हैं। पुरुषो में पेट निकलने की समस्या है।

चलिए हम सारी प्रकिरिया को समझते हैं की हमारा शरीर आखिर फैट बनता क्यों है। उसे जमा क्यों करता है और हम अंत में ये भी पता लगाएंगे  की हम मोटे कैसे हो जाते हैं।

जब हम खाना  खाते हैं तो उसमे कार्बोहायड्रेट , विटामिन , प्रोटीन और मिनिरल्स होता है। चावल और गेहू में कार्बोहायड्रेट ज्यादा पाया जाता है।  कार्बोहायड्रेट हमारे शरीर की  एनर्जी की  जरूरत को पूरा करता है। हमारे दिमाग की कोशिकाओं को कार्बोहायड्रेट फैट से ज्यादा पसंद है। इसलिए खाने में कार्बोहायड्रेट होना जरूरी है। लेकिन कार्बोहायड्रेट उतना ही ले जितना आपके शरीर के आवश्यकता है।

 

कार्बोहायड्रेट में ग्लूकोस होता है जब हम कार्बोहायड्रेट जैसे चावल खाते हैं तो हमारा शरीर कार्बोहायड्रेट को तोड़कर शुगर (ग्लूकोस ) में बदल देता है। और उसी समय इन्सुलिन हॉर्मोन निकलता है। इन्सुलिन पैंक्रियास द्वारा बनाया जाता है। पैंक्रियास को हम अग्न्याशय भी बोलते है हिंदी में। 

हमारे शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोस की आवश्यकता पड़ती है एनर्जी बनाने के लिए।

ग्लूकोस को पचाने के लिए हमारी कोशिकाओं को इन्सुलिन की आवश्कता पड़ती है।  जब हम कार्बोहायड्रेट से भरपूर खाना खाते  है तो  वह पचकर ग्लूकोस में बदल जाता है और हमारी छोटी आंत ग्लूकोस को खून में मिला देती है। जब ग्लूकोस खून में मिलता है तो हमारे खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है और इसी समय इन्सुलिन निकलता है।

इन्सुलिन फिर हमारी कोशिकाओं को खून से शुगर यानि की ग्लूकोस लेने का सन्देश देता है। इन्सुलिन हमारे खून के  शुगर की मात्रा को नियंत्रण में रखता है।

जब हमारे खून में  ग्लूकोस जरूरत से ज्यादा हो जाता है तो इन्सुलिन शरीर को ये सन्देश देता है की ग्लूकोस को लिवर में एकत्रित कर लिया जाये। ये एकत्रित शुगर तब तक दुबारा रक्तप्रवाह में नहीं मिलता जब तक खून में शुगर का लेवल काम नहीं हो जाता।

कोशिकाओं के अंदर ग्लूकोस जलकर हीट (गर्मी ) और एडेनोसीन त्रिफॉस्फेटे ATP में बदल जाता है।

माइटोकांड्रिया में ऑक्सीजन के रहते हुआ ग्लूकोस एनर्जी में बदल जाता है।

माइटोकांड्रिया हर कोशिकाओं में पाया जाता है।  जब हमारे खाने में कार्बोहायड्रेट के साथ साथ फैट यानि तेल भी होता है तो बॉडी उसे यूज़ नहीं करता बल्कि डायरेक्टली उसे फैट सेल्स में स्टोर करके रख लेता है भविस्य में यूज़ करने के लिए।

जब  हम जरूरत से ज्यादा कार्बोहायड्रेट ले लेते है तो हमारा लिवर उसे ग्लाइकोजन में बदल देता है। ग्लाइकोजन लिवर और मसल की कोशिकाओं में स्टोर हो जाता है।  जब हमारी रक्त कोशिकाओं में (खून में ) शुगर की मात्रा काम हो जाती है तो हमारा शरीर इसी ग्लाइकोजन का इस्तेमाल एनर्जी बनाने के लिए करने लगता है। अगर हम दिन में अगर दो बार खाते है तो बिच के समय में हमारा शरीर ग्लाइकोजन का यूज़ करता है और हम एनेर्जीलेस फील नहीं करते।

ग्लाइकोजन की वजह से हमे हर समय खाना खाने की जरूरत नहीं पड़ती।

अब अगर हम अपने शरीर को और भी ज्यादा कार्ब्स दे दे ग्लाइकोजन के रहते हुए भी तो वो परमानेंट स्टोरेज में फैट बन कर चला जाता है। ये प्रक्रिया लिवर में होता है जहा जरूरत से ज्यादा कार्ब्स फैट में बदल जाते है और यही से हमारे मोटापे की शुरुआत होती है। हम अगर एनर्जी यूज़ नहीं करे बस खाते रहे तो जल्द ही मोटे हो जायेंगे ।

लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की हमे कार्बोहायड्रेट खाना बंद कर देना चाहिए। कार्बोहायड्रेट हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक है इसलिए जरूर खाये।

 

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