कैसे आई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत – East India Company arrival in India in Hindi

ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से शायद ही कोई शक्स अनभिग्य होगा| इस कंपनी ने व्यापर करने के उद्देश्य से भारत में कदम रखा एवं भारत पर धीरे-धीरे अपना ऐसा शिकंजा कसा जिसने सम्पूर्ण भारत की जड़ो को हिलाकर रख दिया|

इस कंपनी के भारत में आने से पहले यहाँ पुर्तगाली अपना व्यापार फैलने में लगे हुए थे एवं ईस्ट इंडिया कंपनी ने सबसे पहले मुगलों से व्यापार करने की इजाजत मांगी क्योकि इस समय यहाँ मुगलों का शासनकाल था|

कैसे हुई इस कहानी की शरुआत?

ईस्ट इंडिया कंपनी 1599 ई. में ब्रिटेन में व्यापारियों के एक समूह द्वारा स्थापित किया गया था जिन्होंने बाद में महारानी एलिजाबेथ 1 से भारत में व्यापार करने की अनुमति मांगी जो उन्हें एक चार्टर पत्र के साथ 21 वर्ष तक व्यापार करने की अनुमति प्राप्त हुई|

उस समय भारत में बाहर से व्यापार का मुख्य केंद्र सूरत का बन्दरगाह हुआ करता था जहा 1608 ई. में इंग्लेंड द्वारा भेजा गया जहाज आया जिसके कप्तान का नाम हाकिंस था|

हाकिंस सबसे पहले मुग़ल बादशाह जहाँगीर के दरबार में प्रस्तुत हुए एवं अपनी व्यापार करने की इच्छा जाहिर की जिसे जहाँगीर ने स्वीकार कर लिया|

इसके बाद 1611 ई. में कंपनी ने मूसलीपटनम में स्थाई रूप से अपनी फैक्ट्री की स्थापना की|

1615 ई. में ‘सर थॉमस रो’ ने भारत के अन्य क्षेत्रों में फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति प्राप्त करली इसी कारण थोमस रो को इंडिया के पश्चिमी भागों में कंपनी का विस्तार करने का श्रेय दिया जाता है|

थॉमस रो यह बात अच्छे से जानते थे कि पुर्तगाली उनके व्यापार बढ़ाने की मंशा कामयाब नहीं होने देंगे इसी कारण उन्होंने मुगलों को बड़ी चालाकी एवं कूटनीति से अपनी तरफ करके अनुमति पत्र पर हस्ताक्षर ले लिए|

थोड़े से लोग एवं थोड़ी सी पूंजी के साथ भारत में प्रवेश करने वाली इस कंपनी ने भारत में 200 सालों तक राज किया एवं सदा मुनाफे का सौदा किया|

ईस्ट इंडिया कंपनी का तेजी से भारत में विस्तार:

1619 ई. में अहमदाबाद में कंपनी ने अपनी फैक्ट्री निर्मित की एवं शाहजहाँ के आदेश से किले का निर्माण किया|

इसके बाद 1631 ई. में कंपनी को कर्नाटक में भी फैक्ट्री स्थापित करने की इजाजत मिल गई| चंद्रगिरी के राजा ने 1639 ई. को मद्रास को कंपनी को पट्टे पर दे दिया जहा कम्पनी ने सेंट फोर्ट जॉर्ज का निर्माण किया|

इसके कुछ समय पश्चात् औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान 1667 ई. में कंपनी को बंगाल में व्यापर करने की अनुमति प्रदान की| इसके बाद ईस्ट इंडिया में कंपनी ने मुंबई, कोचीन, एवं पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में अपनी फैक्ट्रीज की स्थापना की एवं व्यापार का विस्तार किया|

1688 ई. में औरंगजेब कंपनी की कुछ नीतियों से नाराज हो गया एवं बंगाल में उनका कार्य निरस्त कर दिया गया किन्तु इससे अंग्रेजों को कोई खासा प्रभाव नहीं पड़ा एवं उन्होंने कोलकाता में अपनी नई फैक्ट्री का निर्माण किया|

ब्रिटिश राज की भारत को देन:

कंपनी ने अपनी सहूलियत के लिए भारत में रेल व्यवस्था का निर्माण किया जिसके उदाहरण आज भी मौजूद है| इसके साथ ही कई अद्भुत किले एवं इमारते बनाई गई जो किसी समय में ब्रिटिश राज का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी|

आज भी देश की कई सड़के एवं कारखाने ब्रिटिश राज की देन है| आने वाले समय में ब्रिटिश राज ने भारत को अपना गुलाम बनाया एवं बहुत सी अनगिनत घटनाये हुई|

ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के कुछ क्षेत्रों को छोडकर लगभग सभी जगह अपनी हुकुमत कायम की एवं 1858 ई. तक यहाँ व्यापार किया| कंपनी ने कई युद्ध भी लड़े जिसमे से बक्सर का युद्ध प्रसिद्ध रहा जो मुगलों, कंपनी एवं नवाबों के मध्य लड़ा गया जिसमे जीत कंपनी की हुई|   


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