द्रव्य की अवस्थाएँ

ठोस– इसकी निश्चित आकृति होती है। यह घनत्व व आयतन की भी निश्चितता लिए हुए होता है। यह एक पूर्ण द्रव्य (पदार्थ) है, क्योंकि इसमें सभी गुणधर्म होते हैं।
ठोस पदार्थ बहुत सारे अणुओं से मिलकर बनते हैं। अणु एक-दूसरे के अत्यधिक नज़दीक होते हैं, जिससे कोई रिक्त स्थान न होने के कारण अणु एक से दूसरे स्थान पर विचरण नही कर सकते तथा कणों में परस्पर आकर्षण बल होता है।

द्रव- तरल में पाये जाने वाले अणु ठोस पदार्थ की अपेक्षा कम नज़दीक होते हैं, परन्तु गैस की अपेक्षा अधिक नज़दीक होते हैं। ठोस पदार्थ की अपेक्षा परस्पर आकर्षण कम होता है, परन्तु गैस की अपेक्षा तरल में अधिक आकर्षण होता है। इसके आयतन व घनत्व में निश्चितता होती है। अणुओं की दूरस्थता के कारण इनमें प्रवाहित होने की प्रकृति पाई जाती है।

गैस– गैस अवस्था में अणुओं के मध्य अधिक दूरी पाई जाती है तथा आकर्षण बल भी लगभग शून्य होता है। गैस की कोई निश्चित आकृति नही होती है और न आयतन होता है, परन्तु घनत्व की निश्चितता होती है।


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