fire

आग क्या है?

आपने आग की भीषण लपटों को तो देखा ही होगा। लेकिन इन भीषण लपटों को देखकर एक सवाल आपके दिमाग में ज़रूर उठता होगा, कि आखिर आग है क्या और आग कैसे लगती हैं? इतना ही नहीं यह सवाल भी दिमाग में उठता है, कि आखिर आग की उत्पत्ति के पीछे के कारण क्या हैं। तो आज हम आपके इन ही सवालों को हल करने का प्रयास करेंगे।

अगर बात करें आग की तो आग दहनशील वस्तुओं या पदार्थों का तेज़ ऑक्सीकरण हैं जिसके अंदर से तेज़ प्रकाश, तीव्र ऊष्मा के साथ पानी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होते हैं। जब भी कभी ऑक्सीजन की मौजूदगी में कोई जलने लायक पदार्थ, ऊष्मा के संपर्क में आता है, तो आग उत्पन्न हो जाती हैं। लेकिन ऊष्मा, ऑक्सीजन और जलने लायक पदार्थ में से किसी एक के भी लुप्त होने से आग नहीं जल सकती। अर्थात, आग के जलने के लिए तीनों कारकों की आवश्यकता होती हैं। आग का लगना एक क्रमबद्ध प्रक्रिया होती हैं। जिसके लिए तीनों कारकों का होना जरूरी हैं। जितनी देर तक और जब तक ये तीनों कारक मौजूद होंगे आग जलती रहेगी। अगर आग लगने के लिए उपयुक्त तीनों कारक जैसे- ऑक्सीजन, ज्वलनशील पदार्थ और ऊष्मा में से किसी एक को भी अलग कर दिया जाए तो आग बुझ जाएगी।

अब आप सोच रहे होंगे की आखिर जब आग लगेगी तो हम किस तरह से आग लगने के लिए उपयुक्त तीनों कारकों में से एक को हटाए। अगर आप आग को बुझाना चाहते है तो कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से आग पर पूरी तरह काबू पा सकते है। अगर किसी बंद कमरे या बिल्डिंग में आग लगती है, तो कार्बन डाइऑक्साइड का ही उपयोग करते हैं। दरअसल कार्बन डाइऑक्साइड गैस आग लगने के तीन कारकों में से एक ऑक्सीजन को ख़त्म कर देती हैं, इस स्थिति में आग बुझ जाती हैं।

वहीं आप पानी का उपयोग करके भी आग को बुझा सकते हैं। अब आपके मन में यह विचार आ रहा होगा कि पानी भी तो ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से मिलकर बना हैं तथा दोनों ही ज्वलनशील होते हैं। फिर पानी कैसे आग बुझाता हैं? आपको बता दे कि पानी एक अणु होता है जो कि हाइड्रोजन के दो परमाणु और ऑक्सीजन के एक परमाणु से मिलकर बना होता हैं। लेकिन यह अज्वलनशील प्रवृत्ति का होता हैं। जिसके चलते आग बुझाने के लिए इसका उपयोग किया जाता हैं। तो आपको समझ में आ गया होगा कि आग क्या है और इसकी उत्पत्ति कैसे होती हैं।


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