हम जम्हाई क्यों लेते हैं

हम जम्हाई क्यों लेते हैं? जम्हाई का यूँ तो कोई सटीक वैज्ञानिक कारण नहीं बताया गया है, पर अमूमन ये शारीरक थकान या निद्रा को दर्शाता है। जब हम जम्हाई लेते है, तो मुंह खोलते है और सांस अंदर लेते है जिसके कारण शरीर के अंदर क्षणिक तरोताज़गी का एहसास होता है। परन्तु निरंतर जम्हाई लेना अच्छा संकेत नहीं होता है। इसका मतलब हम भरपूर नींद नहीं ले रहे है। कहते है जम्हाई को शरीर में आक्सीजन की कमी होने की प्रतिक्रिया भी माना जाता है, इसीलिए मुंह खोल जब हम आक्सीजन अंदर भरते है तो शिथिल शरीर में सक्रियता का संचार जान पड़ता है।

जम्हाई छोटी या कुछ सेकंड तक चलने वाली होती है। पर अगर हम औसतन हर एक मिनट पर जम्हाई ले रहे है यानी हमारा शरीर विश्राम चाह रहा है। कभी कभी जम्हाई उबाउपन का भी परिचायक होता है। लगातार शांत और अकेले बैठने से उबाउ सा लगता है और हमारी आंखें बोझिल हो जाती है या अंदर से एकाग्रता की कमी महसूस होती है, ऐसे में लगातार जम्हाई आना आम बात है। जम्हाई के साथ आंखों से पानी गिरने के भी लक्षण दिखाई देते है। शोधकर्ताओं की माने तो नींद, थकान, उबाउपन या अन्य जो भी कारण हो, पर शरीर निढ़ाल होने पर दिमाग मुंह को जम्हाई का संकेत देता है और आमतौर पर ऐसा पाया गया है कि बातूनी और सामाजिक लोगों की अपेक्षा शांत स्वभाव वालों को ज्यादा जम्हाई आती है। जम्हाई ना तो कोई विकार है, ना बीमारी पर इसे बिल्कुल अनदेखा करना भी सही नहीं है। मूलतः इसे शरीर का व्यक्त करने का तरीका कह सकते है कि अभी शरीर और मस्तिष्क पूर्ण रुप से सुचारू नहीं है। ऐसे में थोड़ा टहल लेना, चहलकदमी कर लेना या चाय की चुस्की लेना कभी कभी कारगर साबित होता है।


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