कोरोना कविता

कोरोना रहे बगल में,चाहे बहुते लॉक लगाए डॉक्टर वैद्य भी चाह कर,उसको नहीं भगाए।

छुआछूत की बात है, कोई नहीं भरमाए 
अलग रहो तुम और से, स्वयं कुटुंब बचाए ।

जबतक तू नहीं लाओगे,घर में नहीं वह आये
त्याग,सकल जग छोड़ दे, सबसे दुरी बनाये।

दैवमंत्र अपनाईलो, लंगा से नहीं छुआये 
दोई गज की बात है, दूरी लियो बनाए ।

मुंह नाक मत छुईओ,हाथ साबुन धोई जाए अपने मुंह को ढके रहो,भले दुसर मुंह बाय।

मोर,तोर है कोई नहीं,नहीं तू हाथ मिलाए बोल नमस्ते दूर से, मंद मंद मुस्काए ।

स्वार्थ कर ले शरीर से, कंदमूल फल खाए 
नशा पान तू त्याज दें,मांस मंदिरा बिलगाए।

अपने और परिवार का, ताकत लेहूं बढ़ाएं 
का करेगा कोरोना,उसको दे भुंजिया बनाएं
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