सर्दियों में मुँह से निकलने वाली भाप साफ़ क्यों दिखाई देती है, गर्मियों में क्यों नहीं?

सर्दी के मौसम में मुँह से भाप निकलती हुई दिखाई देना सामान्य बात है। कई बार बच्चों में तो यह खेल का विषय भी बन जाता है। मगर क्या कभी आपने गौर किया है कि केवल सर्दी के मौसम में ही मुँह से भाप निकलती हुई दिखती है, लेकिन गर्मी के मौसम में ऐसा नही होता। आपके शरीर में होने वाली इस क्रिया के बारे में जानकारी होना भी आवश्यक है। भाप दिखाई देने का बहुत ही साधारण सा व आसानी से समझ में आने वाला कारण है, जिसके बारे में विस्तार से आगे बताया जा रहा है।

श्वसन क्रिया के दौरान शरीर के भीतर ऑक्सीजन प्रवेश करती है तथा इसी के साथ कार्बनडाइऑक्साइड व जल का भी निर्माण होता है। कार्बनडाइऑक्साइड की निकासी के साथ-साथ फेफड़ों में वाष्पीकरण की क्रिया से वह जल भाप का रूप ले लेता है। 

सर्दी के मौसम में अधिक ठण्ड होने के कारण मुँह से निकलने वाली भाप के बाहर आते ही संघनन हो जाता है अर्थात् वातावरण में ठंडक के कारण भाप घनी हो जाती है। ठण्ड से भाप के संघनित होने के कारण ये जल की सूक्ष्म बूँदो का रूप ले लेती है तथा स्पष्ट दिखाई पड़ती है। केवल सर्दी के मौसम में ही ठण्ड के कारण मुँह की भाप दिखाई देती है।

गर्मियों के मौसम में ऐसा नही होता है। गर्मियों में भी श्वसन क्रिया के दौरान शरीर के भीतर भाप का निर्माण तो होता ही है, परन्तु बाहरी तापमान अधिक होने के कारण भाप में संघनन क्रिया नही होती है। श्वास के दौरान जैसे ही भाप बाहर आती है, वह गर्मी के कारण सूख कर वहीं खत्म हो जाती है। अतः भाप के संघनित न होने के कारण ये जल की बूँदो में भी नही परिवर्तित हो सकती। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में तापमान की अधिकता के कारण मुँह से निकलने वाली भाप हमें दिखाई नही देती|


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