प्रदूषण किसे कहते हैं ? ( What is pollution ? )

प्रकृति में मौजूद विभिन्न प्रकार की शुद्ध पदार्थ में जब किसी तरह का बेकार अवांछनीय पदार्थ मिलकर उसे भी अशुद्ध बना देता है जो किसी भी जीवो के उपयोग के लायक नहीं रहता है यदि ऐसे पदार्थों को मनुष्य या कोई अन्य जीव ग्रहण करते हैं तो कई प्रकार के बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं ऐसी क्रिया प्रकृति में लगातार हो रहा है जिसे  pollution या प्रदूषण कहा जाता है। यह एक गंभीर समस्या बन चुका है यह सिर्फ हमारे देश की नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है जिसकी चपेट में सभी जीव जंतु और निर्जीव पदार्थ भी आ चुके हैं। प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है प्रकृति के संतुलन में गड़बड़ी होना।
                  मानव जीवन के लिए प्रदूषण बहुत ही खतरनाक है दुनिया भर में प्रदूषण ने विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैलाई है । देश में प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है इसे रोकना बहुत जरूरी है यदि इसे रोका नहीं गया तो पूरा पृथ्वी ही समाप्त हो जाएगा। प्रदूषण रोकने के लिए हर साल सरकार द्वारा नियम कानून बनाए जाते हैं फिर भी इसे रोका नहीं जा रहा है इसका मुख्य कारण है स्वयं जनता । इसे रोकने के लिए हमें जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है वनों की अंधाधुंध कटाई भी प्रदूषण के मुख्य कारणों में शामिल है यह हमारे पूरे परिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है।
           प्रदूषण मुख्यत: 5 प्रकार के होते हैं।
1. जल प्रदूषण ( water pollution ) : जब दूषित पदार्थ जल में मिल जाते हैं तो उसे जल प्रदूषण कहते हैं।
2. वायु प्रदूषण ( Air pollution )  : जब अशुद्ध और हानिकारक गैसे वायु को प्रदूषित करती है तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं।
3. ध्वनि प्रदूषण ( sound pollution )  : जब  वायु में विभिन्न प्रकार के अनावश्यक आवाज मिलकर उसे दूषित करते हैं ध्वनि प्रदूषण कहलाता है।
4. मृदा प्रदूषण ( soil pollution )  : जब मिट्टी में कोई बेकार पदार्थ अनुचित ढंग से मिलकर उसकी गुणवत्ता को खत्म कर देती है मृदा प्रदूषण कहलाता है।
5. तापीय प्रदूषण या नाभिकीय प्रदूषण ( Rey pollution)  : वायुमंडल में अत्यधिक मात्रा में विस्फोटक या अनावश्यक गैसे मिलकर ऑक्सीजन की लगातार कमी करती है जिसके फलस्वरूप वायुमंडल का तापमान बढ़ जाता है इसे तापीय प्रदूषण या नाभिकीय प्रदूषण कहते हैं।
  प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हमें वनों की कटाई से बचना चाहिए, अधिक से अधिक पेड़ लगाने से पर्यावरण को लाभ होगा।
प्रदूषण से बचने के लिए मेरा यही नारा है कि : ,

              वृक्ष धरा का  है आभूषण ,
              दूर करता है यह प्रदूषण ।

हरी भरी हो धरती अपनी,
   यह संकल्प हमारा है,
पर्यावरण को बचाना है।


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